बेकाबू ट्रक ने होमगार्ड के जवान को रौंदा, मौत

Published at :11 May 2018 4:30 AM (IST)
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बेकाबू ट्रक ने होमगार्ड के जवान को रौंदा, मौत

मौके पर मदद मांगता रहा घायल जवान, भाग खड़े हुए अधिकारी कुचायकोट : कुचायकोट थाना क्षेत्र के बलथरी चेकपोस्ट पर तैनात होमगार्ड का जवान ट्रक रोक रहा था. ट्रकचालक ने क्रूरता दिखाते हुए जवान को कुचल दिया और भाग निकला. मौके पर होमगार्ड का जवान चिल्लाता रहा. सहयोग के लिए तड़पता रहा. मौके पर उसके […]

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मौके पर मदद मांगता रहा घायल जवान, भाग खड़े हुए अधिकारी

कुचायकोट : कुचायकोट थाना क्षेत्र के बलथरी चेकपोस्ट पर तैनात होमगार्ड का जवान ट्रक रोक रहा था. ट्रकचालक ने क्रूरता दिखाते हुए जवान को कुचल दिया और भाग निकला. मौके पर होमगार्ड का जवान चिल्लाता रहा. सहयोग के लिए तड़पता रहा. मौके पर उसके साथ तैनात जवान और अधिकारी छोड़कर भाग निकले. काफी देर तक जवान तड़पता रहा. आसपास के लोगों ने मानवता का परिचय दिया और कुचायकोट अस्पताल से एंबुलेंस मंगाया. हालांकि बाद में उत्पाद विभाग के अधिकारी घायल को लेकर कुचायकोट अस्पताल पहुंचे जहां से सदर अस्पताल रेफर किया गया.
सदर अस्पताल में स्थिति नाजुक होते देख उसे गोरखपुर रेफर कर दिया गया. तमकुही के पास पहुंचते ही जवान ने दम तोड़ दिया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गुरुवार की सुबह लगभग छह बजे होमगार्ड जवान शत्रुघ्न सिंह जो उत्पाद विभाग के अधीन तैनात थे, वाहनों की जांच के लिए ट्रक रोक रहे थे. उनके साथी वहां मौजूद थे. ट्रक चालक ने जवानों को देखते हुए अपनी स्पीड और बढ़ा दी. इससे शत्रुघ्न सिंह को कुचलते हुए ट्रक लेकर भागने में सफल रहा.
मौके पर चार दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मी और जवान मौजूद थे. हादसा होते ही अफरातफरी मच गयी सभी उसे छोड़ कर भागने लगे. आसपास के लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया. आक्रोशित लोगों ने जवानों को भला-बुरा भी सुनाया. बाद में इलाज के लिए ले जाने में 25 मिनट विलंब हुआ. तब तीन किमी दूर कुचायकोट अस्पताल में जाकर उसका प्राथमिक उपचार हो सका. हालांकि जवान को बचाया नहीं जा सका.
छोटे बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना रहा अधूरा
मृतक शत्रुघ्न सिंह पिछले दो दिनों पूर्व अपने गांव मंगोलपुर से बलथरी गये थे. शत्रुघ्न सिंह की पत्नी की मौत तीन वर्ष पूर्व हो गयी है. दो बेटे हैं. इसमे बड़ा मुकेश सिंह और छोटा विकास सिंह है. बड़ा बेटा घर पर रहकर खेतीबारी करता है जबकि छोटा विकास दस वर्ष का है जो बरौली के एक निजी स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता है. बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना शत्रुध्न सिंह का अधूरा रह गया. बेटा को इंजीनियर बनाने के लिए अपने ड्यूटी में मुस्तैद रहते थे. एक बड़ी बेटी रिंकू देवी, जिसकी शादी हो चुकी है. घर में बड़े बेटे और बहू के सिवा कोई नहीं है.
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