अस्पताल में करना था इलाज, पर डॉक्टर ने दे दी बीमारी !

Published at :25 Apr 2017 8:53 AM (IST)
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अस्पताल में करना था इलाज, पर डॉक्टर ने दे दी बीमारी !

ऑपरेशन के बाद से तकलीफ में है सोनाली डाॅक्टर पर लापरवाही का आरोप मानवाधिकार आयोग से शिकायत कर सकते हैं परिजन सोनाली बेहद तकलीफ में है. उसके पेट में दर्द है. पेट में जलन हो रही है. उसके लिए उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया है. ठीक से खाना भी नहीं खा पा रही है. सोनाली […]

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ऑपरेशन के बाद से तकलीफ में है सोनाली
डाॅक्टर पर लापरवाही का आरोप मानवाधिकार आयोग से शिकायत कर सकते हैं परिजन
सोनाली बेहद तकलीफ में है. उसके पेट में दर्द है. पेट में जलन हो रही है. उसके लिए उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया है. ठीक से खाना भी नहीं खा पा रही है. सोनाली का आरोप है कि उसे यह दर्द एक डॉक्टर ने दिया है. वह डॉक्टर पर कार्रवाई चाहती है. सोमवार को सोनाली देवी की मां निर्मला वर्मा ने अपनी बेटी की तकलीफ बतायी और पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी. निर्मला ने बताया कि जय प्रकाश नारायण अस्पताल में चिकित्सकों ने उनकी बेटी के इलाज में कोताही की व जब उसकी हालत संगीन होने लगी, तो प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के लिए उस पर दबाव बनाया गया.
सोनाली ने कहा कि तकलीफ को बरदाश्त करते हुए वह मर जाना चाहेगी, लेकिन अब सरकारी अस्पताल में अपना इलाज नहीं करायेगी. वह जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों के पास भी मामले की शिकायत करेगी और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा भी खटखटायेगी.
आॅपरेशन के बाद से ही हो रही थी परेशानी : निर्मला देवी ने बताया कि उनकी बेटी सोनाली देवी का जय प्रकाश नारायण अस्पताल में 18 जनवरी को आॅपरेशन कर प्रसव हुआ था. डाॅ नीता अग्रवाल ने उसका आॅपरेशन किया था. इसके बाद से ही वह तकलीफ में थी. उसके पेट में दर्द हो रहा था. रोज अलग-अलग डाॅक्टर आकर उसका इलाज कर रहे थे.
डिस्चार्ज होने तक वह तकलीफ में थी. घर जाने के बाद पेट में लगे टांके में से खून व मवाद निकलने लगा. कुछ दिनों तक बरदाश्त करने के बाद निर्मला अपनी बेटी सोनाली को लेकर फिर जय प्रकाश नारायण अस्पताल पहुंची. यहां डाॅ नीता अग्रवाल से उनकी मुलाकात नहीं हुई. किसी डाॅ पूनम ने उसे दवा दी. इसके बाद से वह लगातार अस्पताल आती रही,अलग-अलग चिकित्सकों ने इलाज किया और दवा देते रहे.
मामले में हो रही जांच: इधर, इस मामले में सिविल सर्जन डाॅ बबन कुंवर का कहना है कि डीएम कुमार रवि के निर्देश पर मामले की जांच करायी जा रही है. अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ पीके अग्रवाल को यह जिम्मेदारी दी गयी है. इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है.
डाॅक्टर ने कहा, पैसा बचाने के लिए आती हो सरकारी अस्पताल !
