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बिहार चुनाव 2020 : भाजपा के परशुराम से सियासी जंग हार गये पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय!, बक्सर सीट पर बदला सियासी गणित

Updated at : 10 Oct 2020 7:26 PM (IST)
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बिहार चुनाव 2020 : भाजपा के परशुराम से सियासी जंग हार गये पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय!, बक्सर सीट पर बदला सियासी गणित

Patna: Former DGP Gupteshwar Pandey after joining JD(U), in Patna, Sunday, Sept. 27, 2020. (PTI Photo)(PTI27-09-2020_000157A)

BJP Candidate from Buxar Assembly Constitue बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हर बार की तरह इस बार भी बड़े-छोटे सभी सियासी दलों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर जोरदार गहमागहमी देखने को मिली. कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर अंत तक उथल-पुथल दिखाई दी. इसी कड़ी में बक्सर विधानसभा सीट भी खासा सुर्खियों में बना रहा. आखिर में बक्सर सीट पर भाजपा ने अपने उम्मीदवार का एलान किया और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता तथा इलाके में अच्छी पैठ रखने वाले परशुराम चतुर्वेदी को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की. इसके साथ ही पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के बिहार चुनाव में उम्मीदवार बनने की संभावनाएं खत्म हो गयी.

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बक्सर : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हर बार की तरह इस बार भी बड़े-छोटे सभी सियासी दलों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर जोरदार गहमागहमी देखने को मिली. कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर अंत तक उथल-पुथल दिखाई दी. इसी कड़ी में बक्सर विधानसभा सीट भी खासा सुर्खियों में बना रहा. आखिर में बक्सर सीट पर भाजपा ने अपने उम्मीदवार का एलान किया और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता तथा इलाके में अच्छी पैठ रखने वाले परशुराम चतुर्वेदी को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की. इसके साथ ही पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के बिहार चुनाव में उम्मीदवार बनने की संभावनाएं खत्म हो गयी.

1987 बैच के IPS अधिकारी और बिहार के डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय ने चुनावों से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृति (VRS) ले लिया था. उनके इस कदम को बिहार चुनाव से जोड़कर देखा जाने लगा. इस बात की चर्चा पकड़ने लगी कि गुप्तेश्वर पांडेय ने चुनाव लड़ने के लिए ही ऐसा किया है. बाद में उन्होंने जदयू की सदस्यता भी ले ली. जिसके बाद सियासी गलियारों में चर्चा गरम रही कि गुप्तेश्वर पांडेय बक्सर या ब्रह्मपुर से लड़ेंगे. लेकिन, ये दोनों सीटें बीजेपी के खाते में चली गयी. जबकि, गुप्तेश्वर पांडेय ने जदयू की सदस्यता ग्रहण की थी. चर्चा यह भी कि वे बीजेपी के टिकट पर इन सीटों में से किसी एक से चुनाव लड़ सकते हैं.

परशुराम चतुर्वेदी बिहार पुलिस में पूर्व हवलदार रहे हैं और सीआईडी समेत कई विभागों में वे अपनी सेवा दे चुके है. बक्सर क्षेत्र में पार्टी के लिए वे कई वर्षों से काम कर रहे थे. गुप्तेश्वर पांडेय के राजनीतिक में कदम रखने के बाद से बक्सर विधानसभा सीट पर बने सस्पेंस के बीच पुलिस की नौकरी में हवलदार के पद पर रहे किसान नेता परशुराम चतुर्वेदी को इस सीट से बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बनाने का एलान कर दिया.

बक्सर विधानसभा सीट परंपरागत तौर पर बीजेपी की रही है. हालांकि, 2015 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इसी सीट पर जीत दर्ज की थी. वहीं इस बार एनडीए के सीट शेयरिंग फॉर्मूल के तहत बक्सर सीट बीजेपी के कोटे में चली गयी और पार्टी ने परशुराम चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया. ऐसे में बक्सर की पिच को सियासी तौर पर तैयार करने में जुटे गुप्तेश्वर पांडेय पर बीजेपी के हवलदार रहे परशुराम जेडीयू भारी पड़ गए और पूरा सियासी समीकरण बदल गया.

गौर हो कि जदयू ने अपने 115 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है और उसमें भी किसी भी सीट पर गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट नहीं दिया है. साफ है कि गुप्तेश्वर पांडेय इस बार बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. उल्लेखनीय है कि बिहार चुनाव 2020 के लिए सीट बंटवारे के मुताबिक बीजेपी के हिस्से में 121 और जेडीयू के पाले में 122 सीटें आयी है. वहीं, बीजेपी ने अपने खाते से 11 सीटें वीआईपी को दी है, जबकि नीतीश कुमार ने अपने हिस्से से सात सीटें जीतनराम मांझी की पार्टी हम को दी है.

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