bhagalpur news.1946 में जयप्रकाश नारायण ने भागलपुर से अंग्रेजों को दी थी चेतावनी

Published by : ATUL KUMAR Updated At : 11 Oct 2025 12:40 AM

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जेल से अपने रिहाई के बाद अप्रैल-मई 1946 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पूरे बिहार का दौरा शुरू किया

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जेल से अपने रिहाई के बाद अप्रैल-मई 1946 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पूरे बिहार का दौरा शुरू किया. उस समय तक उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर थी. वह एक प्रखर वक्ता के रूप में स्थापित हो चुके थे. उनकी हर सभा में लाखों की अपार भीड़ उन्हें सुनने को आती थी. इसी सिलसिले में जेपी का भागलपुर आगमन भी हुआ था. साथ में उनकी पत्नी प्रभावती भी थी, जो कांग्रेस के बड़े नेता ब्रज किशोर प्रसाद की सुपुत्री थीं. भागलपुर के स्थानीय लाजपत पार्क में जेपी की सभा हुई थी. भागलपुर के सभी लोग उन्हें सुन एवं देख सके, इसलिए एक ऊंचा मंच बनवाया गया था. सारा शहर जेपी को देखने और सुनने के लिए उमड़ पड़ा था. लाजपत पार्क में लाखों की संख्या में भीड़ एकत्र हो गई थी. अपने भाषण में उन्होंने अंग्रेजी नीति की आलोचना की और फूट डालो शासन करो के नीति के बारे में चेताया. साथ ही उन्होंने कांग्रेसियों को चेताया कि अंग्रेजों द्वारा फैलाए हुए जाल में नहीं फंसे. कहा था कि उन्हें लगता है कि कांग्रेस का नेतृत्व अब संघर्ष नहीं करना चाहता और वह ब्रिटिश साम्राज्य से समझौता करना चाहता है. गांधीजी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और कांग्रेस का नेता यह समझते हैं कि अंग्रेजों से बातचीत कर आजादी प्राप्त की जा सकती है, लेकिन मेरे ऐसे समाजवादियों का यह मानना है कि हमें स्वतंत्रता अपनी शक्ति से छीननी होगी. भारतीय जनता को लंबे समय तक संघर्ष रहने के लिए तैयार रहना होगा. उनके लिए जोशीले भाषण से भीड़ में उत्साह की लहर दौड़ पर गई और सारा वातावरण जयप्रकाश नारायण जिंदाबाद और जयप्रकाश संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं के नारों से गूंज उठा था. उनके साथ मंच पर भागलपुर के कांग्रेस के बड़े नेता कीर्ति नारायण सिंह, जिला बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जोगेंद्र नारायण सिंह (वकील) भागलपुर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर नारायण अग्रवाल, कांग्रेस समाजवादी दल के नेता शिव धारी सिंह आदि मौजूद थे. जेपी शिव भवन कंपाउंड में ठहरे थे इस संस्मरण की चर्चा भागलपुर के प्रख्यात समाजसेवी एवं गांधीवादी स्वर्गीय मुकुटधारी अग्रवाल ने अपने संस्मरण इंद्रधनुष जैसी जिंदगी में किया हैं और उन्होंने अपने पुस्तक में लिखा हैं कि उस समय उनकी उम्र मात्रा 11-12 वर्ष की थी जब वह जय प्रकाश नारायण को सुनने के लिए लाजपत पार्क गए थे.

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