आधे गांवों में भी बीज योजना नहीं

Published at :17 Feb 2017 12:52 AM (IST)
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आधे गांवों में भी बीज योजना नहीं

उपेक्षा. किसानों को नहीं मिल रहा उन्नत बीज, कैसे बढ़ेगा फसल उत्पादन आरा : केंद्र सरकार द्वारा किसानों व कृषि के हित में तथा अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत बीजों के विस्तार को लेकर बीज ग्राम योजना चलायी जा रही है. लेकिन, भोजपुर में हालात यह है कि बीज तो हवा […]

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उपेक्षा. किसानों को नहीं मिल रहा उन्नत बीज, कैसे बढ़ेगा फसल उत्पादन

आरा : केंद्र सरकार द्वारा किसानों व कृषि के हित में तथा अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत बीजों के विस्तार को लेकर बीज ग्राम योजना चलायी जा रही है. लेकिन, भोजपुर में हालात यह है कि बीज तो हवा में ही रह गया, ग्राम धरती पर ही है. जिले में बीज ग्राम की स्थिति योजना के अनुरूप साकार नहीं हो पायी. इससे जिले में सरकार की योजना नाकामी का शिकार होकर रह गयी. योजना नाकाम होने से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना से किसानों को कोई लाभ नहीं हो पाया. उन्नत बीज उत्पादित करने का सपना, सपना ही बन कर रह गया. देश के अन्नदाता किसान आज कृषि कार्य में उन्नत बीज के नहीं होने के कारण काफी पिछड़ते जा रहे हैं.
सरकार की योजनाएं तो बनती हैं, पर बेचारे किसानों तक पहुंच नहीं पाती. सरकार की योजना थी कि सभी प्रखंडों में दो गांव का चुनाव किया जाये और वहां के किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराया जाये, ताकि उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके और किसानों की माली हालत में सुधार आये तथा देश का अन्न उत्पादन दर में वृद्धि हो, पर लालफीताशाही का आलम यह है कि रबी फसल कटने को हैं, पर कुछ प्रखंडों में बीज ग्राम का चुनाव तो किया गया. वहीं कई प्रखंडों में बीज ग्राम का चुनाव तक नहीं किया गया. इससे जिले के किसान काफी परेशान हैं. इतना ही नहीं, बहुसंख्य किसानों को तो इस योजना की जानकारी भी नहीं है. यह सरकारी स्तर पर लापरवाही का ही परिणाम है. किसान की योजना और उसी को जानकारी तक भी नहीं दी जाती है.
सभी प्रखंडों में नहीं हुआ बीज ग्राम का चुनाव : जिले के सभी प्रखंडों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बीज ग्राम योजना का चुनाव नहीं किया गया है. जिले के कुल 14 प्रखंडों में से महज आठ प्रखंडों में ही इस योजना के तहत गांवों का चुनाव किया गया.
छह प्रखंडों के किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह गये.
इससे इन प्रखंडों के किसानों की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है. जिन प्रखंडों में बीज ग्राम का चुनाव हुआ है, वहां भी योजना के अनुसार पूरी मात्रा में बीज की आपूर्ति नहीं की गयी है.
क्या है योजना
केंद्रीय सब मिशन ऑन सीड एंड प्लांटिंग मटेरियल योजना के तहत हर प्रखंड में दो बीज ग्राम का चुनाव करना था. गेहूं एवं चना के बीज ग्राम में 100 किसानों का चयन करना था. वहीं, मसूर, राई व सरसों के बीज ग्राम में 50 किसानों का चयन करना था. रबी फसल के लिए बीज ग्राम कार्यक्रम योजना के तहत एक एकड़ जमीन में बीज लगाया जाना था. गेहूं के लिए 40 किलोग्राम, चना के लिए 32 किलोग्राम, मसूर के लिए 16 किलोग्राम तथा राई व सरसों के लिए दो किलोग्राम बीज किसानों को देना था. योजना के तहत गेहूं के लिए 17 रुपये प्रति किलोग्राम, चना व मसूर के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम तथा राई व सरसों के लिए 54 रुपये प्रति किलोग्राम सब्सिडी के रूप में किसानों को दिया जाना है.
क्या था उद्देश्य
योजना का लक्ष्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देना व गुणवत्तायुक्त बीज गांव स्तर तक उपलब्ध करने के लिए बीज ग्राम योजना की स्थापना करनी थी.
इन प्रखंडों में हुआ बीज ग्राम का चुनाव
बीज ग्राम के लिए जिले के आरा, बिहिया, उदवंतनगर, पीरो, जगदीशपुर, शाहपुर, बड़हरा तथा सहार. इन प्रखंडों में हालांकि जितने गांव का चुनाव करना था, उससे अधिक गांवों का चुनाव किया गया है. इस कारण इन प्रखंडों के किसानों को अनुपात से ज्यादा लाभ हुआ, जो तर्क संगत नहीं है.
क्या कहते हैं किसान
बीज ग्राम योजना के तहत काफी कम किसानों का चुनाव किया गया. इससे इस योजना का लाभ किसानों को पूरी तरह से नहीं मिल पाया. विभाग ने किसानों की काफी उपेक्षा की.
रूद्रधर तिवारी, बरजा, शाहपुर
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हमलोगों को कोई लाभ नहीं मिला, जबकि मैं बरजा पंचायत का मुखिया हूं, पर मुझे इसकी जानकारी तक नहीं हुई. विभाग द्वारा योजनाओं का प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता है.
द्वारिका तिवारी, बरजा, शाहपुर
किसानों की योजनाओं को सही ढंग से लागू नहीं किया जाता है. केवल कागजों में ही योजनाएं अधिकतर चलती हैं. धरातल पर हमलोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है. इससे किसानों की हालत दयनीय रहती है.
एकराम राम, डुमरिया, कोइलवर
बीज ग्राम योजना के तहत काफी कम किसानों का चयन किया गया है. इस योजना का कोई मायने नहीं रह जाता है. इसके तहत जो भी बीज दिया जाता है, वह स्तरीय नहीं होता है.
रामदेव राय, कोइलवर
उन्नत किस्म का बीज मिलता, तो उत्पादन में काफी बढ़ोतरी होती तथा हमलोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता, पर ऐसा नहीं होता है. प्रशासन का रवैया किसानों के रूप में ठीक नहीं है.
सुदर्शन प्रसाद, कोइलवर
क्या कहते हैं अधिकारी
योजना के तहत आठ प्रखंडों में बीज ग्राम का चुनाव किया गया है तथा इसके तहत काफी संख्या में किसानों को बीज उपलब्ध कराया गया है. विभाग का प्रयास था कि सभी प्रखंडों में बीज ग्राम का चुनाव किया जाये, पर कुछ तकनीकी कारणों से ऐसा संभव नहीं हो पाया.
संजय नाथ तिवारी, डीएओ
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