अमेरिका व लंदन के शोधार्थी पहुंचे गांव, महिलाओं से जाना हाल

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अमेरिका व लंदन के शोधार्थी पहुंचे गांव, महिलाओं से जाना हाल गांव में शौचालय निर्माण से महिलाओं की कितनी बदली सोचमहिलाओं की बदलती विचार का टीम ने किया अध्ययन बातों ही बातों में पढ़ाया महिलाओं को स्वच्छता का पाठ संपूर्ण स्वच्छता अभियान के अधिकारी सहयोग में जुटे रहे फोटो नं-14सुदूर गांवों में आज भी पुरुष-महिलाएं […]

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अमेरिका व लंदन के शोधार्थी पहुंचे गांव, महिलाओं से जाना हाल गांव में शौचालय निर्माण से महिलाओं की कितनी बदली सोचमहिलाओं की बदलती विचार का टीम ने किया अध्ययन बातों ही बातों में पढ़ाया महिलाओं को स्वच्छता का पाठ संपूर्ण स्वच्छता अभियान के अधिकारी सहयोग में जुटे रहे फोटो नं-14सुदूर गांवों में आज भी पुरुष-महिलाएं खुले में शौच जाते हैं. इस कुप्रथा के कारण आये दिन हिंसा और अापराधिक घटनाएं होती हैं. उधर, स्वच्छता अभियान के तहत जिले के दियारा इलाके के विशुनपुर पश्चिमी पंचायत के गांवों में घर-घर में शौचालय बन गया है. शौचालय के पूर्व और आज के अंतर पर विचारों में आयी बदलाव का प्रभाव न सिर्फ गांवों में है. बल्कि, इन गांवों में अब विदेशी शोधकर्ता भी पहुंच कर आये बदलाव का अध्ययन कर रहे हैं.संवाददाता, गोपालगंजआॅफ्टर सिंट्रेशन व्हाट इज योर फीलिंग. मतलब आपके घर में शौचालय बना, इसके बाद क्या महसूस कर रही हैं. सदर प्रखंड के विशुनपुर पंचायत के विशुनपुर गांव में ऐसा प्रश्न पूछ रहे थे रावर्ट और ओलिवर. गुरुवार को अमेरिका के रावर्ट, इंग्लैंड के ओलिवर और पूना की सीमा कुलकर्णी जिले की विशुनपुर गांव पहुंचे. ये तीनों सुविधाओं के बाद महिलाओं में आयी बदलाव तथा बिहार के सुदूर गांवों में विकास के साथ लोगों की बदलती सोच पर अध्ययन कर रहे हैं. बिहार के सुदूर गांव की तसवीर और खास कर महिलाओं की सोच तब कैसी थी, जब शौचालय नहीं हुआ करता था. घर में शौचालय बन जाने के बाद अब महिलाओं की सोच में क्या बदलाव आया है. गांव की महिलाओं के बीच ये विदेशी शोधकर्ता न सिर्फ महिलाओं के बदलते विचार का अध्ययन कर रहे थे, बल्कि इस बदलाव पर खुशी भी जाहिर कर रहे थे. विशुनपुर गांव में महिलाओं के बीच बैठ कर शोधकर्ताओं ने उनसे कई प्रश्न भी किये. अध्ययन के लिए पहुंचे शोधकर्ता बातों ही बातों में न सिर्फ उनके विचार जाने, बल्कि स्वच्छता का पाठ भी ग्रामीणों को पढ़ाया. इस मामले में गांव की महिलाएं भी जवाब देने में पीछे नहीं रहीं. महिलाओं ने शौचालय बनने के बाद जीवनशौली में आये बदलाव का खुल कर बखान किया. गौरतलब है कि ग्लोबल सिंट्रेशन द्वारा चनावे, तुरकाहा, और नवादा विशुनपुर में शौचालय का निर्माण कराया गया है. गांव में स्वच्छता अभियान के तहत घर-घर बने शौचालय और लोगों के विचारों एवं जीवनशैली में आये बदलाव की चर्चा अब इंग्लैंड और अमेरिका की धरती पर भी होगी. क्योंकि वहां से चल कर आये ओलिवर और रावर्ट इन गांवों की बदलती तसवीर और विचार को समेट कर अपनी धरती पर ले गये. शोधकर्ताओं के साथ विशुनपुर के मुखिया आदित्य शंकर शाही ग्लोबल सिंट्रेशन के कुमार उमाशंकर, निशांत कुमार, अजीत कुमार, प्रभात कुमार, कविता कुमारी, विजय कुमार, अजय कुमार, सुनील कुमार आदि उपस्थित थे.शाही अंदाज में हुआ विदेशियों का स्वागत इंग्लैड और अमेरिका की धरती से चल कर आये विदेशी शोधकर्ताओं का स्वागत दियारे की धरती विशुनपुर में शाही अंदाज में हुआ. अध्ययन के लिए आये विदेशियों का ग्रामीणों ने जहां भरपूर सहयोग किया. वहीं, स्थानीय मुखिया आदित्य शंकर के यहां बैठक कर विचारों का अदान-प्रदान हुआ. तत्पश्चात विदेशी मेहमानों का स्वागत शाही अंदाज में किया गया. अतिथियों की सेवा की संस्कृति पर खरा उतरते हुए ग्रामीणों ने जम कर आतिथ्य सत्कार किया.गांव की महिलाएं थीं काफी उत्साहित गांव में विदेश के शोधकर्ताओं की टीम को देख महिलाओं में खासा उत्साह था. यहां विदेशी टीम के आने की खबर पर हर घर में साफ-सफाई और व्यापक स्तर पर तैयारी की गयी थी. चतुरबगहा गांव की रमावती देवी ने विदेशी टीम से मिलने के बाद इतना प्रभावित थीं कि अपने रिश्तेदारों से लेकर सगे-संंबंधियों के यहां शौचालय बनाने का प्रयास शुरू कर दिया. साथ ही मुखिया से जिद किया की महिलाओं को समझाने के लिए वह प्रतिदिन एक घंटा काम करेंगी.

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