नयी पीढ़ी से लिया सेवा का आश्वासन

नयी पीढ़ी से लिया सेवा का आश्वासन उल्लास के साथ मना मकर संक्रांतिपुण्य स्नान के लिए सरोवर व नदियों के किनारे अहले सुबह से जुटने लगी भीड़/इफोटो. 1, 2 व 3परिचय. बच्चे को तिल-गुड़ देते व पतंग उड़ाते लोग.दरभंगा. अहले सुबह से घर में कोलाहल मचना शुरू हो गया था. बार-बार उठाने के बाद भी […]
नयी पीढ़ी से लिया सेवा का आश्वासन उल्लास के साथ मना मकर संक्रांतिपुण्य स्नान के लिए सरोवर व नदियों के किनारे अहले सुबह से जुटने लगी भीड़/इफोटो. 1, 2 व 3परिचय. बच्चे को तिल-गुड़ देते व पतंग उड़ाते लोग.दरभंगा. अहले सुबह से घर में कोलाहल मचना शुरू हो गया था. बार-बार उठाने के बाद भी जो बिस्तर छोड़ने में आनाकानी करते रहते थे, स्कूल के लिए लेट होने की बात कहने पर भी बस थोड़ी देर और का जुमला दुहराते हुए करवट बदलते रहते थे, वे भी सुबह-सुबह नहा-धोकर तैयार हो गये थे. स्नान कर जैसे ही तैयार हुए उनके हाथों में उनकी पसंद की लाइ आ गयी. लाइ लिया और घर के बाहर निकल पड़े. दोस्तों के साथ मस्ती में जुट गये. अवसर था मकर संक्रांति पर्व का. शुक्रवार की मकर संक्रांति का पर्व सोल्लास संपन्न हो गया. बच्चों ने जहां मन पसंद तिल व चुड़ा का लाइ खाया, वहीं दिनभर पतंगबाजी का मजा लिया. बड़े-बुजुर्ग अपनी नयी पीढ़ी से सेवा का वचन पाकर संतुष्ट हुए. पूजा-पाठ व दान आदि मेंे श्रद्धालुओं का पूरा दिन गुजर गया. संपूर्ण समाज इस पर्व के उमंग में डूबा रहा. नदियों के घाट पर जुटी रही भीड़इस पर्व में पुण्य काल में स्नान करने का विशेष महत्व कहा गया है. लिहाजा शुभ फल की चाह में मुंह अंधेरे ही लोग अपने-अपने घरों से निकल पड़ेे. पवित्र जल में स्नान किया. इसको लेकर अहले सुबह से ही नदियों व सरोवरों के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. बागमती, जीवछ, कमला आदि नदियों के साथ ही माधवेश्वर परिसर स्थित तालाब के साथ अन्य पोखरों में लोगों ने सुबह में स्नान किया और भगवान सूर्य को अर्घ अर्पित किया. पितर को भी किया तिल अर्पितइस मौके पर अपने ईश को तिल-गुड़ का भोग लगाने के साथ ही परंपरानुरूप लोगों ने अपने पितरों को भी तिल अर्पित किया. शास्त्रीय विधान के तहत श्रद्धालुओं ने मौके पर दान भी किया. श्यामा मंदिर समेत प्रमुख स्थानों पर गरीबों की भीड़ इस निमित्त लगी रही. पूजा-अर्चना के पश्चात लोगों ने जहां उन्हें लाइ आदि दान में दिया, वहीं गरम कपड़े भी दान किये. कुछ लोगों ने तैयार खिचड़ी या फिर खिचड़ी तैयार करने की सामग्री का दान किया. पतंगबाजी का उठाया लुत्फसमय के साथ इस क्षेत्र में भी मकर संक्रांति के अवसर पर पतंगबाजी बढ़ती जा रही है. आमतौर पर बच्चे या फिर युवाओं की दिलचस्पी अधिक दिखती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. अपने घर की छत के मुंडेर पर पतंगबाजी करते लोग तो दिखे ही राज परिसर समेत अन्य मैदानों मंे भी लोगों के हाथों में पतंग की डोर नजर आयी. दोपरह बाद शुरू हुई पतंगबाजी देर शाम तक चलती रही.
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