सरकार ने मदद नहीं की, तो फेल होगी योजना
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Mar 2017 2:59 AM (IST)
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डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव प्लान. कचरा कलेक्शन के लिए रिक्शा खरीद में लगी रकम दावं पर सिर्फ मजदूरी की रकम का हिसाब देख मेयर ने खड़े किये हाथ कहा-आर्थिक सहयोग नहीं मिला, तो बेकार हो जायेंगे हाल में खरीदे गये सवा करोड़ के रिक्शे गया : निगम क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए लाये गये […]
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डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव प्लान. कचरा कलेक्शन के लिए रिक्शा खरीद में लगी रकम दावं पर
सिर्फ मजदूरी की रकम का हिसाब देख मेयर ने खड़े किये हाथ
कहा-आर्थिक सहयोग नहीं मिला, तो बेकार हो जायेंगे हाल में खरीदे गये सवा करोड़ के रिक्शे
गया : निगम क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए लाये गये रिक्शों के संचालन के शुरुआत में ही ग्रहण लगता नजर आ रहा है. मेयर सोनी कुमारी ने कहा कि सरकार की ओर से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पर जोर दिया जा रहा है. टेंपो के माध्यम से इसकी शुरुआत की गयी. हर जगह संभव न देख कचरा कलेक्शन के लिए 300 रिक्शे खरीदे गये. अब इनके संचालन के लिए राज्य सरकार का सहयोग चाहिए. सहयोग के बिना योजना पूरी तौर से फेल हो जायेगी. उन्होंने कहा कि 300 रिक्शाें से कचरा कलेक्शन के लिए 600 लेबर की जरूरत होगी. इनके वेतन में लगभग निगम पर 46.80 लाख रुपये का भार हर माह आयेगा.
वर्तमान स्थिति में निगम यह खर्च वहन करने में सक्षम नहीं है. राज्य सरकार अपने स्तर पर 600 लेबर बहाल करे या फिर इसके लिए अलग से फंड निगम में उपलब्ध कराया जाये. उन्होंने कहा कि निगम के पास आमदनी के स्रोत के अनुसार ही लोगों को सुविधाएं दी जा रही हैं. अतिरिक्त सुविधा के लिए प्रयास करना तभी संभव है, जब निगम की आय बढ़ेगी. फिलहाल कचरा उठाव में टेंपो व वार्ड के लेबर को लगाया जा रहा है. अगर इतने ही मजदूरों में रिक्शे से कचरा उठाव शुरू किया गया,
तो नाली सफाई व वार्डों में झाडू देने का काम ठप हो जायेगा. वार्ड पार्षद सारिका वर्मा ने कहा कि रिक्शे आने के बाद लेबर पूरी तौर पर अव्यवस्थित हो गये हैं. टेंपो व वार्ड के लेबर को रिक्शा पर कचरा कलेक्शन में लगा दिया गया है. नाली से निकाले गये सिल्ट को उठाने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा है. इस कारण पूरे वार्ड में सिल्ट जमा हो गया है. उन्होंने कहा कि लेबर बढ़ाये जाने के बाद ही यह योजना सफल हो सकती है.
चार दिन पहले शुरू हुआ अभियान
रिक्शे से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का शुभारंभ एक मार्च को पूरे तामझाम के साथ किया गया था. इस दौरान मौजूद सभी ने इसके फायदे गिनाये थे, पर उस वक्त इस पर आनेवाले खर्च का आंकड़ा किसी ने नहीं लगाया था. खर्च के आंकड़े मिलने की जानकारी के बाद मेयर ने हाथ खड़े कर दिये. 2007 में 53 रिक्शों की खरीदारी की गयी थी. फिलहाल एक भी रिक्शा कारगर नहीं है. इसकी खरीद पर ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया था की रिक्शे की खरीदारी व्यर्थ थी. गौरतलब है कि
नगर निगम की ओर से हर वार्ड में जगह-जगह कचरा संग्रह के लिए डस्टबीन लगाया गया है, लेकिन लोग कचरा इसमें न डाल कर डस्टबीन से बाहर फेंक देते हैं. इसको लेकर भी निगम को हर वक्त फजीहत झेलनी पड़ी है.
वहीं, कचरा कलेक्शन के लिए संकीर्ण गलियों में टेंपो नहीं जा पाता है. इन सभी बातों को ध्यान में रखकर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए निगम क्रय समिति की 10 सितंबर 2016 को हुई बैठक में कृषि यंत्र केंद्र, पटना से 300 रिक्शे खरीदने का फैसला लिया गया. इसमें एक रिक्शे की कीमत 44,444 रुपये है. पहले 200 रिक्शों की आपूर्ति निगम को की गयी है. अधिकारियों ने जानकारी दी कि अभी 100 रिक्शे और आयेंगे.
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