ePaper

Buxar News: कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा : साधना शास्त्री

Updated at : 21 May 2025 9:41 PM (IST)
विज्ञापन
Buxar News: कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा : साधना शास्त्री

भगवान ने जब इस सृष्टि की रचना की, तब उन्होंने न केवल जीवों को कर्म करने की स्वतंत्रता दी

विज्ञापन

बक्सर

. बालापुर स्थित पावन स्थल बिजुलिया बाबा में चल रहे सात दिवसीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के छठें मंगलवार को दिन कथा ब्रजधाम वृन्दावन से पधारी कथा वाचिका साधना शास्त्री द्वारा श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से बताया कि कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा गोस्वामी तुलसीदास जी की यह अमर वाणी केवल एक दोहा नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के संचालन का मूल सिद्धांत है.यह संसार कर्म और उसके फल के अटल नियम पर आधारित है.भगवान ने जब इस सृष्टि की रचना की, तब उन्होंने न केवल जीवों को कर्म करने की स्वतंत्रता दी, बल्कि उसके अनुरूप फल भोगने का विधान भी सुनिश्चित कर दिया. यह विधान इतना निष्पक्ष और न्यायसंगत है कि स्वयं ईश्वर को भी इससे मुक्त नहीं किया गया.उनके भी कर्म उनके ही जीवन में फलित हुए.जब भगवान राम ने बाली का वध छिपकर किया था, तब उसी कर्म का फल उन्हें श्रीकृष्ण के अवतार में एक बहेलिए के तीर से मृत्यु के रूप में भुगतना पड़ा.यह ईश्वर द्वारा स्थापित न्याय की सर्वोच्चता का उदाहरण है.इसी प्रकार एक और कथा हमें कर्म की गहराई को समझाती है.जब राजा दशरथ ने अज्ञानवश श्रवण कुमार को मार डाला, तो श्रवण के अंधे माता-पिता ने उन्हें श्राप दिया कि जैसे वे अपने पुत्र वियोग में तड़पकर मरे हैं, वैसे ही दशरथ भी अपने पुत्र राम के वियोग में तड़पते हुए प्राण त्यागेंगे.यह श्राप अक्षरशः सत्य सिद्ध हुआ.दशरथ का अंत पुत्र वियोग की पीड़ा में हुआ. इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि इस संसार में कोई भी कर्मफल के नियम से ऊपर नहीं है.अगर ईश्वर और उनके परिजन भी अपने कर्मों का फल भुगतने से नहीं बच सके, तो हम साधारण मानव तो बिल्कुल नहीं बच सकते. इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने कर्मों के प्रति पूरी तरह सजग और सतर्क रहें.हर सोच, हर निर्णय, हर क्रिया को धर्म, सत्य और विवेक के अनुसार करें, क्योंकि अंततः वही हमारे भविष्य का निर्माण करती है.

अक्सर लोग सोचते हैं कि कुछ गलत करके वे बच सकते हैं, लेकिन कर्म का न्याय समय भले ही ले, पर चूकता नहीं. इसलिए जीवन में सच्चाई, भलाई और धर्म के मार्ग पर चलें.अपने कर्मों को ऐसा बनाएं कि उनका फल न केवल आपके लिए बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कल्याणकारी हो

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
RAVIRANJAN KUMAR SINGH

लेखक के बारे में

By RAVIRANJAN KUMAR SINGH

RAVIRANJAN KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन