गया जी घराने के ध्रुपद गायक पंडित कृष्ण मोहन पाठक को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
ध्रुपद गायक पंडित कृष्ण मोहन पाठक (बाएं)
Gaya Ji News : गया जी जिले के ईश्वरपुर गांव निवासी प्रख्यात ध्रुपद गायक पंडित कृष्ण मोहन पाठक का चयन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025 के लिए हुआ है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित करेंगी
Gaya Ji News : जिले के ‘गया जी घराने’ का शास्त्रीय संगीत की दुनिया में 300 साल से भी पुराना इतिहास रहा है, और परैया प्रखंड का ईश्वरपुर गांव इस संगीत परंपरा का मुख्य केंद्र रहा है. यह गांव आज एक बार फिर पूरे देश में चर्चा में है.
संगीत की बड़ी डिग्रियां की हासिल
यहां के रहने वाले 76 साल के मशहूर ध्रुपद गायक पंडित कृष्ण मोहन पाठक ने अपनी गायकी से पूरे बिहार का नाम रोशन किया है. उन्होंने इलाहाबाद और चंडीगढ़ संगीत विश्वविद्यालयों से संगीत की बड़ी डिग्रियां हासिल की हैं.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित
इनका चयन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025 के लिए भारत सरकार द्वारा किया गया है. आने वाले दिनों में उन्हें यह पुरस्कार देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया जाएगा. संगीत के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार अत्यंत ही सम्मानजनक और प्रतिष्ठित माना जाता है.
ध्रुपद गायन की प्राचीन एवं प्रतिष्ठित परंपरा को नयी पीढ़ी तक निरंतर पहुंचाने के प्रति समर्पित पंडित कृष्ण मोहन पाठक देश के प्रसिद्ध ध्रुपद गायकों में शामिल हैं. संगीत के क्षेत्र में उनके इसी अतुलनीय और अद्वितीय योगदान को देखते हुए संगीत नाटक अकादमी, भारत सरकार द्वारा इन्हें यह सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है.
विरासत में अर्जित किया संगीत का ज्ञान
प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में श्री पाठक बताते हैं कि दादा-परदादा के जमाने से उनके यहां संगीत का साज सजता रहा है. इनके पिता स्वर्गीय रामवृक्ष पाठक, दादा स्वर्गीय रघुवीर पाठक और परदादा सुदीन पाठक सभी अपने जमाने के ध्रुपद के विख्यात गायक रहे हैं. अपने पूर्वजों से ही इन्होंने इस संगीत की शिक्षा अर्जित की है. इससे पहले दूरदर्शन बिहार पटना, वाराणसी, कनाडा सहित कई अन्य जगहों पर इन्हें पुरस्कृत किया गया है.
अरसे से था इस पल का इंतजार
वर्तमान में वे इस क्षेत्र में ऑल इंडिया रेडियो के जज व प्रयाग संगीत समिति में परीक्षक के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं. इस पुरस्कार के लिए नामित होने से उत्साहित श्री पाठक बताते हैं कि अरसे से इस क्षण का इंतजार कर रहे थे. इस पुरस्कार के लिए चयन होना, उनके सपने को साकार करने के समान है.
दुनिया की सबसे प्राचीन है ध्रुपद
श्री पाठक बताते हैं कि एक जमाने में ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर के यहां ध्रुपद का दरबार लगता था. वृंदावन के रहने वाले स्वामी हरिदास जी इसके जनक कहे जाते हैं. इनके शिष्य रहे तानसेन ने भी ध्रुपद गायन में देश-दुनिया में काफी ख्याति अर्जित की थी. नई पीढ़ी की संगीत के प्रति रुचि नहीं होने से अब गिने-चुने लोग ही बचे हैं. जीवन का 76 बसंत देख चुके श्री पाठक को अब भी अपने योग्य उत्तराधिकारी की तलाश है.
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