खुद के लिए आरोग्य जीवन की कामना, नदी को कर गये बीमार

Published at :28 Oct 2017 3:51 AM (IST)
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खुद के लिए आरोग्य जीवन की कामना, नदी को कर गये बीमार

गया : देश भर में चल रहे स्वच्छता अभियान के बावजूद छठ व्रत के दौरान लोग शाम व सुबह नदी घाटों पर अर्घ देने पहुंचे और अपने व परिवार के लिए मंगल कामना भी की, लेकिन किसी ने शायद यह ध्यान नहीं रखा कि अर्घ के बाद नदी को भी साफ रखने की जिम्मेदारी उनकी […]

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गया : देश भर में चल रहे स्वच्छता अभियान के बावजूद छठ व्रत के दौरान लोग शाम व सुबह नदी घाटों पर अर्घ देने पहुंचे और अपने व परिवार के लिए मंगल कामना भी की, लेकिन किसी ने शायद यह ध्यान नहीं रखा कि अर्घ के बाद नदी को भी साफ रखने की जिम्मेदारी उनकी बनती है. इस मौके पर किसी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभायी.

लगभग छठ घाटों पर बड़ी संख्या में प्लास्टिक के ग्लास व थर्मोकोल के प्लेट फेंके नजर आये. देखने से साफ लगता है कि सूर्य को अर्घ देकर लोगों ने अपने व परिवार के लिए आरोग्य जीवन की कामना की. लेकिन, दूसरी ओर नदी को बीमार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है. शहर के विभिन्न घाटों पर मुहल्ला पूजा समिति व अन्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा व्रतियों को पानी व चाय पिलाने के लिए शिविर लगाया गया था. इसके साथ ही कई जगहों पर अर्घ देने के लिए प्लास्टिक पाउच वाले दूध का भी वितरण किया गया.
एकाध जगह को छोड़ किसी भी जगह इनके कचरे को रखने के लिए डस्टबिन का इंतजाम नहीं किया गया था. लोगों ने अर्घ देकर पाउच व पानी-चाय पीकर प्लास्टिक के ग्लास नदी व घाटों के पास ही फेंकते गये. रामशिला घाट, राय विंदेश्वरी घाट, सीढ़िया घाट, पितामहेश्वर घाट, ब्राह्मणी घाट, देवघाट व केंदुई घाट आदि जगहों एक जैसी स्थिति दिखी. सभी घाटों पर डेकोरेशन समेटने वाले दिखाई दे रहे थे. देखा जाये, तो पहले से नदी में शहर के नालों का गंदा पानी गिरने से कई तरह की परेशानी सामने आते रहती है. इसके बाद भी लोग सचेत नहीं हो रहे हैं.
झारखंडेश्वर घाट दिखा चकाचक
एक ओर जहां लगभग सभी घाटों पर प्लास्टिक के ग्लास व कचरा फैला दिखा, तो दूसरी ओर झारखंडेश्वर घाट, दंडीबाग में अर्घ के बाद भी पूरा घाट चकाचक दिखा. घाट पर पेड़ से गिरे एक दो पत्ते ही दिखाई दिये. यहां के व्यवस्थापक सहयोग समिति, दंडीबाग के अध्यक्ष प्रभात शंकर उर्फ सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि घाट के ऊपर वाले हिस्से में डेकोरेशन इस तरह किया गया था कि यहां किसी तरह की गंदगी फैलाने की जगह तक नहीं बची थी. हर वक्त माइक से अलाउंस किया जा रहा था
कि स्वच्छता का सभी लोग हर हाल में ख्याल रखें. उन्होंने कहा कि हमारे समिति के सदस्य चप्पे-चप्पे पर मौजूद थे. इतना ही नहीं नदी की भी धारा घाट से सटी थी. धारा के उस पार भी हमारे सदस्य गंदगी हटाने के लिए मौजूद थे. सभी का सहयोग पूरा मिला, इसलिए यहां का घाट एक अलग पहचान बना लिया है.
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