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लखपति दीदी बनाने में बिहार देश में दूसरे नंबर पर, जानें कितनी महिलाओं को मिला लाभ

Updated at : 04 Dec 2024 7:47 PM (IST)
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लखपति दीदी बनाने में बिहार देश में दूसरे नंबर पर, जानें कितनी महिलाओं को मिला लाभ

Bihar: केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण गरीबी को कम करने के लिए चलाए जा रहे लखपति दीदी योजना में बिहार सबसे आगे की पंक्ति में खड़ा है.

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आंध्र प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल लखपति दीदी बनाने में अग्रणी तीन बड़े राज्य हैं, जबकि देश भर में ऐसी कुल 1,15,00,274 महिलाएं हैं. ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने मंगलवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि आंध्र प्रदेश में 14,87,631, बिहार में 13,47,649 और पश्चिम बंगाल में 11,81,852 लखपति दीदी हैं.

किन राज्यों में कितनी लखपति दीदी

मध्य प्रदेश में 10,51,069, महाराष्ट्र में 10,04,338, उत्तर प्रदेश में 8,41,923, तेलंगाना में 7,58,693, गुजरात में 5,38,760, ओडिशा में 5,37,350, झारखंड में 3,51,808, तमिलनाडु में 3,18,101, केरल में 2,84,616 लखपति दीदियां हैं. वहीं राजस्थान 2,70, 405 और कर्नाटक 2,36,315 लखपति दीदियां हैं. उत्तरी राज्यों पंजाब और हरियाणा में लखपति दीदियों की संख्या कम है, जो क्रमशः 31,700 और 62,743 है.

नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 503 ड्रोन उपलब्ध कराए गए 

कोटा श्रीनिवास पुजारी और चामला किरण कुमार रेड्डी के सवालों का जवाब देते हुए राज्यमंत्री ने कहा कि नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 3 दिसंबर तक 503 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं. सबसे अधिक 97 ड्रोन आंध्र प्रदेश में दिए गए, इसके बाद कर्नाटक में 84, तेलंगाना में 72, मध्य प्रदेश में 34, उत्तर प्रदेश में 32, महाराष्ट्र में 30, पंजाब में 23 और हरियाणा में 22 ड्रोन दिए गए. राज्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित योजना दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत अक्टूबर 2024 तक 10.05 करोड़ महिलाओं को 90.87 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया गया है. 

योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबी को कम करना 

मंत्री ने सवाल का जवाब देते हुए बताया कि इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबी को कम करना है. इसके लिए ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित किया जाएगा और उन्हें तब तक लगातार सहायता और पोषण दिया जाएगा, जब तक कि समय के साथ उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हो जाती, उनके जीवन स्तर में सुधार नहीं आ जाता और वे घोर गरीबी से बाहर नहीं निकल आते. लखपति दीदी पहल डीएवाई-एनआरएलएम के परिणामों में से एक है. 

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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