फादर्स डे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jun 2017 5:35 AM
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रक्सौल : रविवार को फादर्स डे के मौके पर प्रभात खबर ने शहर के कवियों से पिता की महता को जानने के लिए मुलाकात की. कवियों ने पिता के लिए अपनी कविता के माध्यम से प्रतिक्रिया इस प्रकार दी. पिता के विचार सही रास्ते पर लाने के लिए करते हैं प्रेरित मोतिहारी. राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा […]
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रक्सौल : रविवार को फादर्स डे के मौके पर प्रभात खबर ने शहर के कवियों से पिता की महता को जानने के लिए मुलाकात की. कवियों ने पिता के लिए अपनी कविता के माध्यम से प्रतिक्रिया इस प्रकार दी.
पिता के विचार सही रास्ते पर लाने के लिए करते हैं प्रेरित
मोतिहारी. राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा ने रविवार को फादर्स डे पर एक बैठक की. इस अवसर पर मोर्चा के नेता आशीष गुप्ता ने कहा कि पिता शब्द 16 वीं शताब्दी में अस्तित्व में आया. वहीं फादर्स डे 20 शताब्दी में अपनाया गया. यह दिन पिता के सम्मान में मनाया जाने वाला पर्व है. पिता को अपने प्रेम का एहसास दिलाने का यह सबसे अहम दिन हर किसी के लिए विशेष होता है. पिता के विचार जीवन को सही रास्ते पर लाने के लिये प्रेरित करती है. मौके पर मोर्चा के अध्यक्ष प्रियरंजन चौबे, हेप्पी गुप्ता, अंकित मिश्रा, विलास राय, बिटु कुमार, चंदन, कुमार सानू, रोहित श्रीवास्तव, राजा मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद थे.
पिता देव जीवन दाता है, पिता-पुत्र के मान है. पितृ स्नेह के बिना कहां पूरे होते अरमान है. पिता ज्ञान है, पिता ध्यान है. पिता गुरु, ज्ञानी है. पालन में सर्वस्व लुटाते, पिता महादानी है.
डॉ हरेंद्र हिमकर, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, केसीटीसी कॉलेज, रक्सौल
हे पिता, तुम्हारे चरणों में सादर सम्मान समर्पित है. जो कुछ पाया तुमसे पाया वह सब कुछ तुमको अर्पित है. तुमने ही चलने की शक्ति, ऊर्जा और संस्कार दिया. मान
से जिऊं और मुस्कान से ऐसा एक संसार दिया.
भरत प्रसाद गुप्ता, अध्यक्ष, संभावना, रक्सौल
आप न होते मैं न होता, फिर मेरे लिए कुछ नहीं होता. जो भी है आपसे ही है, कैसे उऋण हूंगा मैं, यह नहीं जानता हूं मैं, जैसे मां बख्शती है, वैसे आप प्यार बख्शे तो उऋण हो जाऊं मैं.
आशिष कुमार त्रिपाठी, कवि, रक्सौल
पिता आन है, शान है, पहचान है. अपने बच्चों का मधुर मुस्कान है. पिता शासन है, अनुशासन है, योग का सबसे बड़ा आसन्न है. पिता वट वृक्ष रूपी वह साया है, जिसमें सारा परिवार समाया है.
रवींद्र कुमार मिश्र, कवि, रक्सौल
पिता वे देव पुरुष है, जिन्हें सब कुछ कहने में हिचकते नहीं. हे पिता आपको नमन है, आशीर्वाद देने से थकते नहीं.समाज में जो पहचान है, उन्हीं के बदौलत है.
नागेश्वर कुमार, सेवानिवृत शिक्षक, रक्सौल
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