Chaturmas 2023: चातुर्मास हुआ शुरू, आचार्य से जानें क्यों वर्जित रहेंगे शुभ कार्य
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 30 Jun 2023 3:27 AM
Chaturmas 2023: पंचांग के अनुसार सावन के महीने में अधिकमास लगने से चतुर्मास का भी एक माह बढ़कर पांच माह हो रहा है. चातुर्मास के दौरान सभी मांगलिक कार्य- विवाह, मुंडन संस्कार, जनेऊ संस्कार व अन्य सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं.
Chaturmas 2023: चातुर्मास इस बार 29 जून से शुरू हो रहा है. दो सावन माह होने से चातुर्मास इस बार पांच महीने का होगा. चातुर्मास की समाप्ति के बाद 23 नवंबर से शहनाइयां बजनी शुरू होंगी. इसके साथ ही सभी शुभ काम भी शुरू होंगे. भारद्वाज ज्योतिष शिक्षा एवं शोध संस्थान के निदेशक डॉ ज्ञानेश भारद्वाज ने बताया कि आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी कहते हैं. इस तिथि को प्रत्येक वर्ष भगवान विष्णु चार माह के लिए पृथ्वी लोक से क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं. इसके बाद पुनः देवउठनी एकादशी को पृथ्वी लोक आ जाते हैं. इसी चार माह की अवधि को चातुर्मास कहते हैं.
चातुर्मास सामान्य रूप से प्रत्येक वर्ष चार महीने का होता है. लेकिन इस चातुर्मास वर्ष पांच माह का होगा. उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार सावन के महीने में अधिकमास लगने से चतुर्मास का भी एक माह बढ़कर पांच माह हो रहा है. चातुर्मास के दौरान सभी मांगलिक कार्य- विवाह, मुंडन संस्कार, जनेऊ संस्कार व अन्य सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं. क्योंकि सभी कार्य शुभ तिथि व शुभ मुहूर्त पर किये जाने का देश में धार्मिक व सनातनी विधान रहा है. चतुर्मास आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि से आरंभ होकर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक रहेगा.
चातुर्मास देवशयनी एकादशी से शुरू हो जाता है जो इस वर्ष 29 जून 2023 से प्रारंभ हो रहा है. देवोत्थान एकाशी यानी 23 नवंबर तक इस चार माह की अवधि श्रावण, भाद्रपद, आश्विन व कार्तिक मास तक लगते हैं. इन माह में भगवान विष्णु शयन मुद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शंकर के हाथों में चला जाता है. शास्त्रों में बताया गया है कि हर शुभ कार्य के लिए सभी देवी-देवताओं का आवाह्न किया जाता है. लेकिन भगवान विष्णु के शयन कक्ष मुद्रा में जाने से कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करनी चाहिये. कार्तिक मास में देवोत्थान यानी देवउठनी एकादशी पर जब भगवान विष्णु योग मुद्रा से जागकर पुनः पृथ्वी लोक पर आते हैं व तुलसी संग उनका विवाह होता है तब उसके बाद से सभी शुभ कार्य शुरू होते हैं.
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चातुर्मास के बाद इस बार 23 नवंबर से देवोत्थान एकादशी के साथ विवाह मुहूर्त शुरू हो रहा है.
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नवंबर माह में विवाह का शुभ मुहूर्त- 23, 24, 27, 28 व 29.
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दिसंबर माह में विवाह का शुभ मुहूर्त- 05, 06, 07, 08, 09, 11 व 15 है.
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आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ने बताया कि चातुर्मास अवधि के दौरान गुरु उपासना, शिवोपासना, भाद्रपद के पर्वोत्सव, पितरों का महापर्व, शक्ति उपासना, लक्ष्मी पूजा, सूर्योपासना किये जायेंगे. श्रावण में शाक, भाद्रपद में दही, आश्विन में दुग्ध, कार्तिक में द्विदल त्याग व्रत किया जाता है. उन्होंने बताया कि इस बार सावन मास 18 जुलाई से 16 अगस्त तक होने से चातुर्मास पांच महीने का हो रहा है. उन्होंने बताया कि दैत्य राज हिरण्यकश्यप ने अपनी मृत्यु में कई अवरोध में एक 12 महीने से अन्य मास होने के कारण देवताओं मासों से थोड़ा थोड़ा अंश निकालकर एक मास अलग निर्माण हुआ जिसे मलमास कहते हैं, जो लगभग दो-तीन वर्ष के मध्य होता है. इसे श्री हरि ने अपना नाम पुरुषोत्तम मास देकर मान बढ़ाया. चातुर्मास में वैवाहिक मुहूर्त का अभाव होता है. परंतु श्रावण में भूमि पूजन, गृह प्रवेश होंगे. पुरुषोत्तम मास में यज्ञ, अनुष्ठान, जप, दान, पुराणादि की कथा आदि कराना व करना शुभ होता है.
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