14 वर्षों बाद बैंक घोटाले की जांच का िजम्मा इओयू को

Updated at : 03 Jul 2017 5:20 AM (IST)
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14 वर्षों बाद बैंक घोटाले की जांच का िजम्मा इओयू को

उत्तर बिहार के तीन जिलों के बैंक की शाखाओं में गड़बड़ी का मामला मोतिहारी : उत्तर बिहार में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की दर्जन भर शाखाओं में 32 लाख के घोटाले की जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंपी गयी है. अनुसंधान की मॉनीटरिंग आर्थिक अपराध इकाई के आइजी जीएस गंगवार का रहे हैं. यह घोटाला […]

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उत्तर बिहार के तीन जिलों के बैंक की शाखाओं में गड़बड़ी का मामला

मोतिहारी : उत्तर बिहार में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की दर्जन भर शाखाओं में 32 लाख के घोटाले की जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंपी गयी है. अनुसंधान की मॉनीटरिंग आर्थिक अपराध इकाई के आइजी जीएस गंगवार का रहे हैं. यह घोटाला बैंक कर्मियों व मुजफ्फरपुर के ओरिजीन एक्सप्रेस कूरियर कंपनी के कर्मियों की मिलीभगत से हुआ था. यह मामला 14 साल पुराना है. आर्थिक अपराध इकाई के साथ मोतिहारी जिले के तेज तर्रार पुलिस पदाधिकारियों को अनुसंधान में लगाया गया है.
आर्थिक अपराध को घोटाले की जांच का जिम्मा मिलने के बाद अनुसंधान में तेजी आयी है.घोटाले के मुख्य आरोपित कूरियर कंपनी के शशिभूषण सिंह की गिरफ्तारी को मोतिहारी पुलिस की टीम ने शुक्रवार को पटना के बाढ़ धरवाहाचक गांव स्थित उसके घर पर छापेमारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली. शशिभूषण ओरिजीन एक्सप्रेस कूरियर कंपनी का फ्रेंचाइजी लिया था. मुजफ्फरपुर में रह कर सिकंदरपुर में उसने कूरियर कंपनी खोल रखी थी. जांच अधिकारी मुफस्सिल इंस्पेक्टर सतीशचंद्र माधव ने बताया कि आरोपित शशिभूषण सिंह के घर की कुर्की हो चुकी है. गिरफ्तारी के साथ उसके नाम व पते के सत्यापन को लेकर दारोगा मनोज कुमार को उसके गांव बाढ़ धरवाहाचक भेजा गया था, लेकिन वह नहीं मिला.उसके परिजनों से पूछताछ की गयी. परिजनों ने बताया कि शशिभूषण के घर आये वर्षों हो गये.
14 वर्ष बाद बैंक…
बताते चलें कि बैंक की विभिन्न शाखाओं से करीब 32 लाख का घोटाला हुआ था. मामला पकड़ में आने पर मोतिहारी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व ब्रांच मैनेजर ने नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. वहीं एक दूसरी प्राथमिकी कूरियर कंपनी के मालिक विमल कोठारी ने मुजफ्फरपुर नगर थाने में शशिभूषण सहित अन्य के विरुद्ध दर्ज करायी थी.
इस तरह से हुई थी बैंक से पैसे की निकासी. पुलिस के अनुसार, पहले बैंक मैनुअल सिस्टम से चलता था. चेक को क्लियरेंस के लिए कूरियर कंपनी के माध्यम से दूसरे बैंकों में भेजा जाता था. इसका फायदा उठा ओरिजीन एक्सप्रेस कूरियर कंपनी ने फर्जी नाम व पते पर विभिन्न बैंकों में खाता खोल रखा था. उसके कूरियर के माध्यम से जब भी क्लियरेंस के लिए चेक बैंकों में जाता था, तो वह बिना जांच-पड़ताल के बैंक का मोहर व जाली हस्ताक्षर कर चेक को क्लियरेंस कर भुगतान के लिए वापस संबंधित बैंक में भेज पैसे की निकासी करवा लेता था.े
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