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Buxar News: दो से संग्रहालय में दिया जाएगा कैथी लिपि का प्रशिक्षण

Updated at : 20 Jul 2025 9:41 PM (IST)
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Buxar News: दो से संग्रहालय में दिया जाएगा कैथी लिपि का प्रशिक्षण

सीताराम उपाध्याय संग्रहालय, बक्सर एवं इंडियन नेशनल ट्रस्ट फौर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज, पटना चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में बिहार की प्राचीन लिपि कैथी लिपि प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा

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बक्सर

. सीताराम उपाध्याय संग्रहालय, बक्सर एवं इंडियन नेशनल ट्रस्ट फौर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज, पटना चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में बिहार की प्राचीन लिपि कैथी लिपि प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा. सीताराम उपाध्याय संग्रहालय बक्सर के संग्रहालयाध्यक्ष डाॅ शिव कुमार मिश्र के अनुसार 2 से 4 अगस्त 2025 तक तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित किया जाएगा. जिसके लिए 18 जुलाई से पंजीयन फार्म संग्रहालय में जमा की जायेगी.

सीमित जगह है इसलिए जमीन संबंधीत पेशेवर, राजस्व कर्मचारी, अमीन, अधिवक्ता, बैंक कर्मचारियों को प्रशिक्षण में प्राथमिकता दी जाएगी. विदित हो कि बिहार सरकार द्वारा जमीन सर्वे का कार्य किया जा रहा है. जमीन संबंधी पुरानी दस्तावेज कैथी लिपि में लिखी गई है. जमीन संबंधित पेशेवर, राजस्व कर्मचारियों, सरकारी अमीन, कानूनगो एवं जमीन संबंधी पदाधिकारियों, बैंक कर्मचारियों आदि के लिए कैथी लिपि का ज्ञान अत्यावश्यक है, जबकि इसका सर्वथा अभाव है. ऐसी परिस्थिति में जमीन संबंधी दस्तावेज पढ़ना मुश्किल है. बैंक से ऋण लेने में लोगों को दिक्कत होती है. वैसे बिहार में करीब एक हजार वर्षो से कैथी लिपि के प्रमाण मिल रहे हैं. कैमूर जिलांतर्गत रामगढ़ के पास बैजनाथ शिव मंदिर में करीब एक हजार वर्ष पुरानी शिलालेख है. जिसमें मगरधज जोगी 700 उत्कीर्ण है. इसी तरह मधेपुरा जिला के श्रीनगर तथा मधुबनी जिला के अंधराठाढ़ी में भी इसतरह के शिलालेख मिले हैं. ये सभी शिलालेख नवम दशम शताब्दी में लिखी गई थी. डा मिश्र के अनुसार भागलपुर जिला के बटेश्वर शिव मंदिर के मुख्य द्वार पर दो दुर्लभ शिलालेख लगे हुए हैं लेकिन ये आधुनिक काल की है. इसमें कैथी के साथ साथ बंगाली एवं नागरी भी अंकित है. शेरशाह सूरी के समय से जमीन संबंधी दस्तावेजों को कैथी लिपि में लिखा जाने लगा. जिसे वर्तमान समय में पढ़ने वालों का सर्वथा अभाव है. अमर शहीद बाबू वीर कुंवर सिंह के जमीन संबंधी दस्तावेज एवं डीड कैथी लिपि में ही लिखी गई थी. इसी तरह दरभंगा महाराज के अलावा अन्य जमींदारों के जमीन संबंधी दस्तावेज कैथी लिपि में लिखी गई है. जमीन संबंधी मामलों के निपटारे हेतु इस लिपि का ज्ञान जरूरी है. बिहार के विभिन्न न्यायालयों में सबसे अधिक जमीन संबंधी मामले लंबित हैं जिसके लिए जमीन के दस्तावेजों का पढ़ना अनिवार्य है, लेकिन पैरवी करने वाले अधिवक्ता एवं न्यायिक पदाधिकारियों में इस लिपि के विषय में जानकारी का सर्वथा अभाव है. ऐसी परिस्थिति में न्यायिक निर्णयों पर संदेह हो सकता है. कैथी लिपि बिहार की महत्वपूर्ण विरासत है. जिसके संरक्षण हेतु हमारे टीम द्वारा अनेक स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण सह जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. पटना, दरभंगा, भागलपुर, नवादा एवं बेगूसराय में अनेक कार्यक्रम आयोजित कर हजारों लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है. अब बिहार सरकार के राजस्व विभाग द्वारा भी अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. हमारे टीम द्वारा प्रशिक्षित दो युवकों प्रीतम कुमार एवं वकार अहमद द्वारा अनेक जिलों में सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है. कैथी लिपि प्रशिक्षण हेतु एक बुकलेट भी प्रकाशित की गयी है. डा मिश्र ने बताया कि मेरे प्रयास से ही तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कैथी लिपि प्रशिक्षण के लिए छः महीने के लिए सर्टिफिकेट कोर्स आरंभ किया गया है. इन आयोजनों के लिए मैथिली साहित्य संस्थान, बिहार पुराविद् परिषद, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर आदि का आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ है. इन्टैक पटना के कन्वेनर वरिष्ठ इतिहासकार भैरव लाल दास द्वारा कैथी लिपि का इतिहास नामक पुस्तक की रचना की गई है. बक्सर जिला के कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रतिमा कुमारी ने कहा कि कैथी लिपि बिहार की सांस्कृतिक विरासत है. जिसके संरक्षण हेतु यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस अवसर पर अभिराम दुबे, वरिष्ठ पत्रकार राम मुरारी, विमल यादव, मोहम्मद मुश्ताक हुसैन, अनिकेत कुमार, मोहम्मद आशिक रामरुप ठाकुर, अभिशेष चौबे, अभिनंदन कुमार सहित अन्य संग्रहालय कर्मी उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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