महाशिवरात्रि पर होने वाले शिव तांडव और ध्यान के महासंगम में जुटेंगे हजारों शिवभक्त

महात्मा बुद्ध और तीर्थंकर महावीर की तपोभूमि राजगीर एक बार फिर विराट आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने की तैयारी में जुटी है.
राजगीर. महात्मा बुद्ध और तीर्थंकर महावीर की तपोभूमि राजगीर एक बार फिर विराट आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने की तैयारी में जुटी है. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 15 फरवरी को राजगीर में पहली बार मुक्ताकाश में भव्य महाशिवरात्रि ध्यान उत्सव का आयोजन किया जायेगा. इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देशभर से जुटने वाले हजारों शिवभक्त एक साथ शिव तांडव करेंगे. सामूहिक ध्यान में सहभागी बनेंगे. आयोजन को लेकर दार्शनिक एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक ओशमिन उर्फ राकेश चंद्रा ने बताया कि इस ध्यान उत्सव में 50-75 हजार से लेकर एक लाख तक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है. बिहार के साथ-साथ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से शिवभक्त राजगीर पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि राजगीर की भूमि शाश्वत ऊर्जा से परिपूर्ण है. सनातन ही शाश्वत है, जो सत्य है वही शाश्वत है. ऐसे पवित्र स्थल पर महाशिवरात्रि के अवसर पर इतना विराट आध्यात्मिक आयोजन अपने आप में ऐतिहासिक होगा. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में देशभर से चयनित 100 से अधिक प्रतिष्ठित एवं अनुभवी कलाकार एक साथ शिव तांडव नृत्य की प्रस्तुति देंगे. साधना संगीत के माध्यम से नृत्य, ध्यान और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा. ओशमिन उर्फ राकेश चंद्रा ने दावा किया कि शिव तांडव नृत्य और साधना संगीत से शरीर के विकार बाहर निकलते हैं. यह 90 प्रतिशत तक रोगों से मुक्ति में सहायक सिद्ध होता है. आयोजन के दौरान सामूहिक ध्यान के माध्यम से साधकों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होगी. उन्होंने बताया कि यह पूरा कार्यक्रम लाइव प्रसारित किया जाएगा, जिससे देश-विदेश के लोग इस आध्यात्मिक उत्सव से जुड़ सकेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह महाशिवरात्रि ध्यान उत्सव किसी एक धर्म, जाति या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव चेतना को जागृत करने वाला एक वैश्विक आध्यात्मिक अभियान है. इसका मुख्य उद्देश्य अध्यात्म और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति के भीतर निहित दिव्य ऊर्जा को जागृत करना है. कार्यक्रम में शिव तांडव नृत्य, ध्यान एवं संगीत साधना, शिव सूत्र, विज्ञान भैरव तंत्र पर आधारित साधना, आध्यात्मिक प्रवचन, भव्य महाआरती तथा महाप्रसाद वितरण जैसे आयोजन होंगे. उनका कहना है कि इन आयोजनों के माध्यम से शांति, करुणा, प्रेम और समर्पण की भावना का प्रसार होगा. यह आयोजन न केवल राजगीर, बल्कि पूरे भारतवर्ष को यह संदेश देगा कि भारत की आध्यात्मिक जड़ें आज भी उतनी ही सशक्त और जीवंत है.
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