Darbhanga News: भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों और शास्त्रों तक सीमित नहीं, यह हमारे जीवन का व्यावहारिक दर्शन

Published by : PRABHAT KUMAR Updated At : 20 Sep 2025 10:37 PM

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Darbhanga News:विभागाध्यक्ष प्रो. संजय झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों और शास्त्रों तक सीमित नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन का व्यावहारिक दर्शन है.

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Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी इतिहास विभाग में शनिवार को “भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर हुए व्याख्यान में विभागाध्यक्ष प्रो. संजय झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों और शास्त्रों तक सीमित नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन का व्यावहारिक दर्शन है. भारत की यह परंपरा हमें सदाचार, लोकहित, समाज-कल्याण और वैश्विक बंधुत्व की राह दिखाती है. भारतीय चिंतन में “वसुधैव कुटुम्बकम में “वसुधैव ” की बात है, जहां पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है. इसी विचार ने भारतीय संस्कृति को सर्वसमावेशी और व्यापक बनाया है. उदाहरण देते हुए बताया कि चाहे लोककला, लोकसंस्कृति या धर्म और दर्शन हो, सब में यही संदेश मिलता है, कि समाज की उन्नति तब ही संभव है, जब हम एक-दूसरे से जुड़े रहें और नैतिकता का पालन करें.

मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर भारतीय ज्ञान परंपरा की एक अमूल्य कड़ी

प्रो. झा ने मिथिला की परंपराओं और संस्कारों की भी चर्चा की. कहा कि मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर भारतीय ज्ञान परंपरा की एक अमूल्य कड़ी है, जिसने शिक्षा, साहित्य, कला और आचार-विचार के क्षेत्र में देश को दिशा दी है.

भारतीय ज्ञान परंपरा में अध्यात्म के साथ- साथ विज्ञान और योग भी महत्वपूर्ण

कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में अध्यात्म के साथ- साथ विज्ञान और योग भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है. आज योग जिस रूप में पूरी दुनिया में अपनाया जा रहा है, वह भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी उपलब्धि है. यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी है.

भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल उद्देश्य जीवन के विभिन्न आयामों को एक सूत्र में पिरोना

प्रो. झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल उद्देश्य जीवन के विभिन्न आयामों, सामाजिक व्यवस्था, नैतिकता, परिवार, संस्कृति और धर्म को एक सूत्र में पिरोना है. इस परंपरा में व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर समष्टि के कल्याण की बात की जाती है. इससे पूर्व डॉ मनीष कुमार ने विषय प्रवेश कराया. कार्यक्रम में शोधार्थी सिद्धार्थ कुमार, प्रशांत कुमार, सोनी कुमारी, राजा कुमार, बबली कुमारी एवं शिल्पा कुमारी ने भी विचार रखे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज्योति प्रभा ने किया. मौके पर गौतम कुमार, सरोज कुमार आदि मौजूद रहे.

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