डीजीपी का फरमान, चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे पुलिस
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Jun 2018 5:03 AM (IST)
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गया : राज्य में अलग-अलग जगहों पर हर रोज चिकित्सकों के साथ हो रही मारपीट व हिंसा की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए डीजीपी केएस द्विवेदी ने राज्य के सभी जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किया है. डीजीपी ने चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर पूरी गाइडलाइन जारी की […]
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गया : राज्य में अलग-अलग जगहों पर हर रोज चिकित्सकों के साथ हो रही मारपीट व हिंसा की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए डीजीपी केएस द्विवेदी ने राज्य के सभी जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किया है. डीजीपी ने चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर पूरी गाइडलाइन जारी की है.
इसमें कहा गया है कि चिकित्सकों और चिकित्सा प्रतिष्ठानों के खिलाफ हिंसा व संपत्ति के नुकसान की घटनाओं को रोकने के लिए बिहार राज्य द्वारा बिहार चिकित्सा सेवा संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा अधिनियम 2014 का कानून बनाया गया है. इसमें तय नियमों के मुताबिक ही सभी पुलिसकर्मियों को काम करने की हिदायत दी गयी है.
घटना कंट्रोल करने की गाइडलाइन जारी : चिकित्सा सेवा संस्थानों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा के मामले में स्थानीय पुलिस को किस तरह से काम करना है, इसकी भी जानकारी दी गयी है. इसमें कहा गया है कि जैसे ही पुलिस नियंत्रण कक्ष, मोबाइल पुलिस, पुलिस स्टेशन, उच्च अधिकारियों को ऐसी हिंसा की जानकारी मिलती है, वैसे ही पुलिस पदाधिकारी व जवान मौके पर पहुंच कर स्थिति को नियंत्रित करेंगे. मौका-ए-वारदात पर सबसे पहले सुरक्षा मुहैया करना पुलिस का कर्तव्य होता है.
घटनास्थल पर पहुंचते ही पुलिसकर्मी सबसे पहले चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध भीड़ को तितर-बितर कर स्थिति पर नियंत्रण करेंगे. निर्देश में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि किसी भी मरीज की मौत हो जाने के बाद शव को अस्पताल में नहीं रहने दिया जाये. शव के वहां रहने से स्थिति खराब हो सकती है. डीजीपी का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक अस्पताल में स्थिति सामान्य नहीं हो जाये, वहां सुरक्षा की व्यवस्था की जाये.
पुलिस रखें चिकित्सकों की जानकारी
डीजीपी के निर्देश पत्र में कहा गया है कि थाना स्तर के सभी पुलिसकर्मियों के पास उनके अधिकार क्षेत्रों में अवस्थित सभी चिकित्सकों व चिकित्सा संस्थानों के संपर्क नंबर और पता होना चाहिए. एक व्हाट्सएप समूह संबंधित थानाध्यक्ष, पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस अधीक्षक के क्षेत्राधिकार में चिकित्सक व चिकित्सा संस्थान को लेकर तैयार किया जाये. चिकित्सा सेवा संस्थान व व्यक्ति सुरक्षा अधिनियम 2011, बिहार अधिनियम-18 में उपलब्ध प्रावधानों के बारे में पुलिसकर्मियों को पूरी जानकारी दी जाये.
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