नए साल में जीरो बिजली उत्पादन वाले सूबे से बाहर निकलेगा बिहार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Dec 2015 6:45 PM

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नए साल में जीरो बिजली उत्पादन वाले सूबे से बाहर निकलेगा बिहार बिजली कंपनी को हर महीने 300 करोड़ से अधिक का अनुदान देती है सरकारसंवाददाता पटना. पिछले तीन साल में जीरो बिजली उत्पादन वाले राज्यों की श्रेणी में शुमार बिहार इस दायरे से निकल जाएगा . फरवरी के इसके बरौनी तापघर से उत्पादन शुरु […]

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नए साल में जीरो बिजली उत्पादन वाले सूबे से बाहर निकलेगा बिहार बिजली कंपनी को हर महीने 300 करोड़ से अधिक का अनुदान देती है सरकारसंवाददाता पटना. पिछले तीन साल में जीरो बिजली उत्पादन वाले राज्यों की श्रेणी में शुमार बिहार इस दायरे से निकल जाएगा . फरवरी के इसके बरौनी तापघर से उत्पादन शुरु हो जाएगा. अगले छह से सात साल में राज्य बिजली उत्पादन में सरपल्स स्टेट की श्रेणी में आ जाएगा. अभी बिहार खरीद की बिजली से रौशन हो रहा है. अभी हर महीने औसतन 800 करोड़ की बिजली खरीद होती है. राज्य सरकार हर महीने बिजली कंपनी को 300 करोड़ के अधिक का अनुदान दे रही है. पिछले एक दशक के दौरान बिजली की खपत में जबरदस्त इजाफा हुआ है. 2005 में जहां बिजली की खपत 1200 मेगावाट थी वह 2015 में बढ़कर 3600 मेगावाट हो गया. राज्य बिजली उत्पादन के मामले में तीन साल में जीरो है. बिजली कंपनी को दोनों तापधर बरौनी व कांटी में 2012 से उत्पादन ठप है.हालांकि आनेवाले दो महीने में स्थिति बदलने वाली है. फरवरी में बरौनी की 110 मेगावाट की एक युनिट तथा साल के अंत तक 110 मेगावाट की एक और युनिट चालू हो जाएगी. अगले साल कांटी से भी बिजली मिलने लगेगा. एक मोटे अनुमान को अनुसार अगले छह से सात साल में बिहार भी बिजली के मामलें में सरपल्स स्टेट हो जाएगा. तब तक नवीनगर, पीरपैंती. कजरा. चौसा आदि प्रोजेक्ट से बिजली मिलना शुरु हो जाएगा. अभी राज्य को लोंगों तक बिजली कंपनियां खरीदकर बिजली पहुंचा रही हैं. विभागीय सूत्रों के अनुसार औसतन हर महीने 800 करोड़ की बिजली खरीद होती है. जवकि बिजली वितरण में हर महीने 550 करोड़ रुपया आता है. शेष 300 करोड़ अनुदान के रुप में सरकार देती है. अगले दो साल में हर धर तक बिजली पहुंचाने की लक्ष्य है. अगले वित्तीय वर्ष में सरकार मुफ्त में बिजली कनेक्शन देना शुरु कर देगी. साल 2000 में 800 मेगावाट की खपत थी उस समय सरकार 30 करोड़ अनुदान देती थी. साल 2002 में खपत 1000 मेगावाट थी उस समय 60 करोड़ अनुदान मिलता था. 2005 में 1200 बिजली की खपत थी तब अनुदान की राशि 90 करोड़ थी.

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