प्रभावती अस्पताल से मरीजों ने मुंह मोड़ा, खाली पड़े हैं वार्ड

Published at :02 Jun 2018 4:04 AM (IST)
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प्रभावती अस्पताल से मरीजों ने मुंह मोड़ा, खाली पड़े हैं वार्ड

मरीजों को एडमिट तक नहीं करना चाहते हैं स्वास्थ्यकर्मी व डाॅक्टर गया : प्रभावती अस्पताल का इन-पेशेंट वार्ड (आइपीडी) इन दिनों खाली पड़ा है. यहां एक भी मरीज नहीं है. प्रमंडल में महिलाओं के लिए एक मात्र इस अस्पताल की स्थिति तो पहले से ही दयनीय बनी है. अब, यहां मरीजों का आना भी बंद […]

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मरीजों को एडमिट तक नहीं करना चाहते हैं स्वास्थ्यकर्मी व डाॅक्टर

गया : प्रभावती अस्पताल का इन-पेशेंट वार्ड (आइपीडी) इन दिनों खाली पड़ा है. यहां एक भी मरीज नहीं है. प्रमंडल में महिलाओं के लिए एक मात्र इस अस्पताल की स्थिति तो पहले से ही दयनीय बनी है. अब, यहां मरीजों का आना भी बंद हो गया है. यह इस बात का संकेत है कि अस्पताल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.
शुक्रवार को इस अस्पताल के आइपीडी में एक भी मरीज भर्ती नहीं था. अस्पताल अधिकारी का कहना है कि मरीज ही नहीं आ रहे हैं. हालांकि उनका यह बयान सही नहीं है. कर्मचारियों की मानें तो यहां की चौपट व्यवस्था ने ही अस्पताल को इस स्थिति में पहुंचाया है.वार्ड के खाली होने का असर यह है कि जो महिला मरीज आती हैं वह अस्पताल में पसरे सन्नाटे को देख यहां भर्ती नहीं होना चाहती हैं. शुक्रवार की शाम अस्पताल में एक महिला पेंसेंट पहुंचीं. परिवार के लोगों ने देखा कि वार्ड पूरी तरह से खाली है. वार्ड में एक भी मरीज नहीं है. इस पर उनलोगों ने महिला मरीज को भर्ती नहीं कराया. उन लोगों ने कहा कि यहां एक भी मरीज नहीं है, इसका मतलब व्यवस्था ठीक नहीं है.
एक मात्र महिला डाॅक्टर, वह भी छुट्टी पर : अस्पताल की एक मात्र महिला चिकित्सक डाॅ शंकुतला नाग इन दिनों छुट्टी पर हैं. उनके नहीं रहने का भी असर अस्पताल पर पड़ा है. चूंकि यह महिलाओं का अस्पताल है तो महिला मरीज भी चाहती हैं कि उनका इलाज और आॅपरेशन महिला चिकित्सक ही करे. दूसरी समस्या यह भी है कि अस्पताल में बीते एक महीने से एनेसथिसिया के चिकित्सक नहीं है. पूर्व चिकित्सक के रिटायर होने के बाद से यह पद खाली है. जाहिर है कि बिना एनेसथिसिया डाॅक्टर के किसी भी गर्भवती का आॅपरेशन संभव नहीं है. यह भी एक कारण है कि यहां मरीजों को भर्ती नहीं लिया जाता है.
महिला चिकित्सक तो छुट्टी पर हैं ही,लेकिन दूसरे चिकित्सक मौजूद हैं. भरती होने वाले मरीजों के नहीं आने से इंडोर वार्ड खाली है.
डाॅ सत्येंद्र कुमार चौधरी, प्रभारी अधीक्षक, प्रभावती अस्पताल
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