चार दिन की चांदनी. मौजूदा व्यवस्था बरकरार रहने पर संशय, काश ! सालों भर यूं ही रंग-बिरंगी रोशनी में नहाता रहता रेलवे स्टेशन

Updated at : 10 Oct 2018 6:14 AM (IST)
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चार दिन की चांदनी. मौजूदा व्यवस्था बरकरार रहने पर संशय, काश !  सालों भर यूं ही रंग-बिरंगी रोशनी में नहाता रहता रेलवे स्टेशन

गया : पौराणिक मान्यता है कि गया जी में आदिकाल से पितृपक्ष मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगता आ रहा है. इस साल इस मेले में गया रेल प्रशासन ने कुछ अलग व्यवस्था की थी. रेल प्रशासन द्वारा पहली बार गया रेलवे स्टेशन को रंग-बिरंगे बल्बों से सजाया गया. देर संध्या से रेलवे स्टेशन रंग-बिरंगे रोशनी […]

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गया : पौराणिक मान्यता है कि गया जी में आदिकाल से पितृपक्ष मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगता आ रहा है. इस साल इस मेले में गया रेल प्रशासन ने कुछ अलग व्यवस्था की थी. रेल प्रशासन द्वारा पहली बार गया रेलवे स्टेशन को रंग-बिरंगे बल्बों से सजाया गया. देर संध्या से रेलवे स्टेशन रंग-बिरंगे रोशनी में नहाता रहा.
काश, यह व्यवस्था रेल प्रशासन सालाेंभर करता ताे इस अंतरराष्ट्रीय स्थल पर आनेवाले देश-विदेश तीर्थयात्री इस व्यवस्था काे देख खुश भी हाे पाते. सालाेंभर अंतरराष्ट्रीय मानक का यह रेलवे स्टेशन साधारण स्टेशनाें जैसा ही प्रतीत हाेता है. रेल प्रशासन द्वारा की इस बार गयी इस व्यवस्था से न केवल देश-विदेश से आनेवाले तीर्थयात्री बल्कि शहर के लाेगाें के लिए भी आकर्षक रहा.
साथ ही रेल प्रशासन द्वारा की गयी इस व्यवस्था का चारों ओर गुणगान भी हो रहा था. इस साल पितृपक्ष मेले के मौके पर आधा दर्जन से अधिक स्वयंसेवी संगठनों द्वारा रेलवे स्टेशन परिसर में सहायता शिविर लगाकर तीर्थयात्रियों की सेवा व सहायता की.
इसके अलावा जिला प्रशासन के द्वारा पहली बार गया रेलवे स्टेशन पर प्रीपेड टैक्सी काउंटर लगवाया गया था. अब तक केवल तीर्थ यात्रियों को प्रीपेड ऑटो का ही लाभ मिलता रहा था. प्रीपेड टैक्सी की सुविधा उपलब्ध होने से तीर्थ यात्रियों को भी वातानुकूलित यात्रा का लाभ उचित दाम पर सुलभ हो सका. यह एक अनूठी पहल साबित हुयी.
पितृपक्ष मेला में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों में काफी संख्या महिलाओं की भी होती है. इस साल पहली बार स्वयंसेवी संस्था वात्सली निर्भया शक्ति के द्वारा रेलवे स्टेशन परिसर में सहायता शिविर लगाया गया. इस शिविर के माध्यम से महिलाओं के बीच सेनेटरी पैड वितरित कर उन्हें विशेष सहयोग उपलब्ध कराया गया. वात्सली निर्भया शक्ति का यह प्रयास भी एक अनूठी पहल साबित हुयी.
यदि गौर करें तो इससे साफ दिखता है कि समय के साथ-साथ लोगों की सोच भी काफी धनात्मक व शोधात्मक हो गयी है. यही वजह है कि दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो इसके लिए हरसंभव रास्ता रेल प्रशासन, जिला प्रशासन व स्वयंसेवी संगठनों के लोगों द्वारा उठाया गया.
पॉलीथिन से हो रहे नुकसान को बताया
रेलवे परिसर में लगाये गये नि:शुल्क सहायता सह पेयजल शिविर के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं के बीच कुल 2120 सेनेटरी पैड का भी नि:शुल्क वितरण किया गया. साथ ही संस्था द्वारा प्रकाशित श्राद्ध से संबंधित पुस्तिका की पांच हजार प्रतियां तीर्थ यात्रियों के बीच नि:शुल्क वितरण की गयी. इसके अलावा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पॉलिथीन बैग का उपयोग नहीं करने व इससे होने वाले नुकसान को भी तीर्थयात्रियों को बताया गया. तीर्थयात्रियों को हर संभव सूचना व जानकारी समय-समय पर दी गयी.
सत्यवती कुमारी गुप्ता, संस्थापक , वात्सली निर्भया शक्ति, गया
प्रीपेड ऑटो सर्विस से दो लाख 48 रुपये व प्रीपेड टैक्सी सर्विस 76 हजार रुपये का कारोबार इस साल पितृपक्ष मेला के दौरान हुआ.उक्त दोनों सर्विस की निगरानी गया जिला शिक्षित बेरोजगार ऑटो चालक संघ के द्वारा किया गया. प्रशासन की ओर से मानपुर प्रखंड के पंचायत रोजगार सेवक दीपक कुमार व नगर प्रखंड के रोजगार सेवक नरेश कुमार उक्त दोनों सर्विस की मॉनीटरिंग कर रहे थे.
रमन प्रसाद
सचिव, गया जिला शिक्षित बेरोजगार ऑटो चालक संघ
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