एक कमरे में चलता है विद्यालय
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Jul 2017 4:38 AM (IST)
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कुव्यवस्था . छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा विपरीत असर सहार : सरकार व न्यायालय ने प्राथमिक शिक्षा को सभी के लिए अनिवार्य बनाया है तथा शिक्षा के अधिकार के तहत लोगों को यह अधिकार प्रदान किया है. हालांकि जिले में सरकार के प्रयास का प्रतिफल संतोषप्रद नहीं है. राष्ट्रीय औसत से जिले की शिक्षा […]
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कुव्यवस्था . छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा विपरीत असर
सहार : सरकार व न्यायालय ने प्राथमिक शिक्षा को सभी के लिए अनिवार्य बनाया है तथा शिक्षा के अधिकार के तहत लोगों को यह अधिकार प्रदान किया है. हालांकि जिले में सरकार के प्रयास का प्रतिफल संतोषप्रद नहीं है. राष्ट्रीय औसत से जिले की शिक्षा का औसत काफी कम है. हालांकि सरकार ने शिक्षा में सुधार के लिए काफी प्रयास किया है. वहीं विद्यालयों में संसाधनों के लिए काफी राशि खर्च की गयी है, पर प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण शिक्षा के स्तर में सुधार होने के बजाय प्रारंभिक शिक्षा की स्थिति और दयनीय होती जा रही है. एक तरफ प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को संसाधनों की कमी की मार झेलनी पड़ रही है,
वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों की मनमानी के कारण सही शिक्षा प्राप्त नहीं हो रही है. इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है. प्राथमिक स्तर पर पढ़ाई की स्थिति ठीक नहीं होगी, तो बच्चे उच्चतर स्तर पर शिक्षा कैसे प्राप्त कर पायेंगे. यह सरकार और शिक्षा विभाग ही बता सकते हैं. प्रखंड क्षेत्र के राजदेव नगर प्राथमिक विद्यालय की स्थिति काफी दयनीय है. महादलित बच्चों के लिए चलाये जा रहे इस विद्यालय को विद्यालय कहना ही मुनासिब नहीं होगा.
एक कमरे में ही एक प्राथमिक विद्यालय का संचालन शिक्षा विभाग के लिए पहेली जैसा है. यही हालात प्राथमिक विद्यालय, राजदेवनगर तथा प्राथमिक विद्यालय, बढईया टोला की है. एक कमरा तथा एक बरामदा में एक प्राथमिक विद्यालय चलाया जा रहा है. इसी में मध्याह्न भोजन का अनाज तथा शिक्षकों के लिए कार्यालय का भी काम होता है. प्राथमिक विद्यालय, राजदेवनगर में 150 बच्चों का नामांकन है, पर उपस्थिति काफी कम रहती है. जबकि विद्यालय में पांच शिक्षक पदस्थापित हैं. विद्यालय में महज एक शिक्षक ही उपस्थित थे. शिक्षा से छल कार्यक्रम के तहत प्रभात खबर की टीम जब विद्यालय पहुंची, तो सरकार के दावे की पोल खोलते कई तथ्य उजागर हुए.
एक कमरे में चलता है विद्यालय : प्राथमिक विद्यालय, राजदेवनगर तथा प्राथमिक विद्यालय, बढ़ईया टोला अलग- अलग एक कमरे तथा एक बरामदे में चलाया जाता है. एक ही कमरे में पढ़ाई भी होती है तथा मध्याह्न भोजन का अनाज भी रखा जाता है. इतना ही नहीं उसी कमरे में शिक्षकों का कार्यालय भी चलता है. इस हालात में पढ़ाई की स्थिति क्या होगी. इसे सहज ही समझा जा सकता है. जबकि सरकार शिक्षा में सुधार के लिए बार- बार प्रयास की बात करती है तथा संसाधनों के लिए प्रयास करती है.
150 छात्रों पर है पांच शिक्षक : महादलित टोले के बच्चों की पढ़ाई के लिए प्राथमिक विद्यालय राजदेव नगर में पांच शिक्षक पदस्थापित हैं. जबकि 150 छात्रों का नामांकन है. सरकार के छात्र शिक्षक के अनुसार विद्यालय में पदस्थापित शिक्षकों की संख्या अधिक है. सरकार के अनुसार 40 छात्र पर एक शिक्षक का है. इसके अनुसार एक शिक्षक का पदस्थापन अधिक है. इसके बावजूद पढ़ाई की स्थिति दयनीय है. वहीं प्राथमिक विद्यालय, बढ़ईया टोला में भी महज 57 छात्रों पर तीन शिक्षकों का पदस्थापन है, जो सरकारी अनुपात से अधिक है.
