प्री पेड टैक्सी योजना पर रेलवे का ग्रहण

Published at :02 Jan 2016 6:52 PM (IST)
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प्री पेड टैक्सी योजना पर रेलवे का ग्रहण

प्री पेड टैक्सी योजना पर रेलवे का ग्रहण पांच साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पायी योजना/इरेलवे व जिला पुलिस के संयुक्त प्रयास से लागू होगी सुविधाऑटो चालक की मनमानी से नहीं मिल पा रही यात्रियों को निजातयोजना लागू होने से सुरक्षा व्यवस्था भी होगी पुख्ताफोटो. दरभंगा जंकशन की तस्वीर लगा देंदरभंगा. दरभंगा जंकशन […]

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प्री पेड टैक्सी योजना पर रेलवे का ग्रहण पांच साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पायी योजना/इरेलवे व जिला पुलिस के संयुक्त प्रयास से लागू होगी सुविधाऑटो चालक की मनमानी से नहीं मिल पा रही यात्रियों को निजातयोजना लागू होने से सुरक्षा व्यवस्था भी होगी पुख्ताफोटो. दरभंगा जंकशन की तस्वीर लगा देंदरभंगा. दरभंगा जंकशन पर प्री पेड टैक्सी की सुविधा बहाल करने के प्रति रेलवे कतई संजीदा नजर नहीं आ रहा है. वर्षों बीत जाने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है. फलत: यात्री परेशान होने को मजबूर हैं. ऑटो चालकों की मनमानी उन्हें झेलनी पड़ रही है. साथ ही उनकी सुरक्षा भी दांव पर लगी रहती है. उल्लेखनीय है कि रेलवे ने ए-वन ग्रेड स्टेशनों पर प्री पेड टैक्सी की सुविधा बहाल करने की योजना बना रखी है. इस योजना में रेलवे व जिला पुलिस दोनों की महती भूमिका रहती है. इस योजना के लागू होने से यात्रियों को काफी राहत मिलेगी, लेकिन रेल प्रशासन की सुस्ती की वजह से यह योजना खटाई में पड़ी है.क्या है योजनाइस योजना के तहत रेलवे की ओर से निबंधित टैक्सी उपलब्ध रहता है. जरूरतमंद इस टैक्सी की बुकिंग इसके लिए बने काउंटर से कराते हैं. गंतव्य की पूरी जानकारी देने के साथ ही यात्री के संबंध में भी पूरी सूचना देनी होती है. किराये की रसीद उसी समय काट दी जाती है. यह रसीद टैक्सी चालक को दी जाती है. गंतव्य तक पहुंचने के बाद यात्री इस रसीद पर अपना हस्ताक्षर कर चालक को देते हैं. जब चालक वापस इस रसीद को काउंटर में जमा करते हैं, तब जाकर उसे किराया मिलता है. सुरक्षा की मिलती पूरी गारंटीइस व्यवस्था का सबसे पहला लाभ यह है कि यात्रियों को तय किराया से अधिक नहीं देना पड़ता है. जाहिर है, कम दूरी के लिए कई गुणा अधिक भाड़ा वसूली से यात्रियों को निजात मिल जाती है. वहीं दूसरी ओर चूंकि टैक्सी चालक रेलवे से निबंधित होते हैं, लिहाजा यात्रियों की सुरक्षा की भी पूरी गारंटी रहती है. यात्री बेफिक्र होकर देर रात भी इस टैक्सी से अपने ठौर तक पहुंच जाते हैं. रास्ते में किसी तरह की आपराधिक घटना की चिंता नहीं रहती.हो चुकी कई घटनादरभंगा जंकशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों से न केवल इस जिला के सुदूर क्षेत्र के लोग आते हैं, बल्कि सीतामढ़ी, मधुबनी के साथ ही अब तो सहरसा, सुपौल आदि जिलों के यात्री भी पहुंचते हैं. यहां टैक्सी चालकों द्वारा राहजनी व नशा खिला लूट लेने की कई घटनाएं पूर्व में हो चुकी हैं. लिहाजा यात्री शाम ढलने के बाद विशेषकर टैक्सी से अपने गांव जाने से परहेज करते हैं. सनद रहे कि वर्ष 2013 में एक ढाबे में खाना खाने के दौरान एक यात्री को टैक्सी चालक ने अपने अन्य सहयोगियों की मदद से लूट कर सड़क किनारे उसे छोड़ दिया था. 2010 में तो एक टैक्सी चालक की ही अपराधियों ने हत्या कर उसकी बोलेरो गाड़ी लूट ली थी.रेलवे व पुलिस दोनों को करनी होगी पहलइसके लिए रेल प्रशासन के साथ ही जिला पुलिस महकमा दोनों को पहल करनी होगी. सूत्रों के अनुसार इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए रेलवे की ओर से जिला पुलिस को प्रस्ताव भेजा जाना है. टैक्सी व चालक का प्रबंध जिला प्रशासन को ही करना है, लेकिन दोनों ही विभाग इसके प्रति उदासीन बना है.

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