दम तोड़ रही संस्कृत कॉलेज की शक्षिा व्यवस्था

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Dec 2015 6:53 PM

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दम तोड़ रही संस्कृत कॉलेज की शिक्षा व्यवस्था विषयवार शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावितफोटो- फारवार्डेडपरिचय-विरान पड़ा बैगनी संस्कृत महाविद्यालयबेनीपुर. सरकारी एवं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण क्षेत्र में उच्च संस्कृत शिक्षा दम तोड़ रही है. संस्थान में न तो समुचित शिक्षक एवं कर्मी है न छात्र-छात्राएं. शिक्षा व्यवस्था का आलम यह है कि […]

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दम तोड़ रही संस्कृत कॉलेज की शिक्षा व्यवस्था विषयवार शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावितफोटो- फारवार्डेडपरिचय-विरान पड़ा बैगनी संस्कृत महाविद्यालयबेनीपुर. सरकारी एवं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण क्षेत्र में उच्च संस्कृत शिक्षा दम तोड़ रही है. संस्थान में न तो समुचित शिक्षक एवं कर्मी है न छात्र-छात्राएं. शिक्षा व्यवस्था का आलम यह है कि कई विषयों में तो वर्षों से शिक्षक नदारद हैं. जिसके कारण छात्र अब संस्कृत शिक्षा का नाम तक नहीं लेते हैं. हां शिक्षा नहीं डिग्री के लिए कुछ छात्र-छात्रा इन संस्थानों में नामांकन कराने जरूर पहुंचते हैं. प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय द्वारा नियमित परीक्षा संचालन कर संस्कृत शिक्षा की वजूद जहां कायम किये हुए हैं. वहीं विवि एवं यूजीसी द्वारा उक्त शिक्षा पर करोड़ों का वारा न्यारा किया जा रहा है. जी हां यह दासता है प्रखंड के शिवजी संस्कृत महाविद्यालय बैगनी का जो कभी संस्कृत पंडितों एवं छात्रों से गुलजार हुआ करता था. वहां आज निगरानी का आलम है. हो भी क्यों नहीं पूर्व में यहां प्राचार्य सहित दस विषय वार शिक्षक के अलावा दो लिपिक एक आदेशपाल तथा एक रात्रि प्रहरी हुआ करता था. वर्त्तमान में प्राचार्य सहित चार शिक्षक एक लिपिक एक आदेशपाल तथा कहने के लिए एक रात्रि प्रहरी कार्र्यरत हैं. जिस रात्रि प्रहरी फूल चंद साहु वर्षों से वीसी आवास पर प्रतिनियुक्त हैं और महाविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है. विगत सोमवार को दिन के 12.30 बजे महाविद्यालय के सभी कमरों में ताला झूल रहा था पर कार्यालय में तीन शिक्षक के साथ लिपिक एवं आदेश पाल बैठे थे. पर छात्र छात्राओं का दूर दूर तक कहीं अता पता नहीं था. प्राचार्य का भी कुर्सी खाली पड़ी थी. वैसे कहने के लिए यूजीसी द्वारा महाविद्यालय को पूर्ण संसाधन संपन्न बना दिया गया है. महाविद्यालय में भले ही छात्र छात्राओं का कहीं अतापता नहीं है पर यूजीसी से करोड़ों की लागत से बालिका छात्रावास, बालिका मनोरंजन गृह, प्रशासनिक भवन दो शिक्षक आवास आधा दर्जन शौचालय बनकर लगभग तैयार है. इतना ही नहीं एक सुसज्जित पुस्तकालय के अलावा संस्कृत शिक्षा को तकनीकि शिक्षा से जोड़ने के लिए बिना शिक्षक के कई वर्ष पूर्व 6 कंप्यूटर दो जेनेरेटर सहित यूपीएस उपलब्ध कराया जा चुका है. पर छात्र एवं शिक्षक के अभाव में सब धुल धुसरित हो रहा है. कहने के लिए इस महाविद्यालय में उप शास्त्री में 40 एवं शास्त्री तीनों खंड में 70 छात्र छात्रा नामांकित हैं. ये छात्र शायद साल में दो रोज महाविद्यालय आये. नामांकन एवं परीक्षा फार्म भरने के दिन. महाविद्याल में उपस्थित शिक्षकों ने बताया कि कभी दो कभी चार छात्र आ जाते हैं तो उसे पढ़ा देता हूं. दो चार दिन पूर्व एक बाथो महाविद्यालय के शिक्षक उदयशंकर झा यहां योगदान दिये हैं पर योगदान से पूर्व ही उनके प्रतिनियुक्ति विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग में कर दिया गया है. दूसरी बात यह भी है कि संस्कृत शिक्षा के आधार पर छात्रों का नियोजन नहीं मिल रहा है. लोग तकनीकि शिक्षा की ओर पलायन करने लगे हैं. यही स्थिति क्षेत्र के बाथों एवं तरौनी संस्कृत महाविद्यालय का है. नवादा के पंडित कमलोधर शर्मा, प्रो. पृथ्वी चंद्र महेन्दू , डा. मणिकांत झा आदि ने खेद प्रकट किया.

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