नहीं मिल रहा क्वालिटी एजुकेशन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Apr 2016 8:41 AM

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देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में योग्य व दक्ष शिक्षकों की कमी है, जिससे क्वालिटी एजुकेशन नहीं मिल रहा है. इस कारण समाज में अयोग्य लोगों की एक बड़ी फौज खड़ी होती जा रही है, जो भविष्य के लिए बेहतर संकेत नहीं है. बोधगया : एमयू के शिक्षा विभाग स्थित डॉ राधाकृष्णन सभागार में उच्च […]

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देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में योग्य व दक्ष शिक्षकों की कमी है, जिससे क्वालिटी एजुकेशन नहीं मिल रहा है. इस कारण समाज में अयोग्य लोगों की एक बड़ी फौज खड़ी होती जा रही है, जो भविष्य के लिए बेहतर संकेत नहीं है.
बोधगया : एमयू के शिक्षा विभाग स्थित डॉ राधाकृष्णन सभागार में उच्च शिक्षा में चुनौतियां विषय पर गुरुवार को सेमिनार का आयोजन किया गया. इसमें जामिया मिलिया इसलामिया विश्वविद्यालय के मानव संसाधन केंद्र के डॉ अनिस्सुर रहमान ने कहा कि विगत दो दशकों में उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. आंकड़े बताते हैं कि इन उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन में भी काफी तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन, यहां विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन नहीं मिल रहा है. क्वालिटी एजुकेशन नहीं मिलने से समाज में अयोग्य लोगों की एक बहुत बड़ी फौज खड़ी होती जा रही है, जो भविष्य के लिए बेहतर संकेत नहीं है.
डॉ रहमान ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए योग्य व दक्ष शिक्षकों की जरूरत होती है. लेकिन, योग्य व दक्ष शिक्षकों पर ये संस्थान उनकी दक्षता के अनुरूप रुपये खर्च नहीं करना चाहते हैं. इस कारण योग्य व दक्ष शिक्षक बेहतर प्लेसमेंट की तलाश में पलायन कर जाते हैं. शिक्षित व दक्ष व्यक्ति को काम के बदले अच्छे पैसे चाहिए. अगर उसे बेहतर रिजल्ट नहीं मिला, तो वह दूसरे राज्य या देश का रास्ता देख लेते हैं. इस तरह उक्त इलाके में योग्य शिक्षकों की कमी बरकरार रहती है. क्वालिटी एजुकेशन के लिए छात्र-शिक्षक का सही अनुपात बनाये रखना जरूरी है.
शोध के लिए फंड की कमी नहीं
डॉ रहमान ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शोध का अभाव है. शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी स्थिति सम्मानजनक नहीं है. देश में शोध के लिए फंड की कोई कमी नहीं है. बस शोध के इच्छुक लोगों के पास जानकारी का अभाव है. अगर किसी के पास राष्ट्र या समाज हित में किसी विषय पर शोध की योजना है, तो अब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसी एजेंसियां हैं, जो इसके लिए फंड मुहैया कराने के लिए तत्पर हैं. उन्होंने विद्यार्थियों से किसी न किसी विषय पर आजीवन शोध करने का आग्रह किया.
वित्तीय संकट भी है एक समस्या
डॉ रहमान ने उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलने के पीछे एक कारण वित्तीय संकट भी बताया. उन्होंने कहा कि हमारे यहां वित्तीय संकट है. विकसित राष्ट्रों में हायर एजुकेशन के लिए तीन से छह प्रतिशत का बजट होता है, जबकि भारत में मात्र 0.8 प्रतिशत है.
उच्च शिक्षण संस्थानों में वित्त (रुपये) नहीं होगा, तो विकास कैसे होगा. इस दौरान स्वागत भाषण मन्नूलाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के को-अॉर्डिनेटर डॉ एमएमए अंसारी व विषय प्रवेश सहायक प्रोफेसर डॉ धनंजय धीरज ने किया. धन्यवाद ज्ञापन करने के दौरान दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के डायरेक्टर डॉ इसराइल खां ने कहा कि डॉ अनिस्सुर रहमान ने बहुत ही कम समय में इस कार्यशाला में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार किया. इसके लिए एमयू प्रशासन उन्हें बधाई देता है. भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर उनके अनुभवों से एमयू के विद्यार्थियों को अवगत कराया जायेगा. इस मौके पर डॉ जफर आलम, डॉ पीके धल, डॉ नरगिस नाज, डॉ बुद्धप्रिय, रश्मि सिन्हा, मुसर्रत जहां, मुकेश कुमार व रामरतन पासवान सहित बीएड के विद्यार्थी उपस्थित थे.
डॉ रहमान ने प्रोजेक्टर के जरिये उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महिला सहभागिता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महिला सहभागिता को बढ़ाना हम सभी के लिए एक चुनौती है. उन्होंने सेमिनार में मौजूद शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों से कहा कि वे भविष्य में शिक्षक बनेंगे. ईमानदारीपूर्वक शिक्षक का रोल अदा करें. इसके लिए वह एक फार्मूला अपनाएं, पहले पढ़े तब क्लास में पढ़ाएं, तभी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात सकारात्मक होगी, अन्यथा इस मुद्दे पर बात करना बेमानी होगी. उन्होंने शिक्षकों को नीति-निर्धारण की सहभागिता पर बल दिया और विद्यार्थियों की भी सहभागिता बढ़ाने की बात कही.
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