इंजीनियरों के गांव' से निकले नए सितारे, विपरीत हालातों में 10 छात्रों ने जीती IIT की जंग
Published by : Suryakant Kumar Updated At : 01 Jun 2026 8:19 PM
छात्रों में खुशी का माहौल
Gaya Ji News: गयाजी के मानपुर स्थित चर्चित पटवा टोली में इस बार आईआईटी जेईई एडवांस 2026 का रिजल्ट थोड़ा कमजोर रहा, जिससे छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में मायूसी दिखी. हालांकि, 'वृक्ष बी द चेंज' नामक निःशुल्क पाठशाला ने इस मायूसी को जश्न में बदल दिया है.
Gaya Ji News ( मानपुर से उदय शंकर की रिपोर्ट ):
बिहार में ‘इंजीनियरों के गांव’ के रूप में चर्चित मानपुर के पटवा टोली का आईआईटी जेईई एडवांस परीक्षा 2026 में रिजल्ट इस बार काफी कमजोर रहा. इससे छात्र-छात्राओं के अलावा अभिभावकों में मायूसी देखी गई. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुभवी व जानकारों का मानना है कि इस बार जेईई एडवांस परीक्षा में कट ऑफ मार्क्स अधिक रहने के कारण पटवा टोली के छात्र-छात्राएं उम्मीद के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन करने से वंचित रह गए. लेकिन इन सब के बीच ‘वृक्ष बी द चेंज’ नामक निःशुल्क पाठशाला से लगभग 10 बच्चों ने सफलता हासिल की है, जिसमें से छह बच्चों का रिजल्ट पूरी तरह सामने आ चुका है.
संस्था के इन 6 होनहारों ने विपरीत हालातों में लहराया परचम
‘वृक्ष बी द चेंज’ के संस्थापक चंद्रकांत पटेश्वरी ने बताया कि आईआईटी जेईई मेन्स में संस्था के कुल 31 बच्चे सफल हुए थे, जिनमें से अभी तक छह बच्चों ने एडवांस में बाजी मारी है. सफल छात्रों की रैंक इस प्रकार है:
अगस्त्या कुमारी (ओबीसी वर्ग): रैंक 6733
स्पंदन कुमार (ओबीसी वर्ग): रैंक 6899
विद्या रानी (ओबीसी वर्ग): रैंक 10517
ओम कुमार (ओबीसी वर्ग): रैंक 10668
अभिषेक कुमार (एससी वर्ग): रैंक 1291
आदिजा कुमारी (सामान्य वर्ग): रैंक 16151
सामाजिक कार्यकर्ता सह बुनकर समाज के उपाध्यक्ष कृष्णा प्रसाद ने बताया कि मानपुर में पिछले दो दशकों से अधिक समय से बच्चों का प्रयास काफी अच्छा रहा है. यहाँ पूर्व में आईआईटी पास कर चुके छात्र, जो दिल्ली, मुंबई और विदेशों में नौकरी कर रहे हैं, वे ऑनलाइन टीम बनाकर बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते हैं. गरीब बच्चों को भोजन, कॉपी और किताबें भी मुफ्त मुहैया कराई जाती हैं.
डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई (AI) तकनीक बनी सहयोगी
संस्था के सचिव चंद्रकांत पटेश्वरी ने बताया कि अब बच्चों को पूर्ण रूप से ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुविधा दी जा रही है, जिससे पहले बच्चे वंचित थे. अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के जरिए भी बच्चों को मोटिवेट किया जाता है. उन्हें शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी सिखाए जाते हैं, ताकि बच्चे अपनी गरीबी को मात देकर ज्ञान को जीवन में यादगार बना सकें.
सफल छात्रा विद्या रानी व ओम कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों और मार्गदर्शकों दुगेश्वर प्रसाद, रंजीत कुमार, कुलदीप कुमार, सुनील कुमार व दिनेश कुमार को दिया है. बच्चों ने बताया कि मानपुर पटवा टोली में अब सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, एनआईटी, बैंकिंग सहित बीपीएससी (BPSC) और यूपीएससी (UPSC) जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी और सफलता भी मिल रही है.
मजदूरी कर बेटे को बनाया इंजीनियर, घर में जगह नहीं थी तो वेपर लाइट में पढ़ा ओम
मानपुर के नगर निगम वार्ड 49 (पंपू पर, रेलवे ब्रिज के निकट) के रहने वाले एक साधारण मजदूर के बेटे ओम कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में आईआईटी जेईई एडवांस में ओबीसी वर्ग में 10668 रैंक लाकर सफलता हासिल की है. ओम के पिता सुनील कुमार और माता बसंती देवी सूत करघे पर 12-12 घंटे काम करके महज 400 से 500 रुपये रोजाना मजदूरी कमा पाते हैं.
रेलवे की जमीन पर खपड़े का मकान, खाने के लाले फिर भी नहीं हारी हिम्मत
ओम के घर में पढ़ाई करने तक की जगह नहीं थी. वह दिन में 12 से 14 घंटे ‘वृक्ष बी द चेंज’ संस्था में पढ़ाई करता था और रात को घर के बाहर मंदिर के पास लगी सरकारी वेपर लाइट के नीचे बैठकर पढ़ता था. ओम ने बताया कि उसके पीछे दो छोटे भाई-बहन (6 साल की खुशी और 4 साल का विष्णु) हैं, जिनका लालन-पालन माता-पिता के भरोसे ही है.
ओम के चाचा संतोष कुमार ने भावुक होते हुए बताया कि उन लोगों के पास रहने के लिए खुद की जमीन भी नहीं है. रेलवे की जमीन पर किसी तरह छोटा सा खपड़े का मकान खड़ा किया गया है. जहाँ खाने-पीने का संकट हो, वहाँ उच्च शिक्षा के बारे में सोचना भी मुश्किल था. लेकिन ओम की लगन देखकर गांव के पॉलिटेक्निक विद्यालय से 10वीं और ग्रीन फील्ड स्कूल मानपुर से 12वीं कराई गई. पैसे नहीं होने के कारण वह कोटा नहीं जा सका और सेल्फ स्टडी को ही अपना सबसे मजबूत हथियार बनाया.
पिता ने छोड़ा साथ, तो नाना-नानी ने संवारा विद्या रानी का भविष्य
दूसरी तरफ, अरवल जिले के अहियापुर गांव की मूल निवासी विकास कुमार की बेटी विद्या रानी की कहानी भी बेहद संघर्षपूर्ण है. विद्या बचपन से ही पिता के प्यार से वंचित रही. वह अपनी मां सीमा कुमारी के साथ मानपुर के गेरे रोड कृष्ण पुरी कॉलोनी स्थित अपने नाना-नानी के घर रहकर पढ़ाई करती थी.
विद्या के नाना प्रेम चंद प्रसाद गुप्ता कृषि विभाग से सेवानिवृत्त कर्मी हैं. वे अपने परिवार के साथ-साथ अपनी बेटी (विद्या की मां) और दो बहनों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. विद्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और शिक्षकों को दिया है. विद्या ने बताया कि उनके पिता पारिवारिक जीवन से दूर रहे, लेकिन मां का पूरा प्यार मिला. विद्या का संकल्प है कि जब वह आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएगी, तो अपनी जैसी अन्य गरीब बच्चियों के भविष्य को सुधारने के लिए ‘वृक्ष बी द चेंज’ संस्था को आर्थिक मदद पहुंचाएगी.
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