उद्यान विभाग की लापारवाही! 700 हेक्टेयर में आम, लीची के नुकसान का अब तक नहीं मिला मुआवजा, फिर सर्वेक्षण कराएगा विभाग

bihar cyclone news: मुजफ्फरपुर जिले में पिछले साल असमय हुई बारिश व ओलावृष्टि से फसलों के साथ-साथ आम और लीची को हुए नुकसान का अब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिला है. लेकिन, इस बार फिर नये सिरे से सर्वेक्षण कार्य शुरू करने का निर्देश जारी हो गया है. इससे किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं. पिछले साल करीब 700 हेक्टेयर में लगे आम और लीची के पेड़ बारिश के कारण हुए जलजमाव से सुख गये थे. किसानों ने सूखे पेड़ को काट कर उसका उपयोग जलावन की लकड़ी के रूप में किया था.
नवीन कुमार अंशु: मुजफ्फरपुर जिले में पिछले साल असमय हुई बारिश व ओलावृष्टि से फसलों के साथ-साथ आम और लीची को हुए नुकसान का अब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिला है. लेकिन, इस बार फिर नये सिरे से सर्वेक्षण कार्य शुरू करने का निर्देश जारी हो गया है. इससे किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं. पिछले साल करीब 700 हेक्टेयर में लगे आम और लीची के पेड़ बारिश के कारण हुए जलजमाव से सुख गये थे. किसानों ने सूखे पेड़ को काट कर उसका उपयोग जलावन की लकड़ी के रूप में किया था.
किसानों ने विभाग और सरकार से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की थी. निदेशक उद्यान नंद किशोर ने पिछले साल ही 15 सितंबर को जिला सहायक निदेशक उद्यान को पत्र भेज कर निर्देशित किया था. बताया था कि असमय हुई बारिश, ओलावृष्टि से बोचहां, गायघाट, कटरा, औराई और मीनापुर में आम, लीची के पेड़ को काफी नुकसान पहुंचा है. आम और लीची को हुए व्यापक क्षति की जांच कराकर आपदा प्रबंधन विभाग के आलोक में मुआवजा राशि अंकित कर डीएम के माध्यम से इसकी रिपोर्ट विभाग को उपलब्ध करा दें.
उद्यान कार्यालय से प्रभावित प्रखंडों में सर्वेक्षण करा कर विभाग को रिपोर्ट भेज दी गयी. लेकिन, एक साल बाद भी किसान मुआवजा से वंचित है. मीनापुर अलिनेउरा किसान क्लब के मुख्य समन्वयक नीरज कुमार ने बताया कि किसान मुआवजा लेने के लिए उद्यान और डीएम कार्यालय का चक्कर काट कर थक गये. लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई.
यह है नया निर्देश- आम, लीची को हुए नुकसान का एक बार फिर सर्वेक्षण कराया जायेगा. किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक, बीचओ आदि को जिम्मेवारी दी जा रही है. सभी को पंचायत स्तर पर आम,लीची का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा किसानों से भी फसल के साथ ही आम, लीची को हुए क्षति का आवेदन लिया जायेगा. उसके बाद कृषि समन्वयक, सीओ व जिला स्तर के पदाधिकारी आवेदन की जांच करेंगे. जांच के बाद फसल क्षति रिपोर्ट 33 प्रतिशत या उससे अधिक होने पर इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जायेगी. जिसके बाद किसानों को फसल क्षति का मुआवजा मिल सकता है.
पिछले साल असमय बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का सर्वेक्षण करा कर विभाग को डीएम के माध्यम से रिपोर्ट भेज दी गयी थी. इस बार भी आम और लीची को नुकसान होने की जानकारी मिली है. पंचायत स्तर पर क्षति का सर्वेक्षण कराया जायेगा. इसके लिए संबंधित पंचायत, प्रखंड स्तरीय अधिकारी और कर्मियों को निर्देशित किया गया है. क्षति रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा देना आपदा विभाग का काम है.
उपेंद्र कुमार,सहायक निदेशक उद्यान
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