फर्जी प्रमाणपत्र से नाबालिग को किया बालिग, रचायी शादी

Published at :04 May 2017 8:53 AM (IST)
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फर्जी प्रमाणपत्र से नाबालिग को किया बालिग, रचायी शादी

नगर निगम के जारी सर्टिफिकेट में उम्र 19 साल दीपेश गया : बहला-फुसला कर नाबालिग को भगा ले जानेवाले युवक व उसके परिजनों द्वारा फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर कोर्ट में गवाही दिला कर शादी कराने का मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस की संलिप्तता भी सामने आयी है. हालांकि पुलिस का कहना है […]

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नगर निगम के जारी सर्टिफिकेट में उम्र 19 साल
दीपेश
गया : बहला-फुसला कर नाबालिग को भगा ले जानेवाले युवक व उसके परिजनों द्वारा फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर कोर्ट में गवाही दिला कर शादी कराने का मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस की संलिप्तता भी सामने आयी है. हालांकि पुलिस का कहना है कि पुलिस का काम युवती का कोर्ट में बयान दर्ज कराना है न कि उसकी शादी कराना. वहीं, पीड़ित पिता का कहना है कि जब पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया था व युवक व युवती को बरामद कर लिया था, तो इस बात की सूचना उन्हें क्यों नहीं दी गयी.
संबंधित मामले में बच्ची के पिता ने एसएसपी से न्याय की गुहार लगायी है.
13 अप्रैल को लापता हुई थी नाबालिग: नाबालिग के पिता का आरोप है कि उसकी बेटी को धनु यादव का बेटा सन्नी यादव 13 अप्रैल को उसके घर से बहला-फुसला कर भगा ले गया था.
इस घटना की लिखित सूचना विष्णुपद थाने की पुलिस को दी गयी. पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया. संबंधित मुकदमे का जांच अधिकारी (आइओ) मिथिलेश सिंह को बनाया गया था. पुलिस ने आरोपित युवक व नाबालिग को बरामद कर लिया, लेकिन उनकी बरामदगी की सूचना पुलिस ने उसे नहीं दी. अलबत्ता आरोपित युवक के परिजनों को इसकी जानकारी दी गयी व सीआरपीसी की धारा 164 के तहत नाबालिग का बयान कोर्ट में दर्ज कराया गया.
केस के आइओ को लगायी फटकार
इधर, विष्णुपद थाने के थानाध्यक्ष उदय कुमार का कहना है कि पुलिस का काम आरोपित को पकड़ कर कोर्ट में प्रस्तुत करना है और उसके बाद कोर्ट के आदेश पर आगे की कार्रवाई करने का काम पुलिस का होता है. रही बात पीड़ित पक्ष को आइओ की ओर से सूचना नहीं दिये जाने की, तो इस मामले में आइओ से चूक हुई है. उसे पीड़ित पक्ष को सूचना दी जानी चाहिए थी. संबंधित मामले में आइओ को फटकार लगायी गयी है.
मंदिर में करायी शादी
नाबालिग के पिता का आरोप है कि युवक पक्ष की ओर से कोर्ट में बच्ची का गलत आयु प्रमाणपत्र पेश कर लिखित बयान दर्ज कराया गया. यही नहीं मंदिर में उसकी शादी कराने का प्रमाणपत्र भी पेश किया गया. गलत बर्थ सर्टिफिकेट व मंदिर में शादी के प्रमाण पत्र के प्रस्तुत कर आरोपित पक्ष नाबालिग को अपने साथ ले गये. इस बीच पुलिस की ओर से किसी प्रकार की कोई भी सूचना नहीं दी गयी.
पीड़ित पिता का कहना है कि जब उसे इस बात की भनक लगी तो केस के आइओ से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा व कहा कि अव्वल तो इसकी सूचना उसे नहीं दी गयी व दूसरा बच्ची की उम्र महज 14 साल है. युवक पक्ष की ओर से गलत तरीके से नगर निगम की ओर से जारी आयु प्रमाणपत्र में बच्ची का जन्म एक अप्रैल 1998 दिखाया गया है.
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