सावधान! स्मोकिंग से बढ़ रहा नयी बीमारी का खतरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Dec 2014 1:05 AM (IST)
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बक्सर : स्मोकिंग कई जानलेवा बीमारियों को आमंत्रित करती है. इस बात को अमूमन सभी जानते हैं, लेकिन स्मोकिंग की लत के शिकार इसके लिए कोई न कोई बहाना ढूंढ ही निकालते हैं. लेकिन, स्मोकिंग की वजह से एक नयी बीमारी का खतरा बढ़ गया है, जिसका इलाज दिल्ली स्थित एम्स में भी नहीं है. […]
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बक्सर : स्मोकिंग कई जानलेवा बीमारियों को आमंत्रित करती है. इस बात को अमूमन सभी जानते हैं, लेकिन स्मोकिंग की लत के शिकार इसके लिए कोई न कोई बहाना ढूंढ ही निकालते हैं. लेकिन, स्मोकिंग की वजह से एक नयी बीमारी का खतरा बढ़ गया है, जिसका इलाज दिल्ली स्थित एम्स में भी नहीं है.
दिल्ली स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल के वेसकुलर सर्जन डॉ ऋषि ढिल्लन ने बताया कि बदलते पर्यावरण, खान-पान की बदलती रुचि व धूम्रपान से लोग तेजी से वेसकुलर संबंधित बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. इस बीमारी को बहुत ही घातक बताते हुए उन्होंने कहा कि स्मोकर के शरीर के सभी अंग ठीक रहते हुए भी धमनियां अचानक ब्लॉक हो जाती हैं.
माना जाता है कि ज्यादा स्मोकिंग करने से फेफड़ा व गले में कैंसर हो जाता है. इस नये खतरे के बाद धमनियों में अचानक ब्लॉकेज(अवरूद्ध) होने की शिकायतें बढ़ रही हैं. इस वजह से देश के कुछ ही अस्पतालों में इसका इलाज है. दिल्ली स्थित एम्स में भी इस बीमारी का इलाज नहीं है.
* कितनी घातक है बीमारी
डॉ. ऋषि ढिल्लन ने बताया कि खून में खराबी आने के बाद धमनी-नस में अचानक ब्लॉकेज हो जाते हैं ओर बहुत ही कम समय में वह हिस्सा पहले सफेद फिर पीला और अंत में काला पड़ने लगता है. समय रहते हुए इसका इलाज न किया गया तो मृत्यु हो सकती है. इस बीमारी का लक्षण बहुत ही आम है यदि आपके पैर में अचानक सूजन, चलने में पैर में थकावट होना, पैर के किसी हिस्से का काला पड़ना या धमनियां मोटी हो जाये तो हो सकता है कि यह मामला वेसकुलर बीमारी का हो. यदि इलाज में देरी हुई तो यह बीमारी पूरे शरीर में फैल जाती है और कम समय में ही व्यक्ति की मौत हो सकती है.
* नस में सूई देना खतरनाक
आम तौर पर हम किसी भी झोलाछाप या अप्रशिक्षित मेडिकल एसिसटेंट से नस में सुई दिलवा लेते हैं. लेकिन इस दौरान यदि नवसीखिया ने थोड़ी भी लापरवाही की और उसने नस को पंक्चर कर दिया तो आप सीधे एक बड़े बीमारी के शिकार हो जायेंगे. जिसका इलाज हाई रिस्क और काफी खर्चीला है. सुई से यदि नस फट जाता है और खून का स्राव लगातार होता रहता है और हाथ या कोई भी हिस्सा (जहां सुई दी जा रही हो) वह पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है और हाथ का काम करना बंद हो जाता है.
* कुछ ही शहरों में है इलाज
वेसकुलर सर्जन ने बताया कि इस बीमारी का इलाज देश के कुछ चुनिंदा शहरों में है. चंडीगढ़, दिल्ली, कोलकाता और साउथ इंडिया के कुछ शहरों के अस्पतालों में है. इलाज काफी महंगा होने के कारण अब तक सरकारी अस्पतालों में यह इलाज उपलब्ध नहीं. डॉ ऋषि ढिल्लन ने बताया कि अकेले आर एंड आर आर्मी अस्पताल में हर वर्ष हजार से अधिक मरीजों का ऑपरेशन से इलाज किया जाता है.
* स्थानीय डॉक्टर की राय
डॉ प्रमोद कुमार ने बताया कि इस तरह की बीमारी से बहुत कम लोग वाकिफ हैं. स्थानीय तौर पर इसे हाइ एंटी बायोटिक का डोज देकर इलाज किया जाता है. यदि स्थिति नहीं संभलती तो बाहर रेफर कर दिया जाता है.
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