धैर्य व स्वाभिमान की प्रतीक थीं सीता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 May 2016 4:02 AM (IST)
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सम्मेलन. आधुनिकता की दौड़ में अपना कर्तव्य न भूलें महिलाएं : वैशाली दरभंगा : साहित्यिक-सांस्कृतिक विचार मंच ऋचालोक के तत्वावधान में पहली बार महिलाओं का सम्मेलन हुआ. शनिवार को एमएमटीएम कॉलेज के सभागार में जानकी सम्मेलन में महिलाएं शामिल हुई. इसका उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि साहित्य अकादेमी में मैथिली की प्रतिनिधि डॉ वीणा ठाकुर […]
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सम्मेलन. आधुनिकता की दौड़ में अपना कर्तव्य न भूलें महिलाएं : वैशाली
दरभंगा : साहित्यिक-सांस्कृतिक विचार मंच ऋचालोक के तत्वावधान में पहली बार महिलाओं का सम्मेलन हुआ. शनिवार को एमएमटीएम कॉलेज के सभागार में जानकी सम्मेलन में महिलाएं शामिल हुई. इसका उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि साहित्य अकादेमी में मैथिली की प्रतिनिधि डॉ वीणा ठाकुर ने कहा कि भगवती सीता शक्ति की प्रतिरूप हैं. उन्होंने जिस तरह लंका में अपने सतीत्व की रक्षा की, उससे आत्मबल का संदेश हम महिलाओं को मिलता है.
धैर्य व स्वाभिमान की वे प्रतीक हैं. आधुनिक समय में उनका चरित्र हम महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में महिलाओं का एकजुट होना उतनी बड़ी बात नहीं है, जितनी बड़ी बात सामाजिक बदलाव के लिए एकजुट होना है. अध्यक्षता करते हुए डॉ वैशाली ने संस्था की पहल की सराहना करते हुए कहा कि पिछले सवा दो साल से वे दरभंगा में हैं. पहली बार इस तरह के कार्यक्रम देख रही हैं.
उन्होंने महिलाओं को सीता की तरह समर्पित भाव के साथ परिवार का संग देने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हम अपना कर्त्तव्य न भूलें. बहू में अपनी बेटी देखें तथा बेटे को महिला के सहयोग व सम्मान के लिए प्रेरित करें. डॉ वैशाली ने कहा कि सीता कभी प्रताडि़त नहीं हुई.
दरअसल वे राम की भावना को समझती थी. समाज कल्याणार्थ उन्होंने अपना समर्पण दिया. कासिंद संस्कृत विवि की विकास पदाधिकारी डॉ रीता सिंह ने कहा कि हमें सीता के तेज व वीरता का भाव अपने भीतर उतारना चाहिए. अनुपमा कुमारी के संचालन में सुनीता झा, डॉ ममता रानी ठाकुर ने भी विचार रखे. प्रतिभा प्रीति ने गीत प्रस्तुत किये. स्वागत भाषण उषा चौधरी ने किया. लीक से अलग हटकर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं को मिथिला की परंपरा के अनुरूप तेल-सिंदूर दिया गया. एमआरएम कॉलेज की छात्रा खुशबू कुमारी ने तबला वादन कर उपस्थित श्रोता दीर्घा का दिल जीत लिया.
डॉ ममता ठाकुर, सुषमा झा, अनुपमा मिश्र, विनीता झा, कंचन झा आदि के गायन से वातावरण लोक संस्कृति मय हो गया. ममता ठाकुर व सुषमा झा के समवेत सीता नाम धुन से सम्मेलन का समापन हुआ. इस आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कमला कांत झा, डॉ दिलीप कुमार झा, संस्था के महासचिव अमलेंदु शेखर पाठक, श्रीपति त्रिपाठी, डॉ महानंद ठाकुर, चंद्रशेखर झा बूढ़ाभाई सहित कई अन्य मौजूद थे.
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