बिहार में डिजिटल रजिस्ट्री को हरी झंडी, अब पेपरलेस होने जा रही पूरी प्रक्रिया

सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: बिहार में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. राज्य के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री लागू करने के लिए तकनीकी संसाधन विकसित कर लिए हैं. कर्मचारियों को भी ट्रेनिंग दी जा चुकी है और अब सिर्फ आधिकारिक आदेश का इंतजार है.
Bihar News: बिहार सरकार के ‘डिजिटल क्रांति’ के विजन को जमीन पर उतारते हुए रजिस्ट्री ऑफिस ने अपनी कमर कस ली है. राज्य के सभी 141 रजिस्ट्री ऑफिसों में अब पेपरलेस रजिस्ट्री की तैयारियां 100% पूरी हो चुकी हैं. बगहा से लेकर पटना तक, हर जिले के रजिस्ट्री ऑफिस को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से लैस कर दिया गया है.
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा, जिसे अब भारी-भरकम कागजी दस्तावेजों और रजिस्ट्रार ऑफिस की लंबी कतारों से मुक्ति मिलने वाली है. जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री अब न केवल आसान होगी, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित और डिजिटल भी हो जाएगी.
फाइलों के बोझ से मिलेगी आजादी, डिजिटल होगा बिहार
राज्य सरकार के निर्देश पर इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. बगहा निबंधन कार्यालय के सब रजिस्ट्रार अंबुज कुमार कुणाल ने बताया कि कार्यालय में कंप्यूटर, स्कैनर और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसे सभी तकनीकी संसाधन स्थापित कर दिए गए हैं.
डिजिटल सिग्नेचर और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए धोखाधड़ी की गुंजाइश को शून्य कर दिया जाएगा. एक अप्रैल से इस व्यवस्था को लागू करने की प्रारंभिक योजना थी, लेकिन विभागीय स्तर पर अंतिम आधिकारिक आदेश का इंतजार किया जा रहा है. जैसे ही आदेश की कॉपी दफ्तरों तक पहुंचेगी, बिहार में रजिस्ट्री का नया डिजिटल अध्याय शुरू हो जाएगा.
बिचौलियों और अवैध वसूली पर लगेगी लगाम
पेपरलेस रजिस्ट्री लागू होने का एक मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है. नई प्रणाली में पारदर्शिता इतनी अधिक होगी कि क्रेता और विक्रेता को किसी बाहरी व्यक्ति या बिचौलिए की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि निबंधन कार्यालयों के आसपास घूमने वाले और अवैध वसूली करने वाले तत्वों पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
अगर कोई भी बाहरी व्यक्ति रजिस्ट्री के नाम पर अवैध मांग करता पाया गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे किसी के झांसे में न आएं और ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना सीधे संबंधित अधिकारियों को दें.
क्या होगा आम आदमी को फायदा?
डिजिटल रजिस्ट्री शुरू होने से समय की भारी बचत होगी. दस्तावेजों की स्कैनिंग और ऑनलाइन अपलोडिंग की वजह से रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना आसान होगा और भविष्य में ‘सर्टिफाइड कॉपी’ प्राप्त करने के लिए भी महीनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. जमीन के नक्शे और खतियान से जुड़े आंकड़ों का मिलान भी तुरंत हो सकेगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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