बिहार में जमीन विवाद पर लगेगा ब्रेक, इन 5 जिलों की हुई समीक्षा, मंत्री दिलीप जायसवाल ने लापरवाह अधिकारियों को चेताया

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जमीन सर्वे (सांकेतिक तस्वीर)

Bihar Land Survey: बिहार में जमीन से जुड़े विवाद को खत्म करने के लिए विशेष भूमि सर्वे किया जा रहा है. इसके लिए मुख्य रूप से 5 जिलों की समीक्षा की गई. 15 अगस्त तक सर्वे का काम पूरा करने का टारगेट सेट किया गया है. इसे लेकर अधिकारियों को चेतावनी भी दी गई है.

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Bihar Land Survey: बिहार के गांवों में जमीन से जुड़े विवादों को कम करने की दिशा में चल रहा विशेष भूमि सर्वे अब तेजी पकड़ रहा है. सरकार का मानना है कि सर्वे पूरा होने के बाद जमीन के रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होंगे. इससे न सिर्फ जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि वर्षों से चले आ रहे विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है.

इन 5 जिलों को लेकर की समीक्षा

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने क्षेत्रफल (Area) के लिहाज से राज्य के पांच छोटे जिलों जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर, अरवल और शेखपुरा में चल रहे विशेष सर्वेक्षण कार्यों की समीक्षा की. सरकार ने इन जिलों में 15 अगस्त तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए कर्मचारियों को दूसरे अभियानों से मुक्त रखा गया है.

अधिकारियों को दी गई चेतावनी

मंत्री ने कहा कि जमीन विवाद के कारण बड़ी संख्या में मामले थानों तक पहुंचते हैं. ऐसे में सर्वे पूरा होने के बाद ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. समीक्षा के दौरान कुछ मौजों के जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी.

अब सर्वे से जुड़े रिकॉर्ड को पोर्टल पर तत्काल अपलोड करने और सुरक्षित रखने के लिए लेवल-7 के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी. इसके बाद पूरे काम की दोबारा 10 दिन बाद समीक्षा होगी.

जमीन सर्वे से जुड़ी जरूरी बातें

  1. बंटवारा नहीं हुआ तो भी सर्वे जारी रहेगा

परिवार में जमीन का आपसी बंटवारा नहीं हुआ है तो भी सर्वे नहीं रुकेगा. ऐसी स्थिति में जमीन रिकॉर्ड में उसी पूर्वज के नाम पर दर्ज रहेगी, जिसके नाम पर वह पहले से दर्ज है.

  1. चार फेज में पूरा होता है सर्वे

जमीन सर्वे की प्रक्रिया चार प्रमुख फेज में होती है, किस्तवार, खानापुरी, सुनवाई और लगान बंदोबस्ती. पहले गांव की सीमा और नक्शा तैयार किया जाता है. इसके बाद जमीन के मालिक की पहचान कर कच्चा खतियान तैयार होता है. रैयतों को नक्शा और दस्तावेज उपलब्ध कराकर आपत्तियां मांगी जाती हैं. जांच के बाद अंतिम खतियान प्रकाशित किया जाता है.

  1. पुराने खतियान भी बड़ी चुनौती

राज्य के करीब 45 हजार गांवों में लगभग 8 हजार गांवों के पुराने कैडेस्ट्रल खतियान उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में रैयतों से स्वघोषणा के माध्यम से जमीन का विवरण लिया जा रहा है. जमीन की जानकारी ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा करने की सुविधा भी है.

  1. 90 साल बाद हो रहा जमीन सर्वे

बिहार में करीब 90 साल बाद व्यापक स्तर पर भूमि सर्वे कराया जा रहा है. पहले फेज में यह काम 2019 से शुरू हुआ था. इसकी समयसीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है. अब पूरे राज्य में सर्वे पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2027 रखा गया है. बिहार में करीब 1.82 करोड़ रैयत हैं. सरकार को उम्मीद है कि सर्वे के बाद जमीन के रिकॉर्ड आधुनिक और पारदर्शी होंगे. इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी.

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प्रीति दयाल

लेखक के बारे में

By प्रीति दयाल

प्रीति दयाल, बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं.

प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा.

पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

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प्रीति दयाल का उद्देश्य डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लगातार सीखते हुए अपनी पत्रकारिता कौशल को और बेहतर बनाना और पाठकों तक विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है.

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