निर्मला ने बताया कि 20 अप्रैल को वह जब अपनी बेटी सोनाली को लेकर जेपीएन अस्पताल पहुंची, तो ओपीडी में डाॅ नीता अग्रवाल से मुलाकात हो गयी. उन्होंने डाॅ अग्रवाल को बेटी की समस्या बतायी. निर्मला ने बताया कि डॉक्टर ने चेक अप के बाद कहा कि सोनाली के पेट के अंदर का टांका फट गया है. इतना सुनते ही सोनाली घबरा गयी. इसके बाद डाॅक्टर ने कहा कि अब दवा से कोई इलाज संभव नहीं है. आॅपरेशन करना पड़ेगा. परिवार के लोग तैयार हुए, तो डाॅक्टर ने कहा कि यहां (जेपीएन अस्पताल) में आॅपरेशन संभव नहीं है. यहां के औजार काफी पुराने हैं. उनमें जंग लग गये हैं. निर्मला के मुताबिक डाॅ अग्रवाल ने यह भी कहा कि उस जैसे लोग पैसा बचाने के चक्कर में सरकारी अस्पताल चले आते हैं. डाॅक्टर ने कहा कि उनके प्राइवेट अस्पताल में चल कर आॅपरेशन करा लें. इसके बाद ही निर्मला वर्मा नाराज हो गयी और शोर करने लगी. इसके बाद उन लोगों ने सिविल सर्जन से मुलाकात की व अपनी बात कही.
अब तक नहीं हो सका आॅपरेशन
परिवार के लोग 20 अप्रैल को ही सोनाली को डाॅ सुषमा वर्मा के प्राइवेट अस्पताल में ले गये. निर्मला वर्मा ने बताया कि सोनाली को देखने के बाद डाॅ सुषमा वर्मा ने कहा कि इसका मामला वाकई बिगड़ा हुआ है. इसके पेट में अब नेट लगाना होगा. लेकिन, मुश्किल यह है कि सोनाली के सिजेरियन आॅपरेशन हुए अभी तीन महीना ही बीता है. उसके शरीर में खून कम होने की वजह से वह कमजोर हो गयी है. ऐसी स्थिति में उसका आॅपरेशन अभी नहीं हो सकता है. डाॅ वर्मा ने सोनाली को पेट में बांधने के लिए एक बेल्ट दिया और कहा कि उसकी सेहत में थोड़ी सुधार के बाद किसी अच्छे सर्जन से उसका आॅपरेशन करना होगा. सोनाली के परिवार के सामने अब मुश्किल यह है कि दूसरे आॅपरेशन के लिए वह पैसा कहां से लाये. सोनाली का पति संजीत आॅटो चालक है. दोनों को पहले से दो बेटियां हैं और अभी तीन महीने पहले एक और बेटी हुई है. ऐसे में अब प्राइवेट अस्पताल में फिर से आॅपरेशन का खर्च कहां से आयेगा, यह सोच कर सभी परेशान हैं.
‘जिसकी जान पर बनी हो, उसे कोई क्या भड़कायेगा’
सिविल सर्जन का वह बयान जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि सोनाली के परिवार को किसी तीसरे व्यक्ति ने भड़काया है, पर सोनाली की मां ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा कि जिस मां की बेटी की जान मुश्किल में है. जिस परिवार का सदस्य जिंदगी और मौत में झूल रहा हो, उसे क्या गुस्सा दिलाने के लिए किसी तीसरे आदमी की जरूरत पड़ेगी? डाॅक्टर द्वारा जिसकी बेटी की नाजुक हालत व मजबूरी देख उसे प्राइवेट अस्पताल में चल कर इलाज कराने का दबाव बनाया जाये, क्या उस मां को भड़काने के लिए किसी तीसरे आदमी की जरूरत पड़ेगी? डाॅ नीता अग्रवाल द्वारा यह कथित तौर पर यह कहने कि सोनाली का परिवार झूठा आरोप लगा रहा है, के जवाब में निर्मला ने कहा कि वे लोग गरीब हैं. उनके दिमाग में यह बात आ ही नहीं सकती कि अस्पताल में औजार पुराना है. अगर कोई झूठा आरोप ही लगाना होता, तो कई बहाने हो सकते थे. कोई भी मां अपनी बेटी की जान मुश्किल में डाल कर किसी को फंसाने की साजिश नहीं कर सकती.
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