bhagalpur news. सुलतानगंज एसएचओ पर केस दर्ज करने व वेतन रोकने का दिया आदेश

Author Atul kumar
Updated:
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भागलपुर व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 16 संदीप सिंह की अदालत में एक अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुलतानगंज थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार की लापरवाही सामने आयी है

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भागलपुर व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 16 संदीप सिंह की अदालत में एक अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुलतानगंज थानाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार की लापरवाही सामने आयी है. कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए थानाध्यक्ष के विरुद्ध बीएनएस की धारा 210 के तहत विविध वाद दायर करने का आदेश दिया है, जबकि थानाध्यक्ष के वेतन रोकने के पूर्व में दिये गये आदेश में कार्रवाई नहीं करने पर एसएसपी भागलपुर और जिला कोषागार पदाधिकारी से भी कारण पूछा है. दूसरी तरफ इंजरी रिपोर्ट अनुपलब्ध होने की स्थिति में आरोपितों की जमानत दे दी गयी है. क्या है मामला

यह मामला सुलतानगंज थाना कांड संख्या 76, वर्ष 2025 से जुड़ा है. मामले में सूचक ने गुड़िया देवी ने राजीव यादव, बिहारी यादव समेत सात लोगों पर मारपीट और जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया था. इसी मामले में आरोपित पक्षों ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसके आधार पर सुनवाई की जा रही थी. सुनवाई के दौरान सुलतानगंज थानाध्यक्ष से बार-बार इंजरी रिपोर्ट की मांग की गयी, लेकिन थानाध्यक्ष ने रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया. यहां तक कि कारण पृच्छा का भी जवाब नहीं दिया. 18 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने थानेदार का वेतन रोकने का आदेश दिया था, लेकिन वेतन रोकने की कार्रवाई भी नहीं हो सकी. इस आदेश के बाद भी थानाध्यक्ष सचेत नहीं हुए और न तो कोर्ट में जवाब दाखिल किया और न ही उपस्थित हुए. मंगलवार को सुनवाई के दौरान पीड़ित की इंजरी रिपोर्ट अनुपलब्ध करने के कारण आरोपितों राजीव कुमार, बिहारी यादव, कुनकुन यादव, अशोक कुमार, बिट्टू यादव, दीपनारायण यादव और मुकेश यादव की अग्रिम जमानत की याचिका को स्वीकृत कर लिया गया. सभी आरोपितों को दो जमानतदारों की शर्त पर और 10-10 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दी गयी है.

कोर्ट ने लगायी फटकार

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न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि थानाध्यक्ष एक लोक सेवक हैं और कानूनन न्यायालय के आदेशों का पालन करना उनका दायित्व है. रिकार्ड से प्रथम दृष्ट्या यह स्थापित होता है कि थानाध्यक्ष ने न्यायालय के वैध और छह से अधिक बार दिये गये आदेशों की अवहेलना की. अदालत ने माना कि अंतिम इंजरी रिपोर्ट न देने के कारण अग्रिम जमानत याचिका के निपटाने में अनावश्यक देरी हुई और न्यायिक प्रक्रिया बाधित हुई. अदालत ने इसे जानबूझ कर चूक और कानून की अवहेलना करार दिया.

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