देवघाट, गदाधर घाट, ब्राह्मणी घाट व पितामहेश्वर घाट अब भी बदहाल

Published at :24 Oct 2017 4:10 AM (IST)
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देवघाट, गदाधर घाट, ब्राह्मणी घाट व पितामहेश्वर घाट अब भी बदहाल

गया : लोक आस्था के महापर्व छठ व्रत का चार दिवसीय अनुष्ठान मंगलवार काे नहाय-खाय के साथ शुरू हो जायेगा. इस अवसर पर छठ व्रती व श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर स्थित घाटों पर भगवान भास्कर को अर्घ्य दान व धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में जिला प्रशासन ने घाटों की […]

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गया : लोक आस्था के महापर्व छठ व्रत का चार दिवसीय अनुष्ठान मंगलवार काे नहाय-खाय के साथ शुरू हो जायेगा. इस अवसर पर छठ व्रती व श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर स्थित घाटों पर भगवान भास्कर को अर्घ्य दान व धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में जिला प्रशासन ने घाटों की समुचित सफाई व्यवस्था के लिए एक माह पूर्व ही तैयारी शुरू कर दी थी. डीएम समेत अन्य अधिकारी कई बार छठ घाटाें का निरीक्षण भी कर चुके हैं. बैठकें भी की जा रही हैं,

पर साफ-सफाई से लेकर अन्य व्यवस्था का हाल सिफर है. छठ पूजा के शुरू होने में मात्र एक दिन शेष रहने के बावजूद फल्गु नदी के पश्चिमी तट पर अवस्थित गदाधर घाट, देवघाट, गायत्री घाट, ब्राह्मणी घाट व पितामहेश्वर घाट की सफाई व्यवस्था में अब तक सुधार नहीं हो सका है. पूर्व की भांति इन घाटों पर आज भी नाले का प्रदूषित पानी बह रहा है. गदाधर घाट व देवघाट का आलम यह है कि यहां नालों का पानी फल्गु नदी में प्रवाहित हो कर पहुंच रहा है. कुछ इसी तरह की स्थिति पितामहेश्वर घाट की है.

यहां जिला प्रशासन द्वारा घाट की सफाई के नाम पर नाले से बह रहे पानी के दोनों किनारे पर बालू की एक-एक फुट की क्यारी बनायी गयी है, जो महज कुछ लोगों के आने-जाने से, या फिर तेज हवा चलने से स्वतः ध्वस्त हो सकती है. इस नाले का पानी भी देवघाट व गदाधर घाट की तरह फल्गु के पानी में मिल रहा है. वहीं, राह्मणी घाट की स्थिति तो और भी खराब है. इस घाट के किनारे बनी सीढ़ी व चबूतरे के चारों तरफ नाले का प्रदूषित पानी बह रहा है. साथ ही कादो-कीचड़ का ढेर भी लगा है. ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. घाटों पर गंदगी से छठ व्रतियों को अनुष्ठान करने में होने वाली परेशानियों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.

पारा लीगल वॉलंटियरों की रहेगी तैनाती : गया. छठ घाटों पर आमजनों की सुरक्षा के लिए पारा लीगल वॉलेंटियरों की तैनाती की गयी है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव संजय कुमार झा ने बताया कि राज्य प्राधिकार के आदेश पर यह प्रतिनियुक्ति की गयी है.
इसमें केंदुई घाट पर मंटु कुमार सिंह और मोहम्मद सैफी आजम, सीढ़ियां घाट पर रिंकू कुमारी और वकील कुमार सिंह, पितामहेश्वर घाट पर बेबी प्रवीण और पिंटू कुमार, देवघाट पर विकास रंजन और मधु देवी, रामशिला घाट पर सुनील कुमार और जुल्फिकार अंसारी, सीताकुंड पर नागेंद्र कुमार और रिजवाना प्रवीण और भुसुंडा घाट पर रमाकांत कुमार और अभिनय कुमार को ड्यूटी दी गयी है. इसके अलावा इन सभी घाटों पर प्राधिकारी के आेएसडी किशोर कुणाल और सहयोगी विकास कुमार मॉनीटरिंग करेंगे.
बोधगया : छठ व्रत को लेकर बोधगया के गांधी चौक व आनंद वन काली मंदिर के समीप भगवान भास्कर की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं. गांधी चौक के पास लाल पत्थर पर छठ व्रतियों के दर्शनार्थ भगवान भास्कर के साथ ही छठी मइया व व्रतियों की प्रतिमाएं भी रखी जा रही हैं. मंगलवार शाम या बुधवार की सुबह से सभी प्रतिमाओं को आम भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया जायेगा. इसके साथ ही रिवर साइड रोड में डहरिया बिगहा व खिरियावां गांव के पास भी छठ व्रतियों के लिए भगवान सूर्य की मूर्तियां स्थापित की जा रही हैं. छठ व्रत के समापन पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है.
मगध से प्रारंभ हुआ था छठ का व्रत
सूर्य षष्ठी व्रत का लोहंडा (खरना) सूर्योदय कालीन पंचमी तिथि में 25 अक्तूबर बुधवार को है. शास्त्रीय विधान के अनुसार 25 अक्तूबर को षष्ठी तिथि मिश्रित रहने पर लोहंडा इसी तिथि को शुभ है. सूर्याेदय कालीन पंचम तिथि दो दिन रहने पर द्वितीय दिन ही शुभ होता है. व्रत 26 अक्तूबर गुरुवार को है. इस तिथि को सायंकालीन अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य की लालिमा में षष्ठी देवी की भावना से दिया जाता है. षष्ठी देवी एवं सूर्यनारायण दोनों की उपासना से यह व्रत संपन्न होता है.
पुत्र देने वाली एवं पुत्र को दीर्घायु करने वाली षष्ठी देवी है और सूर्य नारायण धन एवं आरोग्य प्रदान करते हैं. मगध क्षेत्र में च्यवन ऋषि की पत्नी सुकन्या ने आश्रम के समीप स्थित देवकुंड सरोवर में सर्वप्रथम छठ व्रत किया था. वायु पुराण से प्रमाणित है कि च्यवनाश्रम मगध के औरंगाबाद जिले की उत्तरी सीमा पर है. छठ व्रत उत्तरोतर अधिक-से-अधिक संख्या में हो रहा है और सूर्य मंदिर भी अधिकाधिक संख्या में निर्मित हो रहे हैं. फल्गु तट पर ब्राहृाणी घाट का सूर्य मंदिर सबसे प्राचीन है. यहां शिव स्वरूप में अति प्राचीन सूर्यमंदिर में मध्याहृ सूर्य हैं. छह फीट की विशाल प्रतिमा यहां स्थापित है. सूर्य की बारह कलाएं यहां विद्यमान हैं.
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