बुद्ध व पर्यावरण पर चिंतन-मनन
बुद्ध व पर्यावरण पर चिंतन-मननफाेटाे-बौद्ध महोत्सव में बीटीएमसी की ओर से बुद्ध एंड इन्वायरमेंट विषय पर सेमिनार का आयोजन वक्ताओं ने कहा- पर्यावरण में संतुलन बनाये रखने के लिए वैश्विक स्तर पर करने होंगे प्रयाससंवाददाता, बाेधगयाबौद्ध महोत्सव के अंतिम दिन महाबोधि मंदिर परिसर में बीटीएमसी की ओर से बुद्ध एंड इन्वायरमेंट विषय पर सेमिनार का […]
बुद्ध व पर्यावरण पर चिंतन-मननफाेटाे-बौद्ध महोत्सव में बीटीएमसी की ओर से बुद्ध एंड इन्वायरमेंट विषय पर सेमिनार का आयोजन वक्ताओं ने कहा- पर्यावरण में संतुलन बनाये रखने के लिए वैश्विक स्तर पर करने होंगे प्रयाससंवाददाता, बाेधगयाबौद्ध महोत्सव के अंतिम दिन महाबोधि मंदिर परिसर में बीटीएमसी की ओर से बुद्ध एंड इन्वायरमेंट विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार का मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एम इश्तियाक, सीयूएसबी के कुलपति डॉ हरिशचंद्र राठौर, मगध प्रमंडल प्रमंडल आयुक्त वंदना किनी व बौद्ध भिक्षुओं ने उद्घाटन किया. सेमिनार में वक्ताओं ने भगवान बुद्ध, पर्यावरण संतुलन के बिगड़ते स्वरूप व उसमें हो रहे बदलाव पर अपनी राय रखी. सेमिनार के उद्घाटन सत्र में सीयूएसबी के कुलपति डॉ राठौर ने कहा कि गांधी ने बुद्ध के ही उपदेशों का अनुकरण कर शांति-अहिंसा का मार्ग अपनाया था. एमयू के कुलपति डॉ एम इश्तियाक ने कहा कि बुद्ध ने भी मध्यम मार्ग की बात की थी. उन्होंने कहा कि विकास की दौड़ में पर्यावरण को हानि पहुंचायी जा रही है. इस पर रोक लगानी होगी. मगध प्रमंडल आयुक्त ने कहा कि बुद्ध को इसी धरती पर ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. तब यहां पर्यावरण में बेहतर संतुलन था. हमें बुद्ध के मध्यम मार्ग का अनुसरण करना चाहिए. सेमिनार के दूसरे सत्र (समापन सत्र) में डीएम सह बीटीएमसी के पदेन अध्यक्ष कुमार रवि ने कहा कि बुद्ध की ज्ञान भूमि पर पर्यावरण को लेकर की गयी परिचर्चा के अच्छे परिणाम ही निकलेंगे. सभी को सार्थक प्रयास करना होगा, तभी पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है. उन्होंने सेमिनार में शामिल होनेवाले देश-विदेश वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया. सेमिनार में भूटान के प्रतिनिधि सोनम दुरजी, बंगलादेश के भिखु बारा संबोधि, म्यांमार के सा हूत संदर, नव नालंदा महाविहार के रामनक्षत्र प्रसाद व विश्वजीत, एमयू की डॉ कुसुम कुमारी, गया कॉलेज के डॉ केके नारायण, दिल्ली के डॉ ऋषिकेश शरण, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट काउंसिल, बाेधगया के महासचिव किरण लामा सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये. दिल्ली के डॉ शरण ने कहा कि एक साथ सैकड़ों हाथों में दीप जलाने से अंधकार जरूर कुछ भागेगा. हमें वैश्विक स्तर पर पर्यावरण में संतुलन बनाये रखने के लिए प्रयास करने होंगे. अंत में धन्यवाद ज्ञापन बोधगया महाबोधि मंदिर के मुख्य पुजारी भिक्खु चालिंदा ने किया. उन्होंने भी विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से पर्यावरण संतुलन की दिशा में पहल करने की अपील की.
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