बच्चों के डॉक्टर रहें गायब तो विलंब से खुला अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 05 Jun 2024 10:01 PM
बुधवार को अनुमंडलीय अस्पताल में 11 बजे तक ओपीडी में डॉ शिव कुमार चौधरी, महिला चिकित्सक डॉ कुमारी रश्मि, फिजियोथेरेपिस्ट अजय कुमार मौजूद रहे
डुमरांव. बुधवार को अनुमंडलीय अस्पताल में 11 बजे तक ओपीडी में डॉ शिव कुमार चौधरी, महिला चिकित्सक डॉ कुमारी रश्मि, फिजियोथेरेपिस्ट अजय कुमार मौजूद रहे. अल्ट्रासाउंड रेडियोलाजिस्ट व बच्चे के डॉक्टर कक्ष में ताला लटकता रहा. हालांकि विलंब से पहुंचे डाक्टर ने कुछ महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया. आनन फानन में विलंब से दंत चिकित्सक पहुंचे. उपाधीक्षक द्वारा बताया गया कि अर्थोपेडिक डाक्टर छुट्टी पर है. उपाधीक्षक ने कहां कि बिना सूचना के गायब डाक्टरों से स्पष्टीकरण पूछा जायेगा. उन्होने कहां कि सिविल सर्जन के आदेशानुसार डाक्टरों का वेतन बायोमैट्रिक के अनुसार मिलेगा. बता दें कि सोमवार और बुधवार को अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड होता है. लेकिन लाभार्थी को हमेशा डाक्टर साहब का इंतजार करना पड़ता है. कभी कभी मरीजों को इंतजार के बाद बैरंग लौटना पड़ जाता है. बता दें कि अस्पताल के सभी ओपीडी खुलने का समय सुबह 8 बजे से है, लेकिन 11 बजे तक भी डाक्टरों का अनुपस्थित रहना, अपने आप में बड़ा सवाल है. अस्पताल में डाक्टरों का गायब रहना कोई नया नही है. विभागीय प्रबंधन के नियमों और रोस्टरों पर नही, अपनी मर्जी से चलता है. कभी आयुष चिकित्सक जेनरल ओपीडी संभालते नजर आते हैं, तो कभी अस्पताल में मौजूद फिजियोथेरेपिस्ट को सामान्य ओपीडी की कमान सौंप दी जाती है. अस्पताल में पदस्थापित शिशु चिकित्सक अक्सर गायब रहते है. डाक्टरों की मनमानी के कारण अस्पताल प्रबंधक से लेकर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. डीएम अंशुल अग्रवाल लगातार स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने को लेकर प्रयासरत है, लेकिन डाक्टरों व अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता से डीएम के प्रयास पर भी पानी फेरती नजर आते है. कारवाई के बजाय मामले सिर्फ स्पष्टीकरण तक ही जाकर सिमट जाते हैं. अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला खुलना सिर्फ रेडियोलाजिस्ट पर निर्भर है. उपाधीक्षक डा गिरीश कुमार सिंह ने कहां कि जानकारी प्राप्त हुआ है कि बुधवार को अस्पताल में कुछ डाक्टर गायब है. सभी पर स्पष्टीकरण किया जा रहा है. जवाब संतोषजनक नहीं रहने पर विभागीय कारवाई भी की जायेगी.
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