नालंदा : पैक्स पर बढ़ रहा ब्याज का बोझ, अध्यक्ष ने सरकार से ब्याजमुक्त ऋण की मांग की

राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियां (पैक्स) बैंक ब्याज और कर्ज के बढ़ते बोझ तले दब रही हैं. सीएमआर भुगतान में देरी के कारण कई पैक्सों की स्थिति दयनीय हो गई है. सूढ़ी पैक्स अध्यक्ष ने इस पर सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है.
राज्य के प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) पर बैंक ब्याज और कर्ज का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है. इसके कारण हर वर्ष कई समितियों, प्रबंध समितियों, अध्यक्षों और प्रबंधकों पर प्राथमिकी दर्ज हो रही है और पैक्सों की स्थिति दयनीय होती जा रही है.
पैक्सों की इस बुनियादी समस्या पर राज्य सरकार से ध्यान देने की गुहार लगाई गई है. इस संबंध में इस्लामपुर प्रखंड के सूढ़ी पंचायत पैक्स अध्यक्ष मो. सिकंदर आजम उर्फ बिहारू आलम ने राज्य सरकार से अनुरोध करते हुए कहा है कि सरकार को पैक्सों की ज्वलंत समस्याओं पर गहन विचार करना चाहिए.
सीएमआर भुगतान में देरी से बढ़ता है बैंक का ब्याज
सूढ़ी पैक्स अध्यक्ष ने बताया कि राज्य सरकार के नियमानुसार पैक्सों को धान/गेहूं अधिप्राप्ति के उपरांत 48 घंटे के अंदर किसानों के बैंक खाते में राशि का भुगतान करने का प्रावधान है, जिसका पालन पैक्स कमेटियों द्वारा किया जा रहा है.
हालांकि, धान की कुटाई कराकर पैक्स द्वारा सीएमआर (कस्टम मिलिंग राइस) चावल राज्य खाद्य निगम (BSFC) को सौंप दिए जाने के बाद भी कई महीनों (लगभग 90 दिनों) तक सीएमआर की राशि पैक्सों के खाते में नहीं भेजी जाती है.
इसके कारण बैंक से लिया गया ऋण का ब्याज, पैक्सों को प्राप्त होने वाले कमीशन और अन्य मदों की राशि से कहीं अधिक हो जाता है, जिसकी भरपाई करना पैक्सों के लिए किसी भी स्थिति में संभव नहीं है.
डिफॉल्टर होने से किसानों को भी उठानी पड़ती है परेशानी
भुगतान न होने की स्थिति में बैंक, पैक्स के अध्यक्ष और प्रबंध समिति पर डिफॉल्टर का मुकदमा दर्ज कर अपने ब्याज की राशि वसूल करने में लग जाते हैं और समिति को ब्लैकलिस्ट कर देते हैं.
समिति के डिफॉल्टर होने से क्षेत्र के किसानों को अपना धान बेचने के लिए दूसरे पैक्सों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उन्हें भाड़ा और अन्य मदों में अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है.
15 साल पुरानी दरों पर काम करने को मजबूर हैं पैक्स
उन्होंने कहा कि विगत 15 वर्षों में ट्रक भाड़ा, हमाली (मजदूरी), कुटाई और अन्य खर्चों में कई गुना वृद्धि हो चुकी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा पैक्सों को वर्ष 2010-11 की पुरानी दरों पर ही भुगतान किया जा रहा है. अन्य राज्यों में नई दरों के आधार पर पैक्सों को मिलिंग दर का भुगतान किया जा रहा है.
संस्थाओं के बीच विभागीय समन्वय की कमी और उदासीन रवैये के कारण सहकारी संस्थाएं आर्थिक संकट में फंसती जा रही हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर कृषि उपज और किसानों के आर्थिक लाभ पर पड़ रहा है.
सूढ़ी पैक्स अध्यक्ष ने सरकार के समक्ष रखीं ये प्रमुख मांगे:
- ब्याजमुक्त ऋण: राज्य सरकार पैक्स कमेटियों को धान अधिप्राप्ति के लिए पूरी तरह से ब्याजमुक्त राशि (ऋण) आवंटित करे.
- त्वरित भुगतान: सीएमआर चावल बिहार राज्य खाद्य निगम के गोदाम में जमा होने के 48 घंटे के अंदर राशि सीधे संबंधित पैक्स के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाए.
- ब्याज की भरपाई: यदि भुगतान में दो माह से अधिक का समय लगता है, तो बैंक के ब्याज का भुगतान बिल के साथ जोड़कर सरकार द्वारा किया जाए.
- दरों में संशोधन: पिछले 15 वर्षों से चल रही पुरानी दरों को बदलकर वर्तमान महंगाई के अनुसार परिवहन एवं कुटाई की नई दरें लागू की जाएं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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