बिहार के सरकारी अफसरों को मिला 'पिकनिक' का सरकारी टास्क, हर 3 महीने में परिवार संग घूमना अनिवार्य

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 07 Jun 2026 6:29 PM

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सांकेतिक तस्वीर

Bihar Government New Tourism Rules: बिहार सरकार ने "बिहार दर्शन" पहल के तहत प्रमंडल से लेकर जिला स्तर के सभी अधिकारियों और कर्मियों के लिए हर तीन माह में एक बार सपरिवार पर्यटन स्थलों का दो दिवसीय भ्रमण अनिवार्य कर दिया है. पढ़ें पूरी गाइडलाइन.

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Bihar Government New Tourism Rules(कंचन कुमार): बिहार के प्रशासनिक महकमे से इस वक्त की एक बेहद अनोखी और बड़ी खबर सामने आ रही है. राज्य की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक पटल पर चमकाने और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत फैसला लिया है. सरकार के नए निर्देश के मुताबिक, अब सूबे के सभी सरकारी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को प्रत्येक तीन महीने में कम से कम एक बार अपने गृह जिले को छोड़कर राज्य के किसी अन्य जिले के पर्यटन, ईको-पर्यटन या ग्रामीण पर्यटन स्थलों का दो दिन और दो रात का ‘सपरिवार’ (परिवार के साथ) भ्रमण करना अनिवार्य होगा.

पर्यटन स्थलों पर जाकर सिर्फ घूमना होगा, काम की बात करने पर सख्त पाबंदी

सरकार ने इस अनोखी पहल को लेकर गाइडलाइंस पूरी तरह स्पष्ट कर दी हैं ताकि अधिकारी इसे किसी प्रशासनिक दौरे में तब्दील न कर सकें. पर्यटन प्रवास के दौरान कोई भी बड़ा या छोटा अधिकारी किसी भी प्रकार की समीक्षा बैठक, औचक निरीक्षण या अन्य कोई विभागीय प्रशासनिक कार्य नहीं करेगा. अधिकारियों को अपने प्रवास के दौरान आस-पास के कम से कम तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा करना होगा. वहां घूमकर वे स्थानीय सुविधाओं, पर्यटन की संभावनाओं और वहां आने वाली मुख्य चुनौतियों को बारीकी से समझेंगे.

प्रमंडलीय आयुक्त से लेकर एसपी तक सब निकलेंगे सपरिवार, लौटकर देनी होगी ‘फोटोग्राफ’ वाली रिपोर्ट

इस महा-अभियान में प्रमंडल स्तर से लेकर जिला स्तर तक के सभी आला अधिकारियों को शामिल किया गया है. प्रमंडलीय आयुक्त (Commissioner), आईजी (IG), जिला पदाधिकारी (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) और वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) समेत सभी प्रमंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को अपने पदस्थापन वाले जिले की सीमा से बाहर निकलकर दो दिन का पर्यटन प्रवास करना होगा. इससे विभिन्न क्षेत्रों के पर्यटन स्थलों का प्रत्यक्ष और जमीनी मूल्यांकन संभव हो सकेगा.

भ्रमण का आनंद उठाने के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी. लौटकर सभी अधिकारियों को उस पर्यटन स्थल के सुंदर फोटोग्राफ, वहां की स्थानीय जानकारी, अपना व्यक्तिगत अनुभव और उस जगह के पर्यटन विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझावों के साथ एक विस्तृत प्रतिवेदन (Detailed Report) विभाग में जमा करना होगा. इस रिपोर्ट का संकलन करने के लिए प्रत्येक जिला, प्रमंडल और विभाग में एक विशेष नोडल पदाधिकारी नामित किया जाएगा, जो समेकित रिपोर्ट को पर्यटन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा कला एवं संस्कृति विभाग को सौंपेगा.

अफसरों का घूमना माना जाएगा ‘सरकारी ड्यूटी’, होम-स्टे व्यवस्था को मिलेगा तगड़ा बूस्ट

सरकार ने अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए इस पर्यटन प्रवास की पूरी अवधि को ‘कर्तव्य निर्वहन की अवधि’ (On-Duty) घोषित किया है. यानी घूमने के दौरान अधिकारियों की सैलरी या छुट्टी में कोई कटौती नहीं होगी. इसके लिए जिला प्रशासन को सरकारी गेस्ट हाउस, निजी होटलों और अन्य आवासीय सुविधाओं की समीक्षा कर बेहतर ठहरने और खान-पान की व्यवस्था सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है.

सरकार का मुख्य फोकस पर्यटन और ईको-पर्यटन क्षेत्रों में ‘होम-स्टे’ व्यवस्था को तेजी से विकसित करना है. इसके तहत अधिकारी और आम पर्यटक स्थानीय लोगों के घरों में भुगतान के आधार पर ठहर सकेंगे. इससे जहां एक तरफ पर्यटकों को बिहार की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति, खान-पान और लोक कलाओं का सीधा जीवंत अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों के स्थानीय लोगों की आय (Income) में भी बंपर बढ़ोतरी होगी. सरकार की इस पहल से बिहार का पर्यटन विभाग अब एक नए युग में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है.

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