कोचिंग के कारण उच्च शिक्षा का हाल बुरा : समदानी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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गया: प्राइवेट कोचिंग जगह-जगह खुलने के कारण आज उच्च शिक्षा का बुरा हाल हुआ है. स्टूडेंट्स कॉलेज में नामांकन तो करा लेते हैं, पर क्लास करने नहीं आते. उक्त बातें प्रभात खबर द्वारा मिर्जा गालिब कॉलेज में सोमवार को आयोजित परिचर्चा में कॉलेज के प्राचार्य डॉ गुलाम समदानी ने कही. उन्होंने कहा कि शिक्षा में […]
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गया: प्राइवेट कोचिंग जगह-जगह खुलने के कारण आज उच्च शिक्षा का बुरा हाल हुआ है. स्टूडेंट्स कॉलेज में नामांकन तो करा लेते हैं, पर क्लास करने नहीं आते. उक्त बातें प्रभात खबर द्वारा मिर्जा गालिब कॉलेज में सोमवार को आयोजित परिचर्चा में कॉलेज के प्राचार्य डॉ गुलाम समदानी ने कही. उन्होंने कहा कि शिक्षा में आयी स्तर हीनता के लिए अभिभावक भी दोषी हैं. सरकार हर सुविधा दे रही है, पर अपनी महत्वकांक्षा के आगे सुविधा का लाभ लेना नहीं चाहते.
कॉलेज के शिक्षक प्रतिनिधि डाॅ खुर्शीद आलम खां ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाएं अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि आज समाज में सहनशीलता की कमी हो गयी है. छोटी-छोटी बात को बड़ा रूप देकर विद्रोह फैलाने की कोशिश की जा रही है. समाज में अच्छा माहौल कायम करने के लिए मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है. किसी छोटी घटना को अपनी लोकप्रियता के लिए मीडिया बड़ी दिखाती है. इससे समाज में विद्वेश फैलता है. एआइएसएफ से जुड़े कुमार जितेंद्र ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रति सरकार के उदासीन रवैये के कारण आज उच्च शिक्षा के स्तर में गिरावट आयी है. शिक्षा को गति पकड़ाने के लिए कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती की जानी चाहिए, पर सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है. प्रभात खबर इस मांग को समय-समय पर उठाता रहा है.
प्रो हफीजुर रहमान ने कहा कि मीडिया में निगेटिव खबर को प्राथमिकता से उछाला जाता है. इसका समाज पर बुरा असर पड़ रहा है. सरकार शिक्षा विभाग की बहाली में जिस दिन से पारदर्शिता बरतेगी, उस दिन से शिक्षा का हाल बेहतर हो जायेगा. शिक्षा जगत पर धन का कब्जा हो गया है. छात्र नेता सतीश कुमार ने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था से समाज का विश्वास उठ गया है. विश्वविद्यालयों का हाल बुरा है. सरकार बिहार में प्राइवेट विश्वविद्यालय खोलने की बात कर रही है. शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए मीडिया को और अधिक जोर लगाना होगा. डॉ फजलू रहमान ने कहा कि ग्रामीण व शहरी इलाके में असुरक्षा के माहौल के कारण असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है.
प्रो इकबाल हुसैन ने कहा कि किसी व्यवस्था में गड़बड़ी के लिए किसी एक को जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता. इसके लिए पूरा समाज जिम्मेवार होता है. किसी व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन शुरुआती समाधान नहीं है, इसे अंतिम समाधान माना जाना चाहिए. प्रो जमाल मलिक ने कहा कि सिलेबस चेंज करने की जानकारी दे दी जाती है, पर सिलेबस के अनुसार शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की कोई व्यवस्था नहीं है. इस कारण शिक्षक स्टूडेंट्स को सिलेबस के अनुसार शिक्षा नहीं दे पाते.
छात्रा प्रियदर्शनी गुप्ता ने कहा कि स्टूडेंट्स में आरंभिक शिक्षा के दौरान ही रोजगार पाने की चाहत होती है. शिक्षा को शिक्षा के लिए नहीं, बल्कि रोजगार के लिए ग्रहण करते हैं. रविशंकर ने कहा कि छात्रों में हाल के दिनों में आत्महत्या की प्रवृति बढ़ी है.
इसके रोक के लिए कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थानों में काउंसेलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए. प्रो सरफराज खां ने कहा कि समाज का हर व्यक्ति अपनी जिम्मेवारी भूल गया है. जिस दिन समाज के लोग जग जायेंगे, उसी दिन शिक्षा में सुधार आ जायेगा. डॉ जुगनू जहां ने कहा कि आज अभिभावक के पास समय का अभाव है. इसके कारण बच्चों में व्यावहारिक ज्ञान का अभाव देखा जा रहा है.
इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा. साहिल निशांत ने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर विभागों में सामंजस्य के अभाव के कारण शिक्षा में गिरावट आयी है. इसके विरोध में प्रभात खबर ने सार्थक पहल की है. प्रो मोती करीमी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रभात खबर ने सार्थक पहल की है.
प्रभात खबर के स्थानीय संपादक कौशल किशोर त्रिवेदी ने कहा कि समस्याओं का रोना रोकर लोग समस्याओं को बढ़ाते हैं. रोना-रोने के बजाय अगर समस्या के समाधान का प्रयास करें, तो समस्या होगी ही नहीं.
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