हत्या के मामले में दो लोगों को आजीवन कारावास
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 May 2019 5:48 AM (IST)
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डेढ़-डेढ़ लाख का लगा जुर्माना छोटे बच्चों के विवाद में लाठी- डंडे से पीटकर की गयी थी हत्या एफटीसी द्वितीय वीरेंद्र सिंह ने सुनाया फैसला बक्सर, कोर्ट : लाठी- डंडे से पीट-पीटकर की गयी हत्या के मामले में संलिप्त दो अभियुक्तों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है. न्यायालय ने दोनों […]
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- डेढ़-डेढ़ लाख का लगा जुर्माना
- छोटे बच्चों के विवाद में लाठी- डंडे से पीटकर की गयी थी हत्या
- एफटीसी द्वितीय वीरेंद्र सिंह ने सुनाया फैसला
बक्सर, कोर्ट : लाठी- डंडे से पीट-पीटकर की गयी हत्या के मामले में संलिप्त दो अभियुक्तों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है. न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों पर डेढ़-डेढ़ लाख का जुर्माना भी लगाया है, जिसकी 80 प्रतिशत राशि मृतक के विधवा को दिया जायेगा. जुर्माने की राशि नहीं देने पर अभियुक्तों को सात वर्ष अतिरिक्त जेल में बिताने होंगे. मंगलवार को खचाखच भरे न्यायालय में एफटीसी 2 के न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने उक्त फैसला सुनाया.
इसके पूर्व बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अभियुक्तों के आचरण के आधार पर कम- से- कम सजा देने की प्रार्थना की. जिसे न्यायालय द्वारा खारिज करते हुए फैसला सुनाया गया. बताते चलें कि विगत 25 अप्रैल को न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को भारतीय दंड विधान की धारा 302/34 के तहत हत्या के मामले में दोषी पाया था. सजा के बिंदु पर 30 अप्रैल को फैसला की तिथि सुनिश्चित की गयी थी.
गौरतलब हो कि बच्चे को शौच कराने के हुए मामूली विवाद को लेकर डुमरांव थाने के नवाडेरा गांव के रहनेवाले जगनारायण गोंड एवं रामगोविंद गोंड ने लाठी- डंडे से पीट-पीटकर अक्षय कुमार गोंड को जख्मी कर दिया था. घायल की इलाज के क्रम में पीएमसीएच में मौत हो गयी थी.
उक्त घटना को लेकर मृतका की पत्नी राधिका देवी ने पुलिस को बताया था कि 8 मार्च, 2009 को जब उसका पति घर में मौजूद था कि दोनों अभियुक्त आ धमके तथा गाली गलौज करते हुए लाठी डंडे से पीट-पीटकर उसके पति को जख्मी कर दिया, जिससे इलाज के क्रम में 16 मई को पीएमसीएच में उसकी मौत हो गयी.
घटना को लेकर डुमरांव थाने में कांड संख्या 86 /2009 दर्ज कराया गया. मृतक ने काफी जख्मी अवस्था में पीएमसीएच में पुलिस को घटना के बारे में सारी बातें बतायी थीं. मरने के पूर्व उसके द्वारा दिये गये बयान को काफी महत्व दिया गया. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाहों की गवाही को दर्ज किया गया.
इसमें उस पुलिस अधिकारी की गवाही भी न्यायालय के समक्ष करायी गयी, जिसने मृतक का पीएमसीएच में इलाज के दौरान बयान दर्ज किया था. वहीं बचाव पक्ष की ओर से मात्र दो गवाहों की गवाही को प्रस्तुत किया गया. दोनों पक्षों को सुनने एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया गया है. बहस में सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक रामकृष्ण चौबे एवं त्रिलोकी मोहन ने हिस्सा लिया.
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