निगम ने दी प्रोन्नति, पर नगर विकास विभाग में फंसा मामला

Published at :23 Mar 2017 9:08 AM (IST)
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निगम ने दी प्रोन्नति, पर नगर विकास विभाग में फंसा मामला

गया: नगर निगम में कनीय अभियंताओं को पदोन्नति देने का मामला घेरे में है. जानकारी के अनुसार, नौ मई 2012 को नगर विकास व आवास विभाग के संयुक्त सचिव ने नगर आयुक्त को पत्र भेज कर कनीय अभियंताओं की वरीयता सूची मांगी थी. पत्र में संयुक्त सचिव ने कहा था कि वरीयता सूची प्राप्त होने […]

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गया: नगर निगम में कनीय अभियंताओं को पदोन्नति देने का मामला घेरे में है. जानकारी के अनुसार, नौ मई 2012 को नगर विकास व आवास विभाग के संयुक्त सचिव ने नगर आयुक्त को पत्र भेज कर कनीय अभियंताओं की वरीयता सूची मांगी थी. पत्र में संयुक्त सचिव ने कहा था कि वरीयता सूची प्राप्त होने के बाद विभाग को प्रोन्नति से संबंधित दिशा-निर्देश दिया जायेगा. 25 जून 2012 को तत्कालीन नगर आयुक्त ने वरीयता सूची विभाग को उपलब्ध करा दी थी, लेकिन विभागीय पेच से मामला आगे नहीं बढ़ सका. हालांकि पांच नवंबर 2007 को आयोजित गया नगर निगम की स्टेंडिंग की बैठक में कनीय अभियंताओं की प्रोन्नति का प्रस्ताव पारित किया गया था. इसके लिए नगर आयुक्त को बोर्ड ने नियम, वरीयता व आरक्षण नियमावली पालन करते हुए प्रोन्नति देने के लिए अधिकृत किया था.
सूची में ऊपर, फिर भी नहीं मिली पदोन्नति: प्रोन्नति के समय किसी प्रकार की वरीयता व आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया जा सका. इसके बाद कुछ अभियंताओं ने ही विभाग में पत्र देकर प्रोन्नति की मांग की. उसके बाद रोस्टर तैयार किया गया. पता चला है कि प्रोन्नति देते वक्त कई कनीय अभियंता वरीय थे, पर उनको प्रोन्नति नहीं दी गयी. 2008 में वरीयता सूची में नौ नंबर पर आये शैलेंद्र कुमार व 11 नंबर पर आये उमेश प्रसाद को सहायक अभियंता बना दिया गया. इस दौरान तत्कालीन नगर आयुक्त ने अभियंताओं के बीच असंतोष देख वरीयता सूची में दो नंबर पर रहे विनोद प्रसाद व तीन नंबर पर रहे मनोज कुमार को 2009 में सहायक अभियंता पद पर प्रोन्नत कर दिया. सरकार के पास पदोन्नति को संपुष्टि के लिए भेजा गया. लेकिन, अब तक विभाग के स्तर पर कोई आदेश नहीं मिल सका है. ऐसे में ये अभियंता प्रोन्नति के बावजूद प्रभारी के तौर पर काम कर रहे हैं.
नियम के खिलाफ निगम में हो रहा काम
योजनाओं के संचालन या फिर फाइनल होने पर सरकार से बिना स्वीकृत सहायक अभियंता से काम लिया जाना नियम के खिलाफ है. कई योजनाओं में इस तरह के मामले सामने आये हैं. जानकार बताते हैं कि पानी की योजना निगम के ही इन्हीं प्रभारियों द्वारा फाइनल की गयी है. डूडा के कार्यपालक अभियंता के पास फाइल तक नहीं भेजी गयी है. अभियंताओं को ही योजनाओं के काम के अलावा अन्य कार्यों का प्रभार सौंपा गया है. इसके कारण कोई भी काम सही ढंग से नहीं हो पा रहा है.
अनुमोदन के लिए भेजी गयी है फाइल
सहायक अभियंताओं के प्रोन्नति के अनुमोदन के लिए सरकार को फाइल भेजी गयी है. निगम में ठीक से योजनाओं के निबटारे के लिए सहायक अभियंता पद पर अनुमोदन का फैसला जल्द होना चाहिए. वरीयता से हट कर प्रोन्नति देने का मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है. इसमें अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी की गयी है, तो इसकी जांच करायी जायेगी. अभियंताओं के बिना शहर का विकास संभव नहीं है. सोनी कुमारी, मेयर
2012 में बनायी गयी वरीयता सूची
कनीय अभियंताओं योगदान की तिथि शैक्षणिक प्रमाणपत्र व
के नाम साक्षात्कार के अंक
धर्मेंद्र कुमार 13 सितंबर 1994 83
विनोद प्रसाद 09 सितंबर 1994 81
मनोज कुमार 09 सितंबर 1994 80
दिनकर प्रसाद 12 सितंबर 1994 78
सुबोध कुमार सिंह 12 सितंबर 1994 77
जयप्रकाश सिंह 12 सितंबर 1994 74
देवनंदन प्रसाद 12 सितंबर 1994 73
जय कुमार सिंह 09 सितंबर 1994 72
शैलेंद्र कुमार सिन्हा 12 सितंबर 1994 72
किशोर प्रसाद 12 सितंबर 1994 70
उमेश प्रसाद 09 सितंबर 1994 68
अक्षय कुमार 09 सितंबर 1994 67
फ्रांसिस बारला 09 सितंबर 1994 64
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