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Buxar News: पर्यावरण बचाएं, पेड़ को नहीं काटे, पेड़-पौधे प्रकृति के श्रृंगार व आभूषण है : डॉ संजय सिंह

Updated at : 27 Jul 2025 5:18 PM (IST)
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Buxar News: पर्यावरण बचाएं, पेड़ को नहीं काटे, पेड़-पौधे प्रकृति के श्रृंगार व आभूषण है : डॉ संजय सिंह

विकसित देश अमेरिका भी अछूता नहीं है. अति वृष्टि से कुछ भूभाग में बाढ़ जैसी स्थिति है.

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डुमरांव. सावन के पवित्र माह में पर्यावरण भारती के सदस्य एवं योग प्रशिक्षक, डायट सह भूगोल प्रवक्ता, एस एम कालेज के डॉ संजय कुमार सिंह द्वारा फलदार वृक्ष बेल और औषधीय वृक्ष मीठा नीम सहित (कड़ी पत्ते) व कई पौधे विभिन्न मंदिरों में लगाए गए. इस दौरान डॉ संजय सिंह ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से संसार के मानव चिन्तित हैं, मानव जीवन पर विनाश का खतरा स्पष्ट दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि फ्रांस में तापमान 37 ° सेल्सियस पहुंच गया है. चीन भी ग्लोबल वार्मिंग के चपेट में है. विकसित देश अमेरिका भी अछूता नहीं है. अति वृष्टि से कुछ भूभाग में बाढ़ जैसी स्थिति है. भारत के हिमाचल प्रदेश में अचानक बादल फटने से भीषण बारिश से अभी तक 90 मानव काल के गाल में समा गए, भूस्खलन से उत्तराखंड में जन जीवन तबाह है. दिल्ली में भीषण बारिश से मानव जीवन परेशान है. डॉ संजय सिंह ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही प्राकृतिक आपदायें जन जीवन को प्रभावित किया है. मानव ने प्रकृति के साथ अति छेड़छाड़ किया है, संसार के मानव प्रकृति को माता मानना छोड़ दिया, अतः भौतिक चकाचौंध के कारण पर्यावरण का दोहन नहीं शोषण किया है. फलस्वरुप प्रकृतिक आपदायें हमेशा किसी न किसी रूप में आती है. कभी कोरोना वायरस महामारी तो कभी चक्रवात तो कभी भूकंप जैसी आपदाओं से मानव परेशान हो जाता है. प्रचीन काल में भगवान श्रीराम जी 14 वर्षों तक वनवासी जीवन बिताये, उन्होंने किसी पहाड़ को क्षति नहीं की, किसी हरे भरे पेड़ को नहीं काटे, पेड़-पौधे प्रकृति का श्रृंगार आभूषण है, उनके आभूषण को मानव स्वार्थवश क्षति करेगा तो प्रकृति को झेलना होगा, अतः प्रकृति माता को प्रसन्न करने हेतु वृक्षारोपण अभियान चलाना होगा, सावन महीना में शिवभक्त भोलेनाथ को बिल्वपत्र चढ़ाते हैं, परंतु यदि सावन में कम से कम एक बेल का पौधा लगाकर 5 वर्षों तक सुरक्षा करें तो भगवान शिवजी दोगुना प्रसन्न होंगे, अतः एक बेल पौधे भगवान भोलेनाथ के नाम अवश्य लगायें, इससे बिल्वपत्र तो मिलेगा ही, गर्मी के मौसम में बेल का फल भी खाने को मिलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAVIRANJAN KUMAR SINGH

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