गोपालगंज : लालू के घर में नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा दांव पर

Updated at : 06 May 2019 6:05 AM (IST)
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गोपालगंज : लालू के घर में नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा दांव पर

गोपालगंज में वोटों की सेंधमारी कर गोलबंदी में जुटे राजनीतिक महारथी राजन गोपालगंज : गोपालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट कई मायनों में खास है. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का गृह जिला है. इस चुनाव में लालू प्रसाद के जेल में रहने से उनके समर्थकों में उदासी है. राजनीतिक परिदृश्य में नरेंद्र मोदी का खुलकर विरोध लालू […]

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गोपालगंज में वोटों की सेंधमारी कर गोलबंदी में जुटे राजनीतिक महारथी
राजन
गोपालगंज : गोपालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट कई मायनों में खास है. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का गृह जिला है. इस चुनाव में लालू प्रसाद के जेल में रहने से उनके समर्थकों में उदासी है. राजनीतिक परिदृश्य में नरेंद्र मोदी का खुलकर विरोध लालू करते रहे हैं.
गोपालगंज का चुनाव परिणाम इस बार फिर इतिहास रचने को तैयार है. चुनाव की तिथि नजदीक होने से राजनीतिक तपिश परवान पर है. चुनावी गणित भी अब साफ होने लगा है. लोग खुलकर सामने आने लगे हैं. कई जगहों पर जातिगत समीकरण भी टूटता दिख रहा है. यहां 12 मई को मतदान होना है. लोकतंत्र के इस मैदान में लालू के गृह जिले में राजद को जहां अपना वजूद बचाने की चुनौती है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. यहां भाजपा ने अपनी सीट जदयू के खाते में दे दी है.
एनडीए के उम्मीदवार डॉ आलोक कुमार सुमन हैं, तो कांग्रेस के खाते में रही यह सीट इस बार महागठबंधन से राजद के उम्मीदवार के रूप में सुरेंद्र राम उर्फ महान हैं. दोनों राजनीति में नये चेहरे हैं. डॉ आलोक कुमार सुमन सदर प्रखंड के जादोपुर दुखहरण गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने गरीबी को काफी करीब से देखा है. उनके पिता ने ट्रक चलाकर इन्हें मुकाम तक पहुंचाया. दूसरी ओर बरौली थाना क्षेत्र के बखरौर के रहने वाले सुरेंद्र राम की पत्नी पुष्पा किरण पहली बार 2016 के पंचायत चुनाव में बीडीसी सदस्य चुनी गयीं और बरौली के प्रखंड प्रमुख के पद पर आसीन हैं.
वैसे जानकार बताते हैं कि सुरेंद्र राम अब तक कई लोगों को नौकरी दिला चुके हैं, जिस कारण लोग इन्हें ‘महान’ कहते हैं. वैसे तो यहां 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, लेकिन, जदयू व राजद में आमने-सामने की टक्कर मानी जा रही है. वोटों में सेंधमारी के लिए अब तक राजद की ओर से तेजस्वी प्रसाद यादव, उपेंद्र कुशवाहा, एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कलराज मिश्र, सुशील मोदी, मंगल पांडेय, नितिन गडकरी, रामविलास पासवान जैसे स्टार प्रचारक सभा कर पूरी ताकत लगा दी है.
वोटों का बिखराव और पार्टी के भीतर चल रहे घमासान ने दोनों ही गठबंधन की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया है. लाख कोशिशों के बाद भी पार्टी के भीतर चल रहा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ऊंट किस करवट बैठेगा फिलहाल कहना मुश्किल है. पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच जंग हुई थी, जिसमें करीब 286936 वोट के अंतर से भाजपा के जनक राम चुनाव जीतकर सदन पहुंचे थे, तब मोदी लहर ने इतिहास बनाया था. नरेंद्र मोदी ने खुद तिलंगही के मैदान में नौ मई को सभाकर वोटों की समीकरण को बदल दिया था, तब कांग्रेस की प्रत्याशी डॉ ज्योति भारती को हार का सामना करना पड़ा था.
राष्ट्रहित में गुम हो गये यहां के मुद्दे
सवेया में उपेक्षित हवाई अड्डे से उड़ान, थावे में डीआरएम कार्यालय नहीं खुलने, एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन नहीं होने के कारण जिले के यात्रियों को यूपी के गोरखपुर और सीवान में जाकर यात्रा की शुरुआत करनी पड़ती है. जिले में गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा. प्रत्येक वर्ष गंडक नदी तबाही मचा रही है.बाढ़पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गयी. जहां तहां झुग्गी-झोपड़ी डालकर लगभग चार हजार से अधिक परिवार छत का इंतजार कर रहे तो पर्यटन के नक्शे से थावे मंदिर गायब है. इस चुनाव में किसी राजनीतिक दलों के एजेंडे में लोकल मुद्दा नहीं है.
एनडीए राष्ट्रीय और देश की सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बनाकर चुनाव मैदान में हैं तो राजद लालू प्रसाद व उनके परिजनों पर हो रही कार्रवाई को मुद्दा बनाकर अपने वोटरों को इमोशनल करने में जुटा है. कुचायकोट के बंगरा गांव के रहने वाले विपिन बिहारी तिवारी बताते हैं कि वह किसी उम्मीदवार को नहीं जानते. यहां तो मोदी से विपक्षी पार्टी का मुकाबला है, तो युवा इरफान बताते हैं कि इस चुनाव में जनता की समस्याएं गौण हैं. मौनिया चौक के कारोबारी माधव सिंह बताते हैं कि इस चुनाव में वोटर अपने मूड बना चुके हैं. वे देश को खतरे में नहीं डाल सकते.
काली प्रसाद पांडेय ने रचा था इतिहास
1957 में पं जवाहर लाल नेहरू के खासमखास रहे डॉ सैयद महमूद जैसे लोग सांसद चुने गये थे. 1962 से 77 तक द्वारिका नाथ तिवारी ने चुनाव जीता था. 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद निर्दलीय प्रत्याशी काली प्रसाद पांडेय चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. इसके बाद यह सीट समाजवाद के खाते में चली गयी.
छह विधान सभा क्षेत्रों में से चार पर एनडीए का कब्जा
विधायक पार्टी विधानसभा क्षेत्र
मिथिलेश तिवारी भाजपा बैकुंठपुर-99
मो नेमतुल्लाह राजद बरौली-100
सुभाष सिंह भाजपा गोपालगंज-101
विधायक पार्टी विधानसभा क्षेत्र
अमरेंद्र कुमार जदयू कुचायकोट-102
अनिल कुमार कांग्रेस भोरे-103 सु
राम सेवक सिंह जदयू हथुआ-104
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