हरी सब्जी की कीमत में उछाल से बिगड़ा जायका
Updated at : 26 Jul 2017 4:29 AM (IST)
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मोतिहारी : बारिश के मौसम में हरी सब्जियों की कीमत में आयी उछाल ने रसोई घरों का जायका बिगाड़ दिया है. ग्रामीण क्षेत्रों से इन दिनों बाजार में कम सब्जियां पहुंच रही हैं. सब्जी बाजार में आवक कम होने से सब्जी का भाव आसमान पर है. स्थिति यह है कि अब लोग किलो के बजाय […]
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मोतिहारी : बारिश के मौसम में हरी सब्जियों की कीमत में आयी उछाल ने रसोई घरों का जायका बिगाड़ दिया है. ग्रामीण क्षेत्रों से इन दिनों बाजार में कम सब्जियां पहुंच रही हैं.
सब्जी बाजार में आवक कम होने से सब्जी का भाव आसमान पर है. स्थिति यह है कि अब लोग किलो के बजाय पाव में सब्जियां लेकर घर पहुंच रहे हैं. बारिश से पहले जो सब्जियां 15 से 20 रुपये की दर से मिल रही थी. आज लोग 40 से 50 रुपये की दर से खरीदने को मजबूर हैं. सामान्य लोग व गरीबों की थाली से इन दिनों सब्जी गायब हो गयी है. चटनी, प्याज, नमक व मिर्च से चल रहा है काम. वहीं संपन्न लोगों की थाली में पहले 3 से चार सब्जियां व भुजिया होती थी,
वह एक से दो पर सिमट गयी है. इधर, शहर के कचहरी चौक, बलुआ बाजार, मीना बाजार, छतौनी, जानपुल, ज्ञानबाबू चौक, स्टेशन रोड, चांदमारी चौक आदि विभिन्न जगहों पर सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि जिले में रूक-रूक हो रही बारिश से फूल व लत्तियां गल जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से सब्जियों बाजार में नहीं पहुंच पा रही है.
लगातार बारिश से खेतों में लगी गरमा सब्जी की फसल गल गयी है. इस वजह से सब्जियों में तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है. हालांकि, आलू की कीमत पर कोई असर नहीं पड़ा है. इसलिए लोग बच्चों की दिलचस्पी को देखते हुए आलू खरीदने पर अधिक जोर दे रहे हैं. लेकिन घर के बड़े-बुजुर्गों के लिए हरी सब्जियों की कीमत में उछाल आना परेशानी का सबब बन गया है. लोग हर तरह की सब्जियां की जायका लेना पसंद करते हैं.
सब्जियों की आपूर्ति कम होने से ऐसी स्थिति हो रही उत्पन्न
लोग किलो के बजाय पाव में सब्जियां लेकर पहुंच रहे घर
गरीबों की थाली से सब्जी गायब, नमक से चल रहा काम
सब्जियां वर्तमान पहले
भिंडी 30 15
टमाटर 60 30
बैगन 30 15
नेनुआ 20 10
गोभी 80 67
करैला 30 10
कांडा 30 20
कद्दू 30 15
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प्रतिवर्ष दानपात्र से 20-25 लाख की होती है मंदिर को आमदनी
अभी तक 11 में दो दानपात्रों के नोटों की हो चुकी है गिनती
दानपेटी के सिक्काें आदि की गिनती करना है बाकी
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