मानवरहित रेल फाटकों पर गेट मित्र राेकेंगे रेल हादसे

Published at :04 Jun 2018 5:01 AM (IST)
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मानवरहित रेल फाटकों पर गेट मित्र राेकेंगे रेल हादसे

गया : रेल फाटकों पर होने वाले हादसों को रोकने के उद्देश्य से रेलवे इस साल के अंतिम माह तक रेलवे फाटकों पर गेट मित्र की तैनाती करने की योजना बनी है. उक्त योजना के तहत मानव रहित प्रमुख रेल फाटकों पर अब दो गेट मित्रों को तैनात करने का निर्णय लिया गया है. ये […]

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गया : रेल फाटकों पर होने वाले हादसों को रोकने के उद्देश्य से रेलवे इस साल के अंतिम माह तक रेलवे फाटकों पर गेट मित्र की तैनाती करने की योजना बनी है. उक्त योजना के तहत मानव रहित प्रमुख रेल फाटकों पर अब दो गेट मित्रों को तैनात करने का निर्णय लिया गया है. ये दुर्घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाने के साथ-साथ लोगों को फाटक पार करने का सुरक्षित तरीका भी बतायेंगे.
गया रेलवे स्टेशन अंतर्गत तीन दर्जन से अधिक रेल फाटकों पर एक-एक अतिरिक्त गेट मित्र की तैनाती करने का निर्णय लिया गया है. जन संपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि मानव रहित रेल फाटकों पर दो गेट मित्रों को तैनात करने का निर्णय लिया गया है.
2020 तक खत्म हो जायेंगे रेलवे फाटक : रेलवे अधिकारियों ने एक निर्णय लिया है. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि 2020 तक मानव रहित रेल फाटकों को खत्म करने की योजना तैयार की जा रही है. इनके स्थान पर मानव रहित फाटक, अंडरपास या ओवरब्रिज बनाये जायेंगे. इसकी तैयारी रेलवे अधिकारियों के ओर से शुरू कर दी गयी है. वहीं गेट मित्रों को मानदेय भी दिया जायेगा.
ट्रेन आने के समय गेट मित्र वाहन चालकों और लोगों को सीटी बजा कर व लाल झंडी दिखा कर सचेत करेंगे. इनकी ड्यूटी सुबह पांच से शाम सात बजे तक होगी. गया जिले में विभिन्न रेल फाटकों पर ट्रेन की चपेट में आने से जहां 62 लोग घायल हो गये वहीं, कम-से-कम पांच अन्य की मौत हो गयी. ये दुर्घटनाएं वागेश्वरी, करीमगंज, चाकंद, रसलपुर, एफसीआइ, बंधुआ व गया रेलवे स्टेशन से दक्षिण की ओर एक नंबर रेलवे फाटक पर हुईं.
उठाये जा रहे कई और कदम
आये दिन मानव रहित रेल फाटकों पर दुर्घटना होने की खबर मिलती है. इस दुर्घटना को रोकने के लिए दो गेट मित्रों की तैनाती करने का निर्णय लिया गया है, ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके. हादसों को रोकने के लिए रेलवे लगातार प्रयासरत है, इसके बावजूद कभी मानवीय भूल, कमजोर रेललाइन और तकनीकी खामियों की वजह से हादसे हो रहे हैं. इस पर लगाम लगाने के लिए रेलवे प्रशासन द्वारा रेल लाइनों को बदलने, रिक्त पदों को भरने और कर्मचारियों को संरक्षा की ट्रेनिंग दी जा रही है.
गया जिले में वर्ष 2017 में हुई घटनाओं पर एक नजर
जनवरी में फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से 10 घायल
फरवरी में फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से पांच घायल
मार्च में फाटक के पास ट्रेन से गिर कर पांच घायल
अप्रैल में फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से दो लोग घायल
मई में फाटक पार करने के दौरान तीन की मौत पांच घायल
जून में फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से दो की मौत, चार घायल
जुलाई में फाटक के पास ट्रेन से गिर कर पांच घायल
अगस्त में फाटक के पास ट्रेन से गिर कर पांच घायल दो की मौत
सितंबर में फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से छह लोग घायल
अक्तूबर में फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से सात लोग घायल
नवंबर में फाटक पार करने के दौरान पांच लोग घायल
दिसंबर में फाटक पार करने के दौरान छह लोग घायल
जेरियाट्रिक क्लिनिक में पहुंचे 130 मरीज
गया. लायंस क्लब की ओर से आइएमए हॉल में रविवार को आयोजित जेरियाट्रिक क्लिनिक में 130 मरीजों का चेकअप और इलाज किया गया. नि:शुल्क दवाएं भी बांटी गयीं. आयोजक डॉ विजय करण ने बताया कि कैंप में डाॅ एसके पांडा, डाॅ राजेंद्र प्रसाद, डाॅ अभय कुमार, डा पूर्णेंदू शेखर, डा संजीव कुमार, डाॅ सुमित कुमार व अन्य मौजूद थे. उन्होंने बताया कि कैंप के आयोजन का मुख्य उद्देश्य शहर के वृद्ध लोगों को चिकित्सीय परामर्श देना और इलाज करना है. डाॅ करण ने कहा कि लंबे समय से आयोजित हो रहे इस कैंप के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है.
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