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आइसीयू की दो माह में व्यवस्था चौपट

Updated at : 27 Mar 2019 7:50 AM (IST)
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आइसीयू की दो माह में व्यवस्था चौपट

मोतिहारी : पिछले दो-तीन माह में आईसीयू के कई उपक्रम खराब होने के कारण यह बंदी के कगार पर है. हालांकि, इस संबंध में चिकित्सकों एवं नर्सों ने उपाधीक्षक को कई बार पत्र भी लिखा है. लेकिन सुधार के कोई आसार नजर नहीं आ रहे है. गौरतलब हो कि 14 दिसंबर 2015 को आधुनिक सुविधाओं […]

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मोतिहारी : पिछले दो-तीन माह में आईसीयू के कई उपक्रम खराब होने के कारण यह बंदी के कगार पर है. हालांकि, इस संबंध में चिकित्सकों एवं नर्सों ने उपाधीक्षक को कई बार पत्र भी लिखा है.

लेकिन सुधार के कोई आसार नजर नहीं आ रहे है. गौरतलब हो कि 14 दिसंबर 2015 को आधुनिक सुविधाओं से युक्त दो बड़े आईसीयू तत्कालीन डीएम अनुपम कुमार एवं सीएस प्रशांत कुमार ने इसकी शुरुआत की. अपने स्थापना काल से लेकर दिसंबर 2018 तक कुल 42 मरीज भर्ती कराया गया, जिसमें सात की मौत हो गयी.
शेष सभी दुरुस्त है. व्यवस्था के गड़बड़ी के कारण जनवरी 2019 में एक तथा फरवरी में एक मरीज आये. बाद में उन्हें पटना रेफर कर दिया गया. बताया जाता है कि इस आईसीयू में निमुलाइजर खराब, मॉनिटर की बीपी मशीन खराब, पोर्टेबल बीपी मशीन भी खराब पड़ी है. एसी भी बंद पड़े हैं. नतीजन इसकी व्यवस्था को देख मरीज अपना ईलाज बाहर ही कराना बेहतर समझते हैं.
समय-समय पर मशीनों की सर्विसिंग या रिपयेरिंग नहीं होने के कारण व्यवस्था चौपट होती जा रही है. इसके लिए विभाग के अलाधिकारियों को कई बार पत्र लिखा गया लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला.
डाॅ नागमणि सिंह, नोडल पदाधिकारी, आईसीयू
रिमाॅडलिंग का कार्य जारी
बार-बार आग लगने से बंदी के कागार पर पहुंचा एसएनसीयू में राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर रिमाॅडलिंग का कार्य जारी है. नोडल पदाधिकारी डाॅ अमृतांशु ने बताया कि सभी जले उपक्रम बन गये हैं. एक वार्मर खराब है. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति को लिखा गया है.
पदाधिकारी के विरोध में कर्मियों में आक्रोश
घोड़ासहन: प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा बिल व अन्य अभिलेखों पर हस्ताक्षर नहीं करने एवं बेवजह परेशान किये जाने से नाराज चिकित्सक समेत अन्य सभी वर्ग के कर्मचारियों ने असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को शिकायत पत्र भेज मोर्चा खोल दिया है.
शिकायत पत्र में कहा गया है कि पांच दिनों से मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रभुनाथ गुप्ता के समक्ष माह फरवरी 2019 के आउट सोर्सिंग व अन्य भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन इनके द्वारा दस्तखत नहीं किया जा रहा है.
आवेदन में कहा गया है कि वितीय वर्ष समाप्ति की ओर है और कोषागार के निर्देशानुसार अंतिम बिल लेने की तय सीमा 25 मार्च निर्धारित था. वही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बीते 20 मार्च से अनुपस्थित चल रहे है. इधर हॉस्पिटल में कार्यरत चिकित्सा पदाधिकारी कृष्णमुरारी गुप्ता ने भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पर आर्थिक एवं मानसिक शोषण करने का आरोप लगाया है.
शिकायत पत्र देने वालो में चिकित्सा पदाधिकारी कृष्ण मुरारी गुप्ता, स्वास्थ्य प्रबंधक मंटू कुमार चौबे, बीसीएम नजीबुर्रह्मान, लिपिक शशिभूषण ठाकुर, प्रतिमा कुमारी, एएनएम अनिता गुप्ता, अभिलाष कुमारी, लिपिक बिंदु कुमार, रजनी सिन्हा, मदन राम, खजांची पासवान, किशोरी महतो, शीलम देवी, ललिता देवी समेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सभी कर्मियों के नाम शामिल है. इधर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ पीएन गुप्ता आरोप को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि बिल त्रुटिपूर्ण था इसलिए हस्ताक्षर नहीं किया.
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