बिहार के 2 हजार से ज्यादा मुखिया जांच के घेरे में, 12 पर बर्खास्तगी की तलवार, जानिए क्या है पूरा मामला
AI जनरेटेड तस्वीर
Bihar Mukhiya News: बिहार की ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं में अनियमितता के आरोपों ने हलचल बढ़ा दी है. 2 हजार से ज्यादा मुखिया जांच के दायरे में हैं, जबकि 12 मुखियाओं पर बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू हो गई है.
Bihar Mukhiya News: (पटना से सबिता की रिपोर्ट) बिहार की ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं. मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना, नल-गली, नल-जल और स्वच्छता योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं.
प्रमंडलीय आयुक्तों के स्तर से कराई गई जांच में कई पंचायतों में नियमों की अनदेखी और सरकारी राशि के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं. इसके बाद 2,000 से अधिक मुखिया पंचायती राज विभाग की जांच के दायरे में आ गए हैं.
वहीं, गंभीर अनियमितताओं के आरोप में 12 मुखियाओं को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इनके खिलाफ विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है.
सोलर लाइट योजना में सामने आईं गंभीर गड़बड़ियां
जांच के दौरान कई पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं. आरोप है कि निर्धारित मानकों के विपरीत घटिया सोलर लाइट, बैटरी और पोल लगाए गए.
कई स्थानों पर ये उपकरण कुछ ही सप्ताह में खराब हो गए. जांच में सोलर लाइट की खरीद और उसके नाम पर किए गए भुगतान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. वार्ड सदस्यों और ग्रामीणों को योजनाओं से जुड़ी जानकारी नहीं देने के आरोप भी सामने आए हैं.
एस्टीमेट और मेजरमेंट बुक तक नहीं मिली
जांच में कई पंचायतों में योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों की अनुपलब्धता भी सामने आई. इनमें एस्टीमेट, मेजरमेंट बुक (MB) और अन्य आवश्यक अभिलेख शामिल हैं.
आरोप है कि कुछ मामलों में काम पूरा हुए बिना ही सरकारी राशि की निकासी कर ली गई. वहीं, कुछ योजनाओं में कागजों पर काम पूरा दिखाकर भुगतान लेने की बात भी जांच में सामने आई है.
बिना ग्राम सभा के खर्च हुई राशि
पंचायतों में ग्राम सभा की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं. जांच में आरोप सामने आया कि कुछ स्थानों पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना योजनाओं के लिए राशि खर्च कर दी गई. वार्ड सदस्यों को आवश्यक सूचनाएं नहीं दी गईं. बैठकों से लगातार अनुपस्थित रहने और ग्राम सभा नहीं कराने जैसे मामले भी जांच के दायरे में आए हैं.
समस्तीपुर में ललिता देवी पर कार्रवाई की सिफारिश
समस्तीपुर जिला प्रशासन ने मुखिया ललिता देवी को पद से हटाने की सिफारिश की है. समस्तीपुर के डीएम रोशन कुशवाहा ने लोक प्रहरी-सह-प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र भेजा है. पत्र में बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया गया है.
12 मुखियाओं पर बर्खास्तगी की कार्रवाई
गंभीर अनियमितताओं, बैठकों से लगातार अनुपस्थित रहने और ग्राम सभा नहीं कराने जैसे आरोपों में 12 मुखियाओं के खिलाफ पदमुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है. इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का संचालन विभागीय स्तर पर किया जा रहा है.
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इन 12 मुखियाओं पर कार्रवाई शुरू
- इम्तियाज अंसारी- काजीपुर सिमरी, बक्सर
- दीपनारायण सिंह- पहरी सिमरी, बक्सर
- बटोरन कुमार- डोमा, बख्तियारपुर, पटना
- अजय कुमार- बरिसवन, शाहपुर, भोजपुर
- शिवशंकर सिंह- रामपुर डीह, हनुमान नगर, दरभंगा
- रमेश मांझी- श्रीपुर गाहर पश्चिमी, खानपुर, समस्तीपुर
- मोहम्मद नदीमुर रहमान- ठिकही, कटरा, मुजफ्फरपुर
- किरण बाला - अखलासपुर, कैमूर
- अखिलेश रजक- भीखनपुरा, देसरी, वैशाली
- रामानंद सिंह- पिंजौरा, जहानाबाद
- अंजली कुमारी- सहाजितपुर, सारण
- आजाद शाह- मोकरमपुर, मधुबनी
दोषी मिले तो पांच साल तक चुनाव लड़ने पर रोक
पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विकास योजना में सरकारी राशि के दुरुपयोग को गंभीरता से लिया जाएगा.
जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित जनप्रतिनिधियों को पद से हटाया जा सकता है. साथ ही पांच साल तक पंचायत चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
इसके अलावा सरकारी राशि के गबन की पुष्टि होने पर संबंधित रकम की वसूली भी की जाएगी. विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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By अभिनंदन पांडेय
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