छात्रों की उपस्थिति थी बहुत कम : प्रभात खबर की टीम शिक्षा से छल कार्यक्रम के तहत विद्यालय पहुंची तो छात्रों की उपस्थिति नगण्य थी. 150 छात्रों में महज छह छात्र ही उपस्थित थे. जबकि सरकार ने शिक्षकों को आदेश दिया है कि हर हाल में सभी छात्रों को विद्यालय लाया जाये पर इस विद्यालय में यह स्थिति नहीं बन पा रही है. छात्र विद्यालय में नहीं पहुंच रहे हैं. इससे उनके भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है. जबकि प्राथमिक विद्यालय, बढ़ईया टोला में 57 छात्रों का नामांकन है, पर विद्यालय में महज 15 छात्र ही उपस्थित थे.
विद्यालय में नहीं है शौचालय : प्राथमिक विद्यालय, राजदेवनगर तथा प्राथमिक विद्यालय बढ़ईया टोला में शौचालय नहीं है. बच्चे इस कार्य के लिए बाहर जाते है. जबकि सरकार खुले में शौचमुक्त के लिए अभियान चला रही है. सरकार की यह महत्वकांक्षी योजना है. इतना ही नहीं उच्चतम न्यायालय ने भी वर्षों पूर्व आदेश दिया है कि हर विद्यालय में छात्रों के लिए शौचालय बनाया जाये, पर सरकार की उदासीनता तथा प्रशासन की लापरवाही से विद्यालय के बच्चों को शौचालय की सुविधा नहीं मिल पा रही है तथा सरकार की खुले में शौच की योजना विफल साबित हो रही है.
जमीन पर बैठ कर पढ़ते हैं छात्र : विद्यालय में बेंच नहीं है. जबकि सरकार द्वारा संसाधनों पर लाखों खर्च किये जा रहे हैं. मजबूरी में छात्रों को जमीन पर बैठ कर ही पढ़ाई करनी पड़ रही है. इससे उनकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है. जबकि विभागीय पदाधिकारियों तथा प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा विद्यालय का निरीक्षण नहीं किया जाता है तथा विद्यालय में संसाधनों की कमी को दूर नहीं किया जाता है. विद्यालय के बच्चे पढ़ने के बजाय खेलने में मशगूल थे. वहीं शिक्षक बात करने में मशगूल थे.
शिक्षकों की उपस्थिति थी काफी कम
प्राथमिक विद्यालय, राजदेवनगर में पांच शिक्षकों का पदस्थापन है, जबकि प्रभात खबर की टीम पहुंची तो महज एक शिक्षक रेहाना बानो उपस्थित थी, जबकि दो शिक्षिका अवकाश पर थे. शिक्षक योगेंद्र कुमार के संबंध में जानकारी मिली कि विद्यालय के कार्य से बीआरसी गये हैं, और प्रधानाध्यापिका अर्चना कुमारी के संबंध में जानकारी दी गयी कि आरा से आनेवाली है. वहीं प्राथमिक विद्यालय, बढ़ईया टोला में तीन शिक्षकों का पदस्थापन है, पर प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार ही उपस्थित थे. बाकी शिक्षक बिना सूचना के गायब थे. जब विद्यालय में बैठने की व्यवस्था नहीं है तो मध्याह्न भोजन की उचित जांच कर कदम क्यों नहीं उठाया गया. यह जांच का विषय है तथा यह प्रशासन की उदासीनता का परिणाम है.
क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक
विद्यालय भवन विहीन है. दो शिक्षिका बराबर बिना सूचना के गायब रहती हैं. इससे व्यवस्था संभालने में कठिनाई होती है. वहीं छात्रों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता है.
मुकेश कुमार,प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, बढ़ईया टोला.
दोनों विद्यालयों की जांच की जायेगी. विद्यालय में कुछ गड़बड़ी है तो उसके
लिए संबंधित प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की जायेगी.
योगेंद्र कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी
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