दीपावली के बाद छठ को वेलकम करने की तैयारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Oct 2017 6:58 AM (IST)
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एक लाख से ज्यादा सूप व टोकरियां बिकने की उम्मीद गया : दीपावली के बाद अब छठ को लेकर तैयारियां शुरू हो गयी हैं. शहर की मंडियों में छठ से जुड़े सामान सजने लगे हैं. इसमें फल, दूध, लकड़ी व पूजन सामग्री के अलावा टोकरी व सूप भी जगह-जगह दिखाई देने लगे हैं. हर पर्व […]
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एक लाख से ज्यादा सूप व टोकरियां बिकने की उम्मीद
गया : दीपावली के बाद अब छठ को लेकर तैयारियां शुरू हो गयी हैं. शहर की मंडियों में छठ से जुड़े सामान सजने लगे हैं. इसमें फल, दूध, लकड़ी व पूजन सामग्री के अलावा टोकरी व सूप भी जगह-जगह दिखाई देने लगे हैं. हर पर्व की तरह इस पर्व में भी कुछ बदलाव देखने को मिलते हैं. मसलन पीतल व चांदी से बनी टोकरी व सूप भी अब बाजार में दिखने लगे हैं. कई संगठन भी पीतल से निर्मित सूप को छठ व्रतियों को देते हैं. हालांकि बांस से निर्मित सूप व टोकरी का अपना अलग ही क्रेज है. शहर से लेकर गांव व कस्बा तक छठ के मौके पर बांस से बनी टोकरी व सूप काफी दिखते हैं.
झारखंड से आता है सूप व टोकरी: झारखंड के कई इलाकों से सूप व टोकरी गया की मंडी में आती है. झारखंड के कई इलाकों में काफी संख्या में बांस के पेड़ पाये जाते हैं. अमूमन दूसरे जगहों के मुकाबले यह बांस के पेड़ काफी लंबे और लचीले होते हैं. इससे आसानी से कई प्रकार के उत्पाद बनाये जाते हैं. यहां रहनेवाले आदिवासी ही सूप व टोकरी का निर्माण करते हैं. इसके अलावा सरकार व कई संगठन भी इन आदिवासियों को समय-समय पर बांस से निर्मित उत्पाद का प्रशिक्षण देते हैं.
छठ को लेकर एक लाख से ज्यादा सूप व टोकरी मार्केट में: किरानी घाट जिले में सूप व टोकरी की सबसे बड़ी मंडी है. यहां सात से आठ छोटे व बड़े कारोबारी इसका बिजनेस करते हैं. थोक कारोबारी धीरज कुमार बताते हैं कि इस दफा छठ के मौके पर एक लाख से ज्यादा सूप व टोकरी मंडी में पहुंच रहे हैं. इसमें 50 हजार सूप व 50 हजार टोकरी है. उन्होंने बताया कि डिमांड को देखते हुए आंकड़ा बढ़ भी सकता है. उन्होंने बताया कि यहां से सूप व टोकरी पूरे जिले में सप्लाइ की जाती है. मार्केट में कई रेंज व साइज की टोकरियां मौजूद हैं. इसमें छोटे साइज से लेकर बड़े साइज की टोकरियां शामिल हैं.
एक बंडल में 100 से 125 सूप व टोकरियां
कारोबारी विनोद प्रसाद बताते हैं कि सूप व टोकरी बंडल में आते हैं. एक बंडल में 100 से 125 पीस सूप व टोकरी होते हैं. छोटे कारोबारी चार से पांच बंडल माल मंगवाते हैं. उन्होंने बताया कि जल्द ही शादी विवाह का मौसम भी शुरू हो जायेगा. ऐसे में सूप व टोकरी की डिमांड काफी बढ़ जायेगी. यही दो मौके पर इसकी मांग रहती है. उन्होंने बताया कि यहां टोकरी 60 रुपये से लेकर 100 रुपये तक है, वहीं सूप 35 रुपये प्रति पीस है.
पिछले चार साल का कारोबार (छठ व लगन के मौके पर)
वर्ष कुल कारोबार
2014 40 लाख रुपये
2015 45 लाख रुपये
2016 48 लाख रुपये
2017 50 लाख रुपये
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