दिने राते तू करबऽ घोटाला, हाथ में लेके फेरबऽ माला...
दिने राते तू करबऽ घोटाला, हाथ में लेके फेरबऽ माला…जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य चक्र के तहत काव्य संध्या का आयोजनसंवाददाता,गयाजिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य चक्र के तहत काव्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र ने की. काव्य संध्या का शुभारंभ करते हुए डॉ सुधांशु ने कहा […]
दिने राते तू करबऽ घोटाला, हाथ में लेके फेरबऽ माला…जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य चक्र के तहत काव्य संध्या का आयोजनसंवाददाता,गयाजिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य चक्र के तहत काव्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र ने की. काव्य संध्या का शुभारंभ करते हुए डॉ सुधांशु ने कहा -दुनिया में जन्म लिया है, उन्हें अपना कर्म अदा करना है. नवीन नवनीत ने कहा-गम का सागर उतरते रहे उम्र भर, आंसुओं का खारापन सरकन लगा. प्रो मनान अंसारी ने गजल में कहा- पूछा एक दिन भगवान से कैसा हिंदुस्तान बनाया. मजहब की दीवार बनायी, ऐसा क्यों इंसान बनाया? मुद्रिका सिंह ने अपनी कविता पढ़ल लिखल में कहा कि दिने राते तू करबऽ घोटाला, हाथ में लेके फेरबऽ माला. पेनहले रहब तू फहफह उज्जर, बाकी दिल के तू हऽ काला. डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि ने समाज से सवाल किया-क्यों रोती यहां आज भी सीता? संजय सहियावी ने भोजपुरी गीत गाया–प्यार प्यारे वा कउनो भीख नइखे. जयराम कुमार सत्यार्थी ने अपनी कविता वाह क्या बात है पढ़ी. पीयूष रंजन ने पवित्र प्यार कविता का पाठ किया. योगेश कुमार मिश्र ने भइली मजदूर रे कविता में मजदूरों की दशा की चर्चा की. सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि हर मजहब का एक हो नारा, मानवता व भाईचारा. संजीत कुमार ने गजल में गाया–जिये तो जिये कैसे, अब संजीत यहां. जीने की राहों में रोड़े पड़े हुए हैं. मुकेश कुमार सिन्हा ने राजनीतिज्ञों पर तीर छोड़े–उन जैसों के जैसा ही तो है, आपके चेहरे का रंग. वैसा ही मिजाज है और वैसा ही है ढंग. सुरेंद्र पांडेय सौरभ ने बढ़ती महंगाई पर कहा कि कभी तो दाम कम होंगे, मिलेगा दूध पीने को, इसी उम्मीद में बच्चे सरे बाजार बैठे हैं. विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ये दुनिया एक उलझन है, कहीं धोखा कहीं ठोकर. कोई हंस-हंस के जीता है, कोई जीता है कि रो-रो कर. सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र ने अपनी कविता इतिहास हमारा है पढ़ी. इस अवसर पर सरवर खान, वासुदेव प्रसाद, उपेंद्र सिंह, नरेश दांगी, राजीव रंजन, नंद किशोर सिंह, गजेंद्र लाल अधीर, शिव प्रसाद सिंह मुखिया जी सहित कई श्रोता उपस्थित थे. काव्य संध्या का संचालन सुमंत ने किया.